Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

जल, जंगल, जमीन

मिट्टी क्षरण और वर्षा पानी को रोकना मरुस्थलीकरण का समाधान

17 जून : विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा रोकथाम दिवस मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण आज वैश्विक संकट बन चुके हैं, जो दुनिया की एक-तिहाई भूमि और अरबों लोगों की आजीविका को प्रभावित कर रहे हैं। भारत में स्थिति और भी गंभीर है,…

पर्यावरणविद् आलोक शुक्ला बोले : हसदेव बचाओ आंदोलन ने देश भर में बढ़ाई पर्यावरण चेतना

भोपाल, 13 जून। हसदेव अरण्य बचाओ आंदोलन ने देशभर में पर्यावरण संरक्षण को लेकर युवाओं और नागरिक समाज में नई चेतना और सक्रियता पैदा की है। अब केरल से लेकर जम्मू तक युवा पर्यावरण के सवालों पर एकजुट होकर आवाज़…

ओडिशा में जन आंदोलनों पर राज्य दमन के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर निंदा

24 कार्यकर्ताओं और आदिवासियों के प्रवेश पर दो माह की रोक पर नागरिकों ने जताई गहरी चिंता मुंबई, 13 जून। ओडिशा के रायगडा जिले में शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित पर्यावरण दिवस कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ…

नदियों को नाथने के नतीजे

सब जानते हैं कि आधुनिक विकास की बुनियाद प्रकृति-पर्यावरण, खासकर नदियों को क्रूरता से नष्ट करने पर टिकी है। यह भी सभी जानते-भुगतते हैं कि प्रकृति-पर्यावरण और नदियों की बर्बादी इंसानों को समाप्त कर सकती है, लेकिन इसे कोई बदलना…

जन-श्रम और प्रकृति का मेल : बेतवा उद्गम स्थल के पुनर्जीवन की पहल

डॉ. परशुराम तिवारी मध्यभारत की प्राचीन नदी बेतवा के उद्गम स्थल झिरी में एक प्रयोग संपन्न हुआ है। 25 से 31 मई 2025 तक आयोजित “बेतवा श्रमदान सप्ताह” में सर्वोदय विचारधारा से प्रेरित समाजसेवियों और ग्रामीणों ने मिलकर केवल श्रम…

संकट में पहाड़, मनुष्य और पर्यावरण

गांधी विचार को मानने वालों में बेहद वरिष्ठ और सम्मानित राधा बहन अपनी देशभर की अनेक जिम्मेदारियों के अलावा बरसों से हिमालय में रहकर उसकी बर्बादी भी देख रही हैं। वे बस भर उन योजनाओं पर उंगली उठाती रहती हैं…

नदी जोड़ से बेहतर है, नदी-तालाब जोड़

ठेकेदारों-इंजीनियरों-राजनेताओं का गठजोड जब ‘विकास’ की मशक्कत में लग जाता है तो नदी-जोड जैसी परियोजनाएं जन्म लेती हैं। कमाल यह है कि समाज की परखी-पहचानी स्थानीय पद्धतियां जल्दी, सस्ता और नियंत्रित पानी उपलब्ध करवा सकती हैं, लेकिन पूंजी के लिए…

सैरनी : नायाब है, एक नदी का लौटना

पर्यावरणविद् राजेन्द्र सिंह से कुमार सिद्धार्थ की बातचीत मध्यप्रदेश–राजस्थान की सीमा पर एक आमफहम-सी, साल के अधिकांश समय सूखी रहने वाली नदी थी–सैरनी। यह इलाका डकैती के अलावा भीषण गरीबी की चपेट में है, इतनी गरीबी कि वहां बसी सहरिया…

बेगूसराय : पेप्सी बाटलिंग प्लांट से हो रहा भू गर्भ जल का दोहन

बिहार के बेगूसराय में पेप्सी के बॉटलिंग प्लांट ने पानी के संकट को गंभीर बना दिया है। भूगर्भ जलस्तर 20-30 फीट तक गिर गया है, चापानल सूख गए हैं और पानी दूषित हो गया है। हर दिन 12 लाख लीटर…

ओडिशा के वॉटर मैन रंजन पांडा को मिला ओडिशा लीडरशिप अवॉर्ड 2025

जलवायु परिवर्तन और जल संरक्षण के क्षेत्र में तीन दशकों से सक्रिय हैं रंजन पांडा देश के अग्रणी पर्यावरणविदों में से प्रमुख रंजन पांडा, जिन्हें ‘वॉटर मैन ऑफ ओडिशा’ और ‘क्लाइमेट क्रूसेडर’ के रूप में जाना जाता है, को वर्ल्ड…