वन संरक्षण अधिनियम में संशोधनों के विरोध में 30 जून को राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध का आह्वान

नईदिल्‍ली, 28 जून। देश के अलग-अलग राज्यों में केंद्र सरकार द्वारा बड़े स्तर पर भूमि और वन हड़पने के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए बना एक सांझा मंच भूमि अधिकार आन्दोलन से जुड़े देश के 45 से अधिक संगठनों/ जनसंगठनों ने वन संरक्षण अधिनियम में प्रस्तावित किये गये संशोधनों के विरोध में इन संशोधनों को वापस लेने और वन संरक्षण अधिनियम को वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के साथ लाने की मांग की हैं। भूमि अधिकार आन्दोलन ने आव्‍हान किया है कि देश भर में 30 जून 2023 को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाया जाए क्‍योंकि यह दिन वन भूमि की बेतहाशा निरंकुश लूट और वन संरक्षण अधिनियम में प्रस्तावित जन विरोधी संशोधनों के खिलाफ विरोध के एक शक्तिशाली प्रतिरोध के रूप में काम करेगा।   

भूमि अधिकार आन्दोलन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि  वन संरक्षण अधिनियम को वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के साथ लाने से ग्राम सभाओं के निर्णय लेने का अधिकार सुनिश्चित किये जा सकेंगे। स्थानीय समुदाय की भागीदारी और सहमति के साथ ही पारिस्थितिक तंत्र और जैव विविधता के संरक्षण को किसी भी तरह के वन संरक्षण और सरकारी ढांचे में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

भूमि अधिकार आन्दोलन से जुड़े जन संगठनों में जनांदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम), अखिल भारतीय किसान सभा (कैनिंग लेन), अखिल भारतीय किसान सभा, ऑल इंडिया  किसान खेत मज़दूर संगठन, अखिल भारतीय किसान महासभा, ऑल इंडिया यूनियन ऑफ फॉरेस्ट वर्किंग पीपल, बुंदेलखंड मजदूर किसान शक्ति संगठन, दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच, हिमधारा कलेक्टिव, जन संघर्ष समन्वय समिति, जनमुक्ति वाहिनी, ज़िंदाबाद संगठन, कष्टकरी संगठन, लोक मुक्ति संगठन, लोकसंघर्ष मोर्चा, लोक शक्ति अभियान, नर्मदा बचाओ आंदोलन,  आदिवासी एकता परिषद, आदिवासी मुक्ति संगठन, झारखंड बचाओ आंदोलन आदि प्रमुख है।

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जल, जंगल,जमीन के मुद्दे पर काम रहे इन जन संगठनों/ संगठनों ने जारी विज्ञप्ति में कहा है कि  देश भर में वन भूमि का आशातीत दोहन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर क्षति पहुँचा रहा है और परम्परागत समुदायों को विस्थापित होने पर मजबूर कर रहा है। वन संरक्षण अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन इन समुदायों के अधिकारों की कब्र खोदने का काम कर रहे हैं। अगर समय रहते इस बारे में कुछ आवाज नहीं उठाई गई तो कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद हासिल किये गये वन अधिकार अधिनियम जैसे मज़बूत कानून को बेहद कमज़ोर बना दिया जाएगा।

भूमि अधिकार आन्दोलन ने कहा कि वन संरक्षण संशोधन विधेयक 2023 में प्रस्तावित संशोधनों ने अनेक महत्वपूर्ण चिंताओं और विरोध की आवश्यकता को जन्म दिया है। इन संशोधनों के खिलाफ विरोध के कई कारण हैं उनमें वन क्षेत्रों को घटाना, हाशिये पर मौजूद समुदायों के अधिकारों का उल्लंघन, सत्ता का सकेंद्रीकारण,  अनावश्यक छूट और सही निरीक्षण की कमी, ग्राम सभाओं को शक्तिहीन बनाना आदि महत्‍वपूर्ण है।

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