भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले पहाड़ों में विकास योजनाओं की जिद ने जानलेवा आफतें खड़ी की हैं। नतीजे में पहाड़ और उन पर बसा जीवन लगातार आपदाओं की चपेट में बना रहता है। कमाल यह है कि…
जैव विविधता बचाने की पर्यावरणविदों की अपील को प्रशासन का समर्थन इंदौर, 30 अप्रैल । मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित ऐतिहासिक पोलोग्राउंड क्षेत्र को सौ प्रतिशत हरित क्षेत्र के रूप में ‘भारत वन’ विकसित करने की पहल को आज एक बड़ी…
तकनीकी प्रगति और आर्थिक विकास की इस दौड़ में एक ऐसी आवाज़ है जिसे बार-बार अनसुना किया जाता है—जंगलों की। ये जंगल, जो सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं बल्कि जीवन का आधार हैं, हर दिन विकास की कीमत चुका रहे…
चंबल में तरुण भारत संघ ने जल संरक्षण के ज़रिए बदला बागियों का जीवन राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा पर फैले चंबल क्षेत्र को कभी डकैतों की धरती कहा जाता था, लेकिन आज यही धरती जल संरक्षण और शांतिपूर्ण जीवन…
पुराणों में यमुना को मृत्यु के देवता यम की बहन बताया गया है, लेकिन हमारी आती-जाती सरकारें और जहां-का-तहां बैठा समाज इस धारणा को भी ठेंगे पर मारता है। देश की एन राजधानी में यमुना को बदहाल करने में किसी…
दरिपल्ली रामैया का जीवन पर्यावरण संरक्षण की जीवंत मिसाल रहा। उन्होंने अकेले ही एक करोड़ से अधिक पौधे रोपकर बंजर ज़मीनों को हरित बना दिया। बीज जेब में और पौधों का सपना आंखों में लिए वे जीवन भर पेड़ लगाते…
झीलें और तालाब स्थानीय समाज के लिए पानी के अविरल स्रोत की तरह पहचाने जाते हैं, लेकिन विडंबना यह है कि ये ही समाज अपने पडौस के इन जलस्रोतों को लगातार बिगड़ने में लगा हैं। क्या हो, यदि झीलों-तालाबों को…
गोपेश्वर, 3 अप्रैल। चिपको आंदोलन की पहली रणनीतिक बैठक की 53वीं वर्षगांठ के अवसर पर चिपको की मातृ संस्था दशोली ग्राम स्वराज्य मंडल द्वारा “वर्तमान में पर्यावरण की चुनौतियाँ” विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित…
परियोजना की मंजूरी पर नदी घाटी मंच और जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय का बयान नई दिल्ली, 3 अप्रैल। केंद्र सरकार ने कोशी-मेची नदी जोड़ परियोजना को मंजूरी दे दी है। 28 मार्च 2025 को प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) द्वारा…
नई दिल्ली, 27 मार्च। केंद्र सरकार की चुप्पी के चलते देशभर में लाखों आदिवासी और वनवासी समुदायों पर बेदखली का खतरा मंडरा रहा है। देश के सौ से अधिक जन संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपना संवैधानिक कर्तव्य…