कृषि संसार

किसान आंदोलन : जानने-सीखने लायक कुछ बातें!

देश की राजधानी की सीमाओं पर बैठे किसानों में यह विभाजन दिखाई नहीं पड़ता, लेकिन आखिर यह एक ‘आपातकाल’ भर है। बिना किसी बहस-मुबाहिसे के पहले अध्‍यादेश जारी करके और फिर संसद के दोनों सदनों में पारित करवाकर लाए गए…

किसानों के विरोध की विरासत

कडकती सर्दी में डेढ-दो हफ्तों से दिल्‍ली में धरना दिए बैठे देशभर के किसानों के ‘जीने-मरने’ की इस लडाई को पंजाब-हरियाणा के किसानों का नेतृत्‍व मिला है। सवाल है कि क्‍या पंजाब-हरियाणा के किसानों को उनके इतिहास से कोई प्रेरणा…

किसान भारत की आत्मा है, उसे सम्‍मान दें

किसान और सरकार वार्ता के छः दौर पूरे हुए है। सीधी मामूली माँग है। किसान विरोधी जो तीन कानून अलोकतांत्रिक तरीके से बनाये है, उन्हें जल्दी से जल्दी रद्द करो। इस मांग के ऊपर ज्यादा संवाद या वार्ता में समय…

आपदाओं को अवसर में पलटने में माहिर हैं मोदी !

किसान आंदोलन प्रधानमंत्री और उनकी सरकार से अधिक अब विपक्षी दलों की संयुक्त ताक़त और जनता के उस वर्ग के लिए चुनौती बन गया है जो कृषि क़ानूनों की समाप्ति को सत्ता के गलियारों में प्रजातांत्रिक मूल्यों की वापसी के…

किसान आंदोलन : किसानों व सरकार में तकरार …. आर या पार

खेती किसानी में क्रांतिकारी बदलाव लाने की उम्मीद में दम-खम लगाते करीब 3 दर्जन किसानी संगठन व केन्द्र सरकार दोनो खेती कानूनों को लेकर बुने गए अपने – अपने चक्रव्यूह से किसी तरह बाहर आने के लिए छटपटा रही है।…

खेती का खाका बदलने का मौका

किसान और किसानी की इस बदहाली में नीति-निर्माताओं और सत्‍ताधारियों की उन मान्‍यताओं ने और रंग चढाया जिनके मुताबिक किसानों की बदहाली कम उत्‍पादन, बाजारों से दूरी और कृषि-क्षेत्र पर अधिक दबाव के कारण हो रही है। नतीजे में सरकारी…

क्‍या दस बरस पूर्व की गई एमएसपी से जुड़ी अपनी सिफारिशों को लागू करेंगे प्रधानमंत्री ?

केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों का विरोध, फायदे की उस खेती की संजीवनी बूटी या पारस पत्थर के इर्द गिर्द सिमट गया है जिसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी ) कहा जाता है। यह कुछ फसलों पर ही लागू है…

किसान हितैषी नये कृषि कानून के बाद भी देशभर के किसानों में हताश

निमाड़ में कपास खरीदी की हकीकत को उजागर करती एक रिपोर्ट उत्तर भारत के आंदोलनरत किसान कड़ाके की ठंड की परवाह किए बिना दिल्ली में ठीक उसी तरह मुस्तेद है, जैसे घुप्प अंधेरे की कडकड़ाती ठंड भरी रातों में सिंचाई…

क्या ‘जंतर मंतर‘ बन पाएगा नया शाहीन बाग़ ?

किसान आंदोलन से निकलने वाले परिणामों को देश के चश्मे से यूँ देखे जाने की ज़रूरत है कि उनकी माँगों के साथ किसी भी तरह के समझौते का होना अथवा न होना देश में नागरिक-हितों को लेकर प्रजातांत्रिक शिकायतों के…

क्या अब किसानों के शाहीन बाग तैयार करना चाहती है केंद्र सरकार?

क्या केंद्र सरकार एक बार फिर “शाहीन बागों” का विरोध झेलने को तैयार है? या वह खुद ही किसानों को “शाहीन बाग” बनाने के लिए मजबूर कर रही है? और क्या किसान खुद इस तरह के लंबे और शांतिपूर्ण आंदोलन…