कानून

सुप्रीम कोर्ट का एक और बड़ा फैसला मातृत्व अवकाश हर महिला का अधिकार, कोई छीन नहीं सकता

सुप्रीम कोर्ट ने मातृत्व अवकाश पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि यह हर महिला का बुनियादी अधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी संस्थान किसी महिला को उसके मातृत्व अवकाश के अधिकार से वंचित…

Waqf Amendment Act : वक्फ-संशोधन के बहाने

पहलगाम की आतंकी दुर्घटना के कारण लोगों की नजरों से थोड़ा ओझल हुए वक्फ-विवाद ने दरअसल हमारी संवैधानिक मान्यताओं और राजनीतिक शिष्टाचार पर सवाल खड़े किए हैं। वक्फ कानून में बदलाव ने कुछ जरूरी मुद्दों को उजागर किया है। वक्फ…

डॉ. अंबेडकर : संवाद के पक्षधर, द्वंद्व के विरोधी

भारतीय संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर संसद में जो दृश्य सामने आए, वे डॉ. भीमराव अंबेडकर की आत्मा को व्यथित कर सकते हैं। संविधान निर्माता को हथियार बनाकर की जा रही राजनीति न केवल लोकतंत्र की मूल आत्मा के विपरीत…

किशोर प्रेम और पॉक्सो : सुरक्षा या सजा

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल में किशोरों के प्रेम करने के नैसर्गिक अधिकार की तरफदारी करते हुए एक बेहद जरूरी और सामयिक बहस छेड़ दी है। अब एक तरफ बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए 13 साल पहले बनाया…

सुप्रीम कोर्ट से संवैधानिक अधिकार : मौसम और मजदूरी पर फैसले

आज के समय में जलवायु परिवर्तन और बेरोजगारी के मुद्दे हमारे सामने मुंह बाए खड़े हैं, इनसे निपटने के लिए सुप्रीमकोर्ट के फैसले भी मौजूद हैं, लेकिन किन्हीं अनजानी गफलतों, हितों या भूल जाने की राष्ट्रीय बीमारी के चलते उन्हें…

विधानसभा चुनाव : झारखंड में झूलता ‘पेसा कानून’

हाल में घोषित झारखंड विधानसभा चुनावों की 13 और 20 नवंबर की तारीखों ने अब तक कछुआ चाल से ठुमक रहे ‘पेसा कानून’ को फिर से हवा दे दी है। करीब तीन दशक पहले संसद में पारित आदिवासियों के लिए…

सर्वोच्च न्यायालय ने एनजीटी को सिलिकोसिस से ग्रस्त उद्योगों के प्रभाव की निगरानी का दिया जिम्‍मा

सिलिकोसिस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का महत्‍वपूर्ण फैसला दिल्ली, 7 अगस्त 2024। सर्वोच्च न्यायालय में सिलिकोसिस पीड़ितों के हक के लिए चल रही एक जनहित याचिका के सिलसिले में 6 अगस्त 2024 को न्यायालय की युगल पीठ जस्टिस विक्रम नाथ…

न्यूनतम मजदूरी : अकस्मात कम की गई मजदूरी दरें

राम गोपाल पाण्डेय दिन दूनी, रात चौगुनी बढ़ती मंहगाई और नतीजे में जीवन यापन की अकल्पनीय मुश्किलों के बीच अचानक वैधानिक न्यूनतम मजदूरी भी घटा दी जाए तो क्या होगा? एक तो वैसे भी नियोक्ता कम-से-कम मजदूरी देकर पैसा बचाने…

उपभोक्ताओं की उम्मीद के कानून

मौजूदा दौर में इंसानों की पहचान का एक बेहद जरूरी संकेत उसका उपभोक्ता होना है। यानि आप कभी भी, कुछ भी, कहीं भी कर रहे हों, लेकिन अंतत: आप एक उपभोक्ता जरूर होते हैं। ऐसे में हम अपनी यह भूमिका…

तमिलनाडु : बंदरगाह के विरोध में तमिल किसान

राजनीतिक रूप से भले ही सत्ताधारी दल अलग-अलग दिखाई देते हों, लेकिन विकास के मामले में सभी में गजब की एकरूपता है। तमिलनाडु को ही लें तो वहां उत्तर भारत की भाजपा-कांग्रेस जैसी पार्टियों से सर्वथा भिन्न ‘द्रविड मुनेत्र कषगम’…