सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी एक स्वतंत्र मंच है जिसका उद्देश्य भारत के भीतर वित्तीय जवाबदेही को मजबूत और बेहतर बनाना है। संस्था ने बजट 2022 के पूर्व हमारा पैसा हमारा हिसाब श्रृखंला में देश के आम जन बजट से क्या चाहते है इस पर स्टोरी की है। दो साल महामारी से गुजरने के बाद, वित्तीय संकटों से जूझते देश के लोग, आने वाले बजट से क्या चाहते हैं? क्या सरकार को जनता की आह सुनाई देती है? आईए जानें।

अनशन से आगे का संघर्ष: सोनम वांगचुक से उठी एक ऐसी अपील, जिसने लोकतंत्र की आत्मा को छू लिया
लोकतांत्रिक आंदोलनों का इतिहास केवल संघर्षों का इतिहास नहीं है, बल्कि उन नैतिक दुविधाओं का भी इतिहास है, जहाँ एक ओर सिद्धांतों के लिए जीवन दांव पर लगा होता है और दूसरी ओर वही जीवन आंदोलन की सबसे बड़ी पूंजी

