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केरल के मुख्यमंत्री से ऑल इंडिया फेमिनिस्ट अलायंस की अपील : आशा कार्यकर्ताओं की मांगें पूरी करने की दरकार

तिरुवनंतपुरम,4 सितम्बर। जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (NAPM) से जुड़ा ऑल इंडिया फेमिनिस्ट अलायंस (अलिफ़ा) ने केरल के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) और केरल आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन के संघर्ष का समर्थन किया है। संगठन ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे आशा कार्यकर्ताओं की न्यायपूर्ण मांगों पर तुरंत निर्णायक कार्रवाई करें, ताकि उनकी तकलीफें कम हों और साथ ही केरल के सार्वजनिक स्वास्थ्य मॉडल की साख भी बरकरार रहे।

अखिल भारतीय नारीवादी मंच (अलिफ़ा) ने कहा कि आशा कार्यकर्ता 10 फरवरी 2025 से राज्य सचिवालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। वे गरिमा, सुरक्षा और उचित वेतन की मांग कर रहे हैं। लंबे आंदोलन की वजह से इन महिला स्वास्थ्यकर्मियों का कई महीनों का वेतन छूट चुका है और अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो इन कार्यकर्ताओं की समस्याएँ और बढ़ेंगी।

मंच ने मांग की है कि राज्य सरकार वेतन न्याय सुनिश्चित करे और प्रत्येक आशा कार्यकर्ता को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जुड़ा 21,000 रुपये मासिक वेतन दे। साथ ही तीन महीने से लंबित मानदेय ब्याज सहित तुरंत जारी करने की बात कही गई है। अलिफ़ा ने आशाओं को “स्वयंसेवी” के बजाय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की नियमित कर्मचारी घोषित करने और उन्हें ईपीएफ, ईएसआई, सवेतन मातृत्व अवकाश और दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाएँ देने की भी मांग रखी है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि आशा कार्यकर्ताओं के लिए पाँच लाख रुपये की सेवानिवृत्ति राशि और अंतिम वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में सुनिश्चित की जाए। सेवा से बाहर होने की 62 वर्ष की उम्र सीमा को समाप्त करने पर भी जोर दिया गया है। इसके साथ ही संगठन ने सुरक्षित और सहयोगी कार्यस्थल उपलब्ध कराने की मांग की है, जिसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पीपीई, स्मार्टफोन, डेटा प्लान, यात्रा भत्ता और विश्राम कक्ष की व्यवस्था शामिल है। आशाओं के लिए आठ घंटे का कार्यदिवस और सप्ताह में एक दिन का अवकाश अनिवार्य करने तथा अतिरिक्त कार्य का अलग से भुगतान करने की बात भी उठाई गई है।

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अलिफ़ा ने राज्य सरकार से बजट और निगरानी में पारदर्शिता की भी अपील की है। इसके तहत आशा यूनियनों, स्वतंत्र नारीवादी संगठनों और अधिकारियों की भागीदारी से संयुक्त निगरानी समिति बनाने और हर तिमाही रिपोर्ट सार्वजनिक करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही जिला-वार वेतन और प्रोत्साहन संबंधी आँकड़े राज्य पोर्टल पर डालने की मांग की गई है।

अलिफ़ा ने कहा है कि वह आशा कार्यकर्ताओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने वाली किसी भी प्रक्रिया में सहयोग देने को तैयार है। संगठन ने उम्मीद जताई है कि केरल सरकार इस दिशा में ठोस और न्यायपूर्ण कदम उठाएगी।

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