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रीमा नानावती को मिला हिलेरी रोडम क्लिंटन पुरस्कार, गांधीवादी मूल्यों को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान

रीमा नानावती को मिला हिलेरी रोडम क्लिंटन पुरस्कार, गांधीवादी मूल्यों को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान

कस्तूरबा ट्रस्ट सहित अन्‍य गांधी संस्थाओं ने दी बधाई

भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता और पद्मश्री से सम्मानित रीमा नानावती को महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, खाद्य सुरक्षा और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित हिलेरी रोडम क्लिंटन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार 15 अक्टूबर को अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट फॉर विमेन, पीस एंड सिक्योरिटी में अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी रोडम क्लिंटन ने प्रदान किया। नानावती को मिले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान पर कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट और गांधी विचार से जुड़ी संस्थाओं ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है। संस्‍थाओं ने उनके कार्यों को गांधी और कस्तूरबा के ग्रामीण महिला स्वावलंबन के आदर्शों से प्रेरित प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट की सम्मानित ट्रस्टी रीमा नानावती का कार्य महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। उन्होंने असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को संगठित करने, उन्हें आजीविका के साधनों का स्वामित्व दिलाने और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए लंबे समय से प्रयास किए हैं। उनके काम में गांधीवादी विचारों के अनुरूप स्वावलंबन, सामुदायिक भागीदारी और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को विशेष महत्व दिया गया है।

भारत के स्वरोजगार महिला संघ (सेल्फ एम्प्लॉयड विमेन्स एसोसिएशन-सेवा) की निदेशक के रूप में नानावती ने महिलाओं की आजीविका और अधिकारों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में सेवा ने असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिकों को संगठित करने और उनके आर्थिक हितों की रक्षा करने की दिशा में व्यापक काम किया है।

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वह ऊर्जा, कृषि व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण, कचरा पुनर्चक्रण और कपड़ा उद्योग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के स्वामित्व वाले उद्यमों और उनके नेतृत्व वाली आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण के जरिये महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण पर ध्यान केंद्रित करती हैं।

खाद्य सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी नानावती के प्रयास उल्लेखनीय हैं। उन्होंने ‘सेवा’ की खाद्य सुरक्षा पहल शुरू की, जो लगभग दस लाख परिवारों तक पहुंचती है। इसके माध्यम से परिवारों की खाद्य उपलब्धता और आजीविका को मजबूत करने का प्रयास किया गया है। वहीं, ‘हरियाली’ हरित ऊर्जा एवं आजीविका पहल के जरिए महिलाओं को नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुंच उपलब्ध कराने और ऊर्जा के विकल्पों को उनकी आजीविका से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

नानावती ने संकट के समय महिलाओं और उनके परिवारों की आजीविका बहाल करने के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अफगानिस्तान में संकटग्रस्त समुदायों और श्रीलंका में भूकंप से प्रभावित ग्रामीण महिलाओं के जीवन तथा आजीविका के पुनर्निर्माण और पुनर्वास से जुड़े प्रयासों में उनका योगदान रहा है। इन पहलों ने महिलाओं को आपदा और संकट के बाद दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने के अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

भारत सरकार ने वर्ष 2013 में रीमा नानावती को सामाजिक क्षेत्र में उनके योगदान के लिए देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया था। हिलेरी रोडम क्लिंटन पुरस्कार से सम्मानित होना उनके लंबे सामाजिक कार्य और महिला सशक्तीकरण के प्रति प्रतिबद्धता का एक और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मूल्यांकन है।

वर्ष 2026 के पुरस्कार के अन्य सम्मानित लोगों में फैशन डिजाइनर और टोरी बर्च फाउंडेशन की संस्थापक टोरी बर्च तथा नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित, ग्रामीण बैंक के संस्थापक और बांग्लादेश सरकार के पूर्व मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस शामिल हैं। पूर्व पुरस्कार विजेताओं में वेनेजुएला के राजनीतिक कैदी, बांग्लादेश के छात्र विरोध प्रदर्शन के नेता, ऑस्ट्रेलिया की पूर्व प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड, ब्रिटेन के पूर्व विदेश सचिव विलियम हेग आदि शामिल हैं।

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हिलेरी रोडम क्लिंटन पुरस्कार महिलाओं के अधिकारों को आगे बढ़ाने और अधिक शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित दुनिया के निर्माण में असाधारण नेतृत्व करने वाले व्यक्तियों को दिया जाता है। हिलेरी क्लिंटन और जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय का इंस्टीट्यूट फॉर विमेन, पीस एंड सिक्योरिटी इस सम्मान के माध्यम से उन प्रयासों को पहचान देता है, जो महिलाओं की भागीदारी, सुरक्षा और नेतृत्व को मजबूत करते हैं।

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