Year: 2024

खादी विचार को टिकाने के लिए सरकारी तंत्र से मुक्ति आवश्यक: गौतम भाई

कुमारप्पापुरम में दो दिवसीय खादी सभा प्रारंभ वर्धा 22 फरवरी। खादी एक समग्र और पूरिपूर्ण विचार है। इसकी बुनियाद सत्य और अहिंसा है। खादी विचार को टिकाने के लिए सरकारी तंत्र से मुक्ति आवश्यक है। वास्तव में खादी बगावत का…

साहित्‍य : अंधायुग और कविता की पुकार

चंद्रकांत देवताले समाज के सुख दुख को अपने साहित्‍य में स्‍थान देने वाले यशस्वी कवि चंद्रकांत देवताले ने मूल रूप से हिंदी कविता में बदलाव के पक्षधर रहे हैं। साहित्‍यकार देवताले अपने समय और भविष्य के कवि थे। वे सच…

Gold: सोने की सदारत

सोने से करेंसी की कीमत आंकने के दिन भले ही अब बीत गए हों, लेकिन सोने की चमक अब भी बरकरार है। भारत का सुरक्षित स्वर्ण भंडार के लिहाज से अग्रणी देशों में शामिल होना गौरव की बात है। क्या…

ओंकारेश्वर सौर ऊर्जा परियोजना : मछुआरों की याचिका पर सरकार को नोटिस जारी

सोलर प्लेट लगाने का कार्य याचिका के निर्णय पर निर्भर रहेगा एक महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम में उच्च न्यायालय ने ओंकारेश्वर सौर ऊर्जा परियोजना से प्रभावित मछुआरों की याचिका पर राज्य सरकार और परियोजनकर्ता रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड को जवाब देने…

विपक्ष नहीं ! जनता की एकता से डरना चाहिए !

करोड़ों ग़रीबों को मुफ़्त का अनाज बाँटा जा सकता है पर उन्हें भारत रत्नों से विभूषित करके भी राजनीतिक विपक्ष की तरह तोड़ा नहीं जा सकता। न तो नीतीश और न ही जयंत चौधरी ही देश के असली विपक्ष का…

2023 में चौंतीस बार कांपी है, हिन्दुस्तान की धरती

भू-वैज्ञानिक मानते हैं कि इंडियन पेनिसुला के यूरेशियन प्लेट से टकराने के नतीजे में धरती हिलती-डुलती है और भूकम्प आते हैं। इसके अलावा धरती के भीतर की ऊर्जा के दबाव में भी भूकम्पन होता है, लेकिन इसके प्रभाव-क्षेत्र में इंसानी…

कर्ज से विकास : बदहाली की अर्थव्यवस्था

मौजूदा संसद के संभवत: आखिरी सत्र में पेश किए गए अंतरिम बजट ने और कुछ किया हो या नहीं, मौजूदा सरकार की संभावित वापसी पर उसकी भावी योजनाओं को उजागर जरूर कर दिया है। मसलन किसानों की आय दोगुनी करने…

सनातन सांस्कृतिक लोक की पुस्तकों में बढ़ती प्रस्तुति

World Book Fair 2024 Delhi विश्‍व पुस्तक मेला दर्शक संख्या की दृष्टि से दुनिया का सबसे बड़ा मेला है। इस बार मेले का क्षेत्रफल 50,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में विस्तृत कर दिया है। इसमें 40 से ज्यादा देशों के 2000…

खतरे में आदिवासियों का अस्तित्व

अभी, चार-साढ़े चार सौ साल पहले तक देश के कई इलाकों में राज करने वाले आदिवासी आज ‘अनुसूचित जनजाति’ के सरकारी खांचे में कैसे सिमट गए हैं? क्या उन्हें कोशिश करके कमजोर बनाया गया है? क्या हमारे देश के नियम-कानून…

हरदा पटाखा फैक्ट्री : मौत और धमाकों से ही क्यों जागते हैं अधिकारी ?

देश-प्रदेश के अलग-अलग शहरों की पटाखा फैक्ट्री मजदूरों की मौत का सिलसिला लगातार चलता रहता है। शासन की ओर से ऐसी घटनाओं को बचाव के लिए नीति नियम निर्देश भी लगातार जारी किए जाते हैं। इसके बाद भी मौतें होती…