Month: March 2022

भगत सिंह की फांसी और महात्मा गांधी

महात्मा गांधी भी न केवल फांसी की सजा के विरोध में थे, वरन उन्होंने हिंसात्मक गतिविधियों में लिप्त, क्रांतिकारियों, नजरबंद लोगों की रिहाई की मांग लार्ड इरविन से की, जिन्हें अंग्रेजी हुकूमत ने बिना मुकदमा चलाए, बिना अभियोग लगाए या…

साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई के प्रकाश पुंज भगतसिंह

देश का साम्प्रदायिक माहौल बिगड़ रहा है। जो काम कभी अंग्रेजी हुकूमत करती थी वही काम इस समय देश का शासकवर्ग कर रहा है। देश का साम्प्रदायिक वातावरण बिगाड़ने, लोगों को बांटने और शासन करने की साजिशें परवान चढ़ रही…

रेडियोधर्मी कचरे का एक लाख वर्ष तक भंडारण!

कोयला संयंत्रों की तुलना में परमाणु उर्जा को स्वच्छ उर्जा माना जाता है। परमाणु उर्जा संयंत्रों की दक्षता भी अधिक होती है – समान मात्रा में कोयले की तुलना में 20,000 गुना अधिक उर्जा प्राप्त होती है। लेकिन इन संयंत्रों…

बेहाल पर्यावरण : बेहद नाकाफी है बजट

वैकल्पिक विकास पर विश्वास करने वाले व्यक्तियों, आंदोलनों और संस्थाओं के नेटवर्क ‘विकल्प संगम’ ने हाल ही में पेश किये गए देश के आम बजट का पर्यावरण की नज़र से विश्लेषण किया है।‘विकल्प संगम’ के विश्लेषण का ईशान अग्रवाल द्वारा…

समाज : परिवार में प्रताडित महिलाएं

हमारे समाज में महिलाएं, खासकर विवाहित महिलाएं सुरक्षित माने जाने वाले अपने-अपने घरों में भी असुरक्षित हैं और यह तब हो रहा है जब इसे लेकर तरह-तरह के कानून मौजूद हैं। क्या है, इस घरेलू हिंसा का दायरा? महिलाएं विवाह…

विश्‍व वानिकी दिवस : जंगल की जरूरत

21 मार्च विश्‍व वानिकी दिवस जलवायु के जानकारों ने बताया कि कार्बन सोखने में जंगलों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। विश्व के जंगल कुल कार्बन उत्सर्जन का 30 प्रतिशत अवशोषण कर लेते हैं। ‘इंटरनेशनल पेनल आन क्लायमेट चेंज’ (आयपीसीसी)…

इंदौर शहर में आ रहे नर्मदा के पानी का 45 प्रतिशत हिस्सा हो रहा बर्बाद, चौथे चरण की फिलहाल जरुरत नहीं

सेवा सुरभि द्वारा विश्व जल दिवस पर “कैसे हो स्मार्ट होते शहर में स्मार्ट जल प्रबंधन” विषय पर परिचर्चा का आयोजन इंदौर, 20 मार्च। जल जीवन है और जल ही अमृत है। हम इसकी एक-एक बूंद बचाएं और इसके प्रति…

कठपुतली कला : विलुप्त होती लोक कला को पुनर्जीवित करने की जरूरत

डॉ. संजीव कुमार 21 मार्च : विश्व कठपुतली दिवस विश्व कठपुतली दिवस प्रत्येक वर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है। इसकी कल्पना ईरान के प्रसिद्ध पपेटियर जावद जोल्फाघरी में सन् 2000 में XVIII कांग्रेस यूनियन इंटरनेशनेल डे ला मैरियनेट (यूएनआईएमए)…

Russia-Ukraine War : पर्यावरण के लिए भी घातक है, युद्ध

असंख्य इंसानों की प्रत्यक्ष मौतों के अलावा युद्धों से पीढी-दर-पीढी चलने वाली पर्यावरण की बर्बादी भी होती है। विडंबना यह है कि यह किसी को दिखाई तक नहीं देती। इन दिनों रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में भी…

‘द कश्मीर फाइल्स’ : कितनी फाइलें खोलेंगे आप ?

हर इतिहास के काले व सफेद पन्ने होते हैं, कुछ भूरे व मटमैले भी. वे सब हमारे ही होते हैं. कितनी फाइलें खोलेंगे आप ? दलितों-आदिवासियों पर किए गए बर्बर हमलों की फाइलें खोलेंगे ? आप थक जाएंगे इतनी फाइलें…