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शोध अध्ययन : महज 17 प्रतिशत श्रमिक ही जानते है मुफ्त राशन योजना के बारे में

शोध अध्ययन : महज 17 प्रतिशत श्रमिक ही जानते है मुफ्त राशन योजना के बारे में

शोध : सेंटर फॉर लेबर रिसर्च एंड एक्शन ने जारी किया सार संक्षेप, श्रमिकों में टीकाकरण को लेकर डर देश में कोविड महामारी की दूसरी लहर के बीच गैर संगठित क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों को काम के दिनों का काफी...

शोध : सेंटर फॉर लेबर रिसर्च एंड एक्शन ने जारी किया सार संक्षेप, श्रमिकों में टीकाकरण को लेकर डर

देश में कोविड महामारी की दूसरी लहर के बीच गैर संगठित क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों को काम के दिनों का काफी नुकसान हुआ है। इस कारण से उन्हें रोजी रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। यह तथ्य सिविल सोसायटी आर्गेनाइजेशन “सेंटर फॉर लेबर रिसर्च एंड एक्शन” के एक शोध अध्ययन (Survey) में सामने आया है। यह सर्वे (Survey) देश के सात जिलों में किया गया। इनमें राजस्थान के अजमेर और भीलवाड़ा, गुजरात के मेहसाणा, दाहोद, महिसागर, अहमदाबाद और सूरत शामिल हैं।

अप्रैल माह में किए गए इस सर्वे (Survey) में कुल 590 श्रमिकों से बातचीत की गई। इनमें 454 पुरुष और 136  महिलाएं शामिल हैं। यह श्रमिक मुख्यत: ईंट भट्ठे, कृषि कार्य, निर्माण कार्य, घरेलू सहायता और गन्ना उत्पादन एवं पिराई के काम से जुड़े हैं। इनमें राजस्थान के अजमेर और भीलवाडा के श्रमिक ईंट भट्ठे के काम में लगे हैं, जबकि अन्य जिलों के श्रमिक निर्माण कार्य, कृषि कार्य और घरेलू सहायता से जुड़े हैं। इस शोध अध्ययन (Survey) में काम की उपलब्धता, भोजन की उपलब्धता और श्रमिकों के बीच स्वास्थ्य और महामारी का विश्लेषण किया गया।

शोध अध्ययन (Survey) से उभरे मुख्य तथ्य

  • सर्वे (Survey) अवधि के दौरान लोगों को महीने में औसतन 18 दिन का काम मिल रहा था। ईंट-भट्ठा और गन्ना के काम को छोड़कर, अन्य क्षेत्रों के श्रमिकों को औसतन 15 दिनों से भी कम काम मिल रहा था। 65 प्रतिशत से अधिक श्रमिकों को 20 दिनों से कम का काम मिल रहा है।
  • कोविड की दूसरी लहर में कृषि मजदूर सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सब्जी बाजार प्रभावित होने से सब्जियों का बाजार भाव नीचे चला गया था। इस कारण से कम संख्या में कृषि श्रमिकों को काम पर रखा गया। मनरेगा का काम भी महामारी के कारण बंद हो गया था।
  • दूसरी लहर में लगातार राशन की उपलब्धता घट रही है। 47 प्रतिशत श्रमिकों ने कहा कि उनके पास राशन उपलब्ध है और 53 प्रतिशत अपने घर पर भोजन की कमी का सामना कर रहे हैं।
  • सर्वे (Survey) के दौरान 5 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनके पास कोई राशन उपलब्ध नहीं है। वहीं 15 प्रतिशत श्रमिकों के पास एक महीने का राशन उपलब्ध है।
  • असंगठित क्षेत्र महामारी से बुरी तरह प्रभावित है। मुफ्त राशन की सरकारी घोषणा के बारे में लोगों में जागरूकता की स्थिति बेहद खराब है। पता चला कि केवल 17 प्रतिशत श्रमिकों को मुफ्त राशन की घोषणा के बारे में पता था।
  • टीकाकरण के सवाल पर सर्वे (Survey) के दौरान काफी बहस हुई और 5 प्रतिशत श्रमिकों ने कहा कि उन्होंने टीकाकरण कराया है, जबकि 95 प्रतिशत ने नहीं कराने की बात कही। सर्वे से पता चलता है कि श्रमिकों में टीकाकरण को लेकर डर है।
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