Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

जल संरक्षण पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला संपन्न

भोपाल:12 मई।  देश एवं राज्य के कई इलाकों में गहराते जल संकट को ध्यान में रखते हुए भोपाल में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें मध्य प्रदेश के छतरपुर एवं पन्ना जिले के दो संस्थान परमार्थ समाज सेवी संस्थान एवं समर्थन तथा जर्मनी की अंतर्राष्ट्रीय संस्थान वेल्थ हंगर हिलफे द्वारा संयुक्त रुप पानी की संकट का हल निकालने हेतु स्वैच्छिक संगठनों को प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यशाला के दौरान जल संरक्षण एवं पेयजल संकट निवारण के लिए जनभागीदारी के महत्त्व को रेखांकित किया गया। साथ ही स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों को जनभागीदारी कैसे सुनिश्चित की जाए इस पर भी विस्तृत चर्चा की गयी । बुधवार एवं गुरुवार को आयोजित इस दो दिवसीय कार्यशाला में जल संकट की विभिन्न आयामों पर गहन चिंतन किया गया जिसमें पानी की समस्या का हल कैसे निकाला जाये इस पर प्रतिभागियों एवं विषेशज्ञों ने अपने विचार एवं अनुभव साझा किये।

कार्यशाला के दौरान समुदाय एवं सरकार को इस और साथ मिलकर कार्य करने पर मुख्य रूप से जोर दिया गया। इस कार्यक्रम के दौरान पानी से जुड़े ओपरेटर, फिटर, मैकेनिक आदि को समय-समय पर ज़रूरी प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया साथ ही जल संरक्षण के लिए समुदायों को महत्वपूर्ण भागीदार बनाने की बात की गयी। इस सन्दर्भ में बुंदेलखंड में कार्य करने वाली जल सहेलियों का उदाहरण  पेश करते हुए महिलाओं की उल्लेखनीय योगदान को चिह्नित करते हुए इस तरीके के प्रयास दूसरे क्षेत्रों में दोहराने की ज़रूरत पर बल दिया गया।

वेल्थ हंगर हिलफे के संजीव डे ने अपने प्रेजेंटेशन में विस्तार पूर्वक पानी को बचाने के लिए संगठन, समुदाय और सरकार की भूमिका का उल्लेख किया गया। इस दौरान जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (वाल्मी), भोपाल के जितेंद्र जैन ने जल-संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से अपने विचार रखे। कार्यक्रम के समापन सत्र में डॉ. संजय सिंह ने कहा कि यदि हमें पेयजल संकट को दूर करना है तो सरकार व समुदाय को एकजुटता से कार्य करने की जरूरत है साथ ही जल जीवन मिशन एवं जल निगम जैसे सिस्टम्स को मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कार्यशाला प्रदेश स्तर पर हुई है ठीक उसी तरह जिला स्तर पर छतरपुर व पन्ना में करने की जरूरत है ताकि जल संरक्षण के प्रति गहरी समझ बन सके। कार्यक्रम के अंत में जल निगम के मुख्य महाप्रबंधक अजय जैन ने कहा कि हम सभी को मिलकर कार्य करने की जरूरत तथा ऐसे कार्यक्रमों को जिला स्तर आयोजित करने की आवश्यकता है.

See also  खेती से खत्म होता पानी : उरुग्वे का उदाहरण काफी है

कार्यक्रम का संचालन मुख्य रूप से परमार्थ समाज सेवी संस्थान के सचिव एवं जल जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक, डॉ. संजय सिंह ने किया।  इस दौरान जल जीवन मिशन, अटल भूजल योजना, पीएचई विभाग समर्थन संस्था एवं कई स्वैच्छिक संगठनों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।  बुंदेलखंड से आयीं जल सहेलियां व पानी से जुड़े कई कार्यकर्ताओं ने इस कार्यशाला में ‌हिस्सा लिया‌।

Table of Contents

अनशन से आगे का संघर्ष: सोनम वांगचुक से उठी एक ऐसी अपील, जिसने लोकतंत्र की आत्मा को छू लिया

लोकतांत्रिक आंदोलनों का इतिहास केवल संघर्षों का इतिहास नहीं है, बल्कि उन नैतिक दुविधाओं का भी इतिहास है, जहाँ एक ओर सिद्धांतों के लिए जीवन दांव पर लगा होता है और दूसरी ओर वही जीवन आंदोलन की सबसे बड़ी पूंजी

Read More »

सोनम वांगचुक :  अनशन नहीं, सत्ता का चरित्र बदला है

सोनम वांगचुक का आमरण अनशन अब केवल शिक्षा सुधार या एक मंत्री की जवाबदेही का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिरोध की प्रभावशीलता की भी परीक्षा बन चुका है। इसी बीच न्यायालय ने उनके जीवन की रक्षा को

Read More »

यात्रा-वृत्तांत : अनोखी है बैतूल की भू-संस्कृति

भारत की विविध भू-संस्कृतियों की खोज में बैतूल एक ऐसा पड़ाव है, जहाँ प्रकृति, लोकजीवन, आस्था और सामुदायिक संस्कृति एक-दूसरे में सहज रूप से घुली-मिली दिखाई देती हैं। यह यात्रा-वृत्तांत एक शोधार्थी की आँखों से बैतूल की सांस्कृतिक और प्राकृतिक

Read More »