Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

गांधीजी की पुण्यतिथि पर समाजसेवी श्री शफी शेख का हुआ आत्मीय सम्मान

समाज सेवा में समर्पित शेख को गोयल चैरिटेबल संगठन ने भेंट किया स्कूटर

इंदौर, 30 जनवरी । महात्मा गांधी के बलिदान दिवस पर समाज कार्य महाविद्यालय के सभागार में निस्वार्थ भाव से समाज की विभिन्न रूपों में सेवा कर रहे श्री शफी शेख का आत्मीय अभिनंदन गोयल चैरिटेबल संगठन द्वारा किया गया। वक्ताओं ने शफी शेख द्वारा सामाजिक शिक्षा क्षेत्र, दिव्यांग संस्थाओं व गरीबों तबकों के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सरोज कुमार ने कहा हमारे देश का स्वभाव रहा है सर्व धर्म समभाव। हमारे यहां कट्टरता को नहीं मानवता को सम्मान दिया जाता है। जिसका अनुपम उदाहरण आज शफी भाई का सम्मान है।

इस अवसर पर सरदार जसवीर सिंह गांधी, डॉक्टर पीसी दुबे, श्री राजेंद्र मेहरा, फादर पायस ,डॉक्टर इशरत अली, डॉक्टर मैथ्यू, श्रमिक नेता श्यामसुंदर यादव ने भी संबोधित कर शफी शेख द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की।

श्री शफी शेख ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि मैंने जो समाज से पाया है, उसका ऋण चुकाने का प्रयास कर रहा हूं। सम्मान के बदले में मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं है।इस अवसर पर शफी शेख को संस्था द्वारा एक नया स्कूटर प्रदान करते हुए उनका पुष्पहारों से अभिनंदन किया गया।

आरंभ में गांधी जी के चित्र पर सूत की माला पहनाकर उन्हें नमन किया गया। दो दिव्यांग बालकों ने इतनी शक्ति हमें देना दाता गाकर वातावरण को भावपूर्ण कर दिया। संस्था के श्री राजेंद्र गोयल द्वारा संस्था का परिचय व गतिविधियों की जानकारी देते हुए श्री शेख को दिये गए सम्मान को रेखांकित किया। इस मौके पर हिंदी परिवार इंदौर के अध्यक्ष हरेराम बाजपेई और सचिव संतोष मोहंती ने भी अभिनंदन किया।

See also  गांधी विचार के प्रकाश स्तंभ थे - पी. गोपीनाथन नायर

कार्यक्रम का संचालन श्री संजय लोखंडे ने किया तथा आभार डॉ. राजेंद्र शर्मा ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में अन्य संस्थाओं में अभ्यास मंडल के शिवाजी मोहिते, अशोक कोठारी, अरविंद पोरवाल, समाज कार्य महाविद्यालय के प्रो. अविनाश मिश्रा, डॉ. सुधा जैन, विंग कमांडर सी तिवारी व अन्य शहर के सुधीजन व संस्थाओं के पदाधिकारी उपस्थित थे।

Table of Contents

अनशन से आगे का संघर्ष: सोनम वांगचुक से उठी एक ऐसी अपील, जिसने लोकतंत्र की आत्मा को छू लिया

लोकतांत्रिक आंदोलनों का इतिहास केवल संघर्षों का इतिहास नहीं है, बल्कि उन नैतिक दुविधाओं का भी इतिहास है, जहाँ एक ओर सिद्धांतों के लिए जीवन दांव पर लगा होता है और दूसरी ओर वही जीवन आंदोलन की सबसे बड़ी पूंजी

Read More »

सोनम वांगचुक :  अनशन नहीं, सत्ता का चरित्र बदला है

सोनम वांगचुक का आमरण अनशन अब केवल शिक्षा सुधार या एक मंत्री की जवाबदेही का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिरोध की प्रभावशीलता की भी परीक्षा बन चुका है। इसी बीच न्यायालय ने उनके जीवन की रक्षा को

Read More »

यात्रा-वृत्तांत : अनोखी है बैतूल की भू-संस्कृति

भारत की विविध भू-संस्कृतियों की खोज में बैतूल एक ऐसा पड़ाव है, जहाँ प्रकृति, लोकजीवन, आस्था और सामुदायिक संस्कृति एक-दूसरे में सहज रूप से घुली-मिली दिखाई देती हैं। यह यात्रा-वृत्तांत एक शोधार्थी की आँखों से बैतूल की सांस्कृतिक और प्राकृतिक

Read More »