न्यूनतम मजदूरी : अकस्मात कम की गई मजदूरी दरें
राम गोपाल पाण्डेय दिन दूनी, रात चौगुनी बढ़ती मंहगाई और नतीजे में जीवन यापन की अकल्पनीय मुश्किलों के बीच अचानक वैधानिक न्यूनतम मजदूरी भी घटा दी जाए तो क्या होगा? एक तो वैसे भी नियोक्ता कम-से-कम मजदूरी देकर पैसा बचाने…
प्रकृति : पीछे रह गए पेड़
कई अध्ययनों में बताया जा रहा है कि 2024 का साल ज्ञात इतिहास का सर्वाधिक गरम साल रहा है। ऐसे में इंसानी वजूद के लिए क्या किया जाना चाहिए? विकास की मौजूदा खाऊ-उडाऊ अवधारणा को फौरन से पेश्तर बदल डालने…
मानसून की मनमर्जी
मानसून आते ही बादल फटना आजकल आम है। भारी मात्रा में कम समय की ये तेज वर्षा बाढ़, भू-स्खलन और बिजली गिरने की वजह बनती है। विडम्बना यह है कि आसमानी पानी के ये करतब इंसानी कारनामों के नतीजे में…
18वीं लोकसभा : संसद के सलीके
पिछले महीने गठित देश की ताजा-तरीन 18वीं लोकसभा क्या सचमुच हमारे लोकतंत्र की संरक्षक हो पाएगी? उसके उद्घाटन-सत्र में ही जिस तरह के कारनामे हुए, क्या वे लोकतंत्र में भरोसा करने वाले नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरे उतरते दिखते हैं?…
सम्पूर्ण पुनर्वास की मांग, सरदार सरोवर परियोजना के प्रभावितों का धरना जारी
सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर का गांव चिखल्दा में अनिश्चितकालीन अनशन का दूसरा दिन भोपाल, 16 जून। मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले सहित कुछ अन्य जिलों में सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित लोगों को अब तक पूरी तरह न्याय नहीं…
संकट में है प्रकृति, प्रकृति के लोग
5 जून : विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष गर्म होती पृथ्वी से व्याकुल जन-जीवन की व्यथा बहुत ही चिंताजनक होती जा रही है। हमारी पीढ़ी के लिए यह एक खतरे की घंटी है। इससे भी अधिक खतरा है हमारी आने…
अब इंदौर को सब मिलकर बनाएं हरियाली का हब
सेवा सुरभि ने हरियाली , हवा और पानी की सलामती के लिए किया विचार मंथन इंदौर 2 जून। किसी समय इंदौर के एक ही क्षेत्र में 9 लाख पेड़ थे, इसलिए नाम पड़ गया नवलखा। पलासिया, लालबाग, पीपली बाजार, इमली …
चुनावी राजनीति : मत विभाजन का रूकना 2024 में महत्वपूर्ण निर्णायक मुद्दा है!
भारतीय चुनाव सीधे-सीधे केवल अंक गणित की तरह नहीं होता है। भारतीय चुनाव में एक पक्षीय चुनाव परिणाम भी आते रहें हैं तो खण्डित जनादेश भी आये हैं। आजादी आन्दोलन के बाद स्वाधीनता मिलने पर शुरुआती दौर में भारतीय राजनीति…
चुनावी राजनीति असंभव संभावनाओं का अनोखा खेल है!
इन्दौर लोकसभा क्षेत्र में नोटा का सवाल 2024 की चुनावी राजनीति में सबसे बड़ा बवाल बन गया है! चुनाव पूर्व किसी भी मतदाता या चुनावी राजनैतिक विश्लेषक या व्याख्याकार के मन के किसी कोने में भी यह सवाल नहीं था…
Nakba Day: फ़िलिस्तीन–इज़राएली युद्ध अमेरिकी वर्चस्व के अंत की शुरूआत है
इंडो-फ़िलिस्तीन सॉलिडेरिटी नेटवर्क” द्वारा नकबा के 76 वें वर्ष पर कार्यक्रम का आयोजन रिपोर्ट : अदनान अली नईदिल्ली । सन् 1948 में फ़िलिस्तीनी ज़मीन पर इज़राएल राज्य की स्थापना के बाद फ़िलिस्तीनियों को उनके घर से बेघर कर दिया गया।…























