Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

Latest post

सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली जवाबदेह हो, स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण बंद हो

‘सभी के लिए स्वास्थ्य आंदोलन’ द्वारा राष्ट्रीय कन्वेंशन का आयोजन दिल्‍ली। 24 अगस्त। देश भर से 13 राज्यों के प्रतिनिधि, विभिन्न नेटवर्क और अन्य नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधि सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और एकजुटता जाहिर करने…

स्वाधीनता याने आत्मा की स्वाधीनता                 

जयप्रकाश नारायण 9 अगस्त को अगस्त क्रांति दिवस स्वाधीनता मेरे लिए कई अर्थ रखती है । पर सबसे अधिक मेरे लिए यह आत्मा की स्वाधीनता का अर्थ रखती है, विचारों की स्वाधीनता का और तब कहीं जाकर कर्म की स्वाधीनता…

सर्वोच्च न्यायालय ने एनजीटी को सिलिकोसिस से ग्रस्त उद्योगों के प्रभाव की निगरानी का दिया जिम्‍मा

सिलिकोसिस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का महत्‍वपूर्ण फैसला दिल्ली, 7 अगस्त 2024। सर्वोच्च न्यायालय में सिलिकोसिस पीड़ितों के हक के लिए चल रही एक जनहित याचिका के सिलसिले में 6 अगस्त 2024 को न्यायालय की युगल पीठ जस्टिस विक्रम नाथ…

सबका सरोकार है जलवायु परिवर्तन

यह सोचना बेहद डरावना है कि आज का पर्यावरण विनाश, जलवायु परिवर्तन हमारी अगली पीढ़ी को बर्बाद कर सकता है। ऐसे में क्या हमें अपने युवाओं, बच्चों को भी इसकी समझ बनाने और उसे समय रहते सही करने की जरूरत…

गंगा के उपासक जीडी अग्रवाल : अविरलता के लिए आत्मोत्सर्ग

गंगा की अविरलता को बरकरार रखने के लिए 111 दिन के अपने उपवास के बाद प्राण त्यागने वाले प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ऐसे बिरले लोगों में हैं जिन्होंने गंगा को जीवित रखने के लिए विज्ञान और आध्यात्म…

गांधीजी से प्रेरित होकर शोभनाजी ने दलितों की मदद के लिए 60 साल समर्पित किये

गांधीवादी, समाजकर्मी शोभना रानाडे का 99 वर्ष में निधन पुणे, 4 अगस्‍त। गांधीवादी विचारों की प्रचारक, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता, दूरदर्शी गांधीवादी, पद्मभूषण श्रीमती शोभना रानडे का 4 अगस्‍त 24 को प्रातः पुणे में निधन हो गया। पूना में जन्‍मीं शोभना…

उत्तराखंड : आपदा की अनदेखी के नतीजे

दिल्ली में नकली केदारनाथ धाम खड़ा करने के मंसूबे बांधने वाले हमारे समाज को ग्यारह साल पहले उत्तराखंड के असली केदारनाथ धाम में हुई भीषण त्रासदी कितनी याद है? क्या तीर्थाटन को मौज-मस्ती के पर्यटन में तब्दील करते लाखों-लाख कथित…

कृषि संंसार : जीवन-दायिनी है, ज़हरमुक्त खेती 

मौजूदा कृषि कितनी जहरीली है और उसकी पैदावार के कितने खतरनाक प्रभाव हो रहे हैं, इसे जानने के लिए किसी रॉकेट साइंस की जरूरत नहीं है। सवाल है, क्या हम अपने आसपास से लगाकर वैश्विक स्तर के अनुभवों से सीखकर…

आईआईटी गांधीनगर शोध : उत्तर भारत में पानी की बर्बादी का चरम

अध्ययन के अनुसार 1947 में कोई एक हजार के करीब नलकूप पूरे देश में थे, जिनकी संख्या अब कई करोड़ हो गई है। सस्ती अथवा मुफ्त बिजली देने से नलकूपों की संख्या में और बढ़ोत्तरी हुई है। पंजाब और मध्यप्रदेश की सरकारों ने…

‘जल जीवन मिशन’ : पानी पिलाने का खोखला दावा

जनहित बताकर रची जाने वाली सरकारी योजनाएं असल में भ्रष्टाचार, लापरवाही और आम हितग्राहियों की बेशर्म अनदेखी के चलते आमतौर पर नकारा साबित होती हैं। हाल का उदाहरण घर-घर पानी पहुंचाने की खातिर बनाए गए ‘जल जीवन मिशन’ का है…