सम्पूर्ण पुनर्वास की मांग, सरदार सरोवर परियोजना के प्रभावितों का धरना जारी

सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर का गांव चिखल्दा में अनिश्चितकालीन अनशन का दूसरा दिन

भोपाल, 16 जून। मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले सहित कुछ अन्य जिलों में सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित लोगों को अब तक पूरी तरह न्याय नहीं मिल पाया है। इस परियोजना के अन्तर्गत जिनकी जमीन और मकान डूब क्षेत्र में आए हैं, उन सभी को अब तक पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला। मुआवजा वितरण में गंभीर गड़बड़ी हुई लेकिन दोषी अफसरों पर प्रभावी कार्यवाही नहीं हो पाई। परियोजना से प्रभावित सभी लोगों का पुनर्वास भी उचित तरीके से नहीं हुआ। उनके बेहतर पुनर्वास के साथ, मुआवजा वितरण में गड़बड़ी के दोषी अफसरों पर सख्त कार्यवाही की मांग लगातार की जा रही है।

इस मामले में जिन आदिवासियों और किसानों के साथ अन्याय हुआ, वे सभी सामाजिक कार्यकर्ता मेघा पाटकर के साथ लगातार धरना, विरोध प्रदर्शन करते हुए शासन तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं। सरकार की ओर इस संबंध में संतोषप्रद जवाब नहीं मिल रहा है। इस कारण धरना प्रदर्शन का सिलसिला चलता ही जा रहा है। प्रदर्शन करने वालों की मांग है कि मुआवजा वितरण, पुनर्वास संबंधी सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए। जब तक समाधान नहीं हो तब तक सरदार सरोवर का जलस्तर 122 मीटर पर रखने की मांग की जा रही है।

अपनी मांग के समर्थन में आज मध्य प्रदेश के धार जिले के गाँव चिखल्दा के खेड़ा मोहल्ले में अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर वहां अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठी हैं। उनके साथ बड़ी संख्या में परियोजना से प्रभावित लोग भी अनशन, विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

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आज अनशन पर  बैठी सीताबाई पति जगदीश की कृषि भूमि सरदार सरोवर परियोजना में वर्ष 2017 से लगातार डूब रही है|  जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के फैसले अनुसार कृषि भूमि के बदले 60 लाख रुपए की पात्रता होते हुए भी आज तक लाभ नहीं मिला है| इनके जैसे ही सैकड़ों परिवारों को कृषि भूमि के बदले लाभ मिलना बाकी है |

क्रमिक अनशन पर बैठी गौरी पति जगन ग्राम पिछोड़ी, जिला बड़वानी की निवासी है| उनका गाँव वर्ष 2019 से लगातार टापू में तब्दील हो जाता है। पिछले वर्ष सितम्बर 2023 में सरदार सरोवर बांध में जलभराव की वजह से इनका सम्पूर्ण गाँव जलमग्न हो गया था।

इनके गाँव के लिए आदर्श पुनर्वास नीति के अनुसार आज तक प्रशासन द्वारा एक स्थान पर सम्पूर्ण गाँव को पुनर्वासित करने हेतु पुनर्वास स्थल का निर्माण नहीं किया है| डूब से बेघर हुए अपने गाँव के लिए पुनर्वास स्थल की मांग करने के लिए गौरी बहन क्रमिक अनशन पर है|

इसी प्रकार सरस्वती बहन के गाँव सेमल्दा को जो कि धार जिले में स्थित है, उनके गाँव को  प्रशासन के द्वारा भी डब्लू एल में की गई गड़बड़ी बताते हुए डूब से बाहर कर दिया गया था| उनका गाँव पिछले साल सितम्बर में डूब आ गया था|

बी डब्लू एल में हुई गड़बड़ी को सुधारने की मांग को लेकर आज ये क्रमिक अनशन पर बैठे है| इनके साथ भगवान सेप्टा भी क्रमिक अनशन पर बैठे है|

गत दिवस 15 जून 2024 को कुक्षी जिला धार के अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (अतिरिक्त प्रभार)  प्रमोद कुमार गुर्जर, कुक्षी के अनुविभागीय अधिकारी पुलिस एवं थाना प्रभारी अपने अधिकारियों के साथ सत्याग्रह स्थल पर पहुंचे।

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वहाँ प्रभावितों द्वारा अपनी मांगों एवं पुनर्वास के अधिकारों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

इसके साथ ही मांगें पूरी न होने तक सत्याग्रह जारी रखने की बात कही गई| भू अर्जन अधिकारी  प्रमोद गुर्जर ने कहा कि आपके द्वारा रखी गई मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुचाऊँगा|

श्री गुर्जर को सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने बताया कि सरदार सरोवर से प्रभावित कई हजार परिवारों का आज तक सम्पूर्ण पुनर्वास नहीं हुआ है| सैकड़ों प्रभावितों को वर्ष 2019 में जल भराव के बाद उनके घर न होने की आवाज से अपने डूबे हुए घरों से निकाल कर अस्थाई टीनशेडस में रखा गया था। आज तक उन परिवारों का निराकरण कर उन्हें पुनर्वास के लाभ नहीं दिए गए|

बी डब्ल्यू एल (बेक वाटर लेवल) में हुई गड़बड़ी के बारे में बताते हुए उन्होंने कहाँ कि बी डब्ल्यू एल में अवैध रूप से बदलाव कर दिया गया। इसकी वजह से पिछले साल सितम्बर 2023 में हजारों मकान और हजारों एकड़ जमीन जिन्हें डूब से अप्रभावित बताया गया था वे सब जलमग्न हो गए। लोगों को बहुत नुकसान का सामना करना पड़ा |

उन लोगों आज लगभग एक साल पूर्ण होने के बावजूद भी नुकसान की भरपाई नहीं मिली है| इन लोगों को पूर्व में सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित मानकर भूअर्जन किया गया। इन्हें पुनर्वास के लाभ से वंचित रखते हुए इनका पुनर्वास नहीं किया गया|  इन लोगों को डूब में मानते हुए इन्हें पुनर्वास के सभी लाभ दिए जाए |

जब तक यह सभी पुनर्वास के कार्य पूर्ण नहीं होते तब तक सरदार सरोवर बांध का जलस्तर 122 मी. पर रखा जाए |  यह जानकारी परियोजना प्रभावित परिवारों की ओर से बालाराम यादव, गेंदालाल उचवारे, राकेश पाटीदार, राकेश तोमर, श्रीराम भाई,मुकेश भगोरिया, राहुल यादव,हेमेन्द्र मंडलोई, महेंद्र तोमर ने दी।

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सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार सिन्हा ने कहा कि समस्याओं का सम्पूर्ण समाधान जब तक नहीं होगा तब तक विरोध प्रदर्शन चलता रहेगा।

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