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बजट 2026–27 में रेयर अर्थ और भारत की प्रकृति-संस्कृति

केंद्रीय बजट 2026–27 में रेयर अर्थ को रणनीतिक और सुरक्षा ज़रूरतों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है, लेकिन इसके साथ ही देश की पर्वतमालाओं, विशेषकर अरावली, पर नए खनन दबाव की आशंका भी गहराती दिख रही है। पर्यावरणविदों और स्थानीय…

CAG ऑडिट का खुलासा, पाँच साल में स्वास्थ्य बजट के 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च ही नहीं हुए

नई दिल्ली, 02 फरवरी | केंद्रीय बजट 2026 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बढ़े हुए आवंटन के दावों के बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताज़ा ऑडिट रिपोर्ट ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की एक गंभीर और चिंताजनक तस्वीर सामने…

क्या लुप्त हो जाएंगे उज्जैन के पौराणिक सप्तसागर ?

मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित पौराणिक सप्तसागर धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अद्वितीय हैं, लेकिन आज ये गंभीर उपेक्षा और अतिक्रमण का शिकार हैं। अवैध कब्जों और गंदे पानी के कारण इन जलाशयों का अस्तित्व संकट में है। हाल…

बजट 2026-27 : आम आदमी की आकांक्षाओं पर कितना खरा है बजट?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 को सरकार ‘विकसित भारत’ की दिशा में दीर्घकालिक सोच का दस्तावेज़ बता रही है, जबकि विपक्ष ने इसे दिशाहीन करार दिया है। लगातार नौवीं बार बजट पेश कर इतिहास रचने वाली…

फार्मा, निजी क्षेत्र और मेडिकल टूरिज़्म को बढ़ावा, बुनियादी जन-स्वास्थ्य फिर हाशिये पर

बजट 2026 पर जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) की प्रतिक्रिया नई दिल्ली 01 फरवरी। जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था को लगभग पूरी तरह नज़रअंदाज़ करता है,…

वाइन व्यवसाय : ‘अंगूर की बेटी’ की असलियत

प्याज, लहसुन और फूलों समेत सब्जियों के लिए ख्यात नासिक अब वाइन उद्योग को बढ़ावा देने में लगा है, लेकिन क्या यह बाजार के अलावा व्यापक समाज के लिए भी मुनासिब होगा? अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देशों ने यही…

गांधी कर्म के दार्शनिक थे, भाषणों के नहीं : साहित्‍यकार विजय बहादुर सिंह

भोपाल, 30 जनवरी। ‘’महात्मा गांधी केवल विचारक या नेता नहीं थे, बल्कि वे कर्म के दार्शनिक थे। उनका दर्शन बोलने में नहीं, बल्कि करने में प्रकट होता है। गांधी को समझने के लिए उन्हें देवता की तरह पूजने के बजाय…

गांधी विचार आज भी दुनिया की नैतिक पूँजी : चंद्रकांत झटाले

लोक संवाद–विचार मंच द्वारा सामाजिक सदभाव के लिए बलिदान विषय पर व्याख्यान इंदौर, 30 जनवरी। ”दुनिया आज भी भारत को महात्मा गांधी के नाम से जानती है।क्योंकि गांधी किसी व्यक्ति नहीं, बल्कि एक नैतिक दृष्टि हैं। गांधी अहिंसा को कायरता…

गांधीजी ने सत्य, अहिंसा, शुचिता, स्वदेशी और स्वाध्याय के बल पर देश को आजादी दिलाई

शहीद दिवस पर ‘मोहन से महात्मा तक’ कार्यक्रम में भारती दीक्षित ने प्रस्‍तुत की दास्‍तानगोई इंदौर 30 जनवरी। गांधीजी उस महान व्यक्तित्व का नाम था, जिनके पास न सत्ता थी, न पद था, न सिंहासन था, लेकिन हौसले इतने बुलंद…

गांधी पुण्‍य स्‍मरण : कोई अदृश्य ताक़त ही गांधी को मरने से बचा रही है ?

गांधी की हत्या के बाद फाँसी तक के 655 दिनों में नाथूराम गोडसे इस भ्रम में जीता रहा कि उसने गांधी के साथ उनके विचारों को भी हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है। लेकिन इतिहास ने साबित किया कि…