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250 किसान संगठनों ने किये जा रहे राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन तथा कोयला श्रमिकों की 2 से 4 जुलाई की हड़ताल का किया समर्थन

किसानों सम्बन्धी तीनों अध्यादेश ‘‘किसानों की लूट कारपोरेट को छूट’’ प्रदान करने वाला किसानों के खिलाफ लाए गए तीनों अध्यादेश ‘‘किसानों की लूट कारपोरेट को छूट’’ प्रदान करने वाली नीति है। कृषि उपज, व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन व सुविधा अध्यादेश…

सिर्फ़ पचास करोड़ लोगों को ही मुफ़्त का अनाज नहीं चाहिए !

क्या पेट की भूख का थोड़ा बहुत सम्बंध इस बात से नहीं होता होगा कि लोग उसी अनुशासन की अब सविनय अवज्ञा कर रहे हैं जो उनपर बिना पर्याप्त सरकारी तैयारी किए और उन्हें भी करने का मौक़ा दिए बग़ैर…

आपके पास जो है, वह औरों से अच्छा है, अधिक पाने की इच्छा नहीं रखनी चाहिए

किशन पटनायक के किस्से  पत्नी वाणी की जुबानी  डॉ.  सुनीलम  किशन पटनायक भारत के प्रमुख समाजवादी चिन्तक और कर्मी रहे हैं। भारतीय राजनीति में जनांदोलनों की बढ़ती भूमिका को उन्होंने बहुत पहले पहचाना, समझा, उनसे एक रिश्ता बनाया और उन्हें…

‘कोविड-19’ के काम में सरकारी, गैर-सरकारी सुविधाएं

सुरभि अग्रवाल, शोभा शुक्ल, बॉबी रमाकांत व संदीप पाण्डेय कोरोना वायरस से उपजी ‘कोविड-19’ बीमारी ने बेहद छोटे, करीब तीन महीने के अंतराल में कई तरह के गुल खिलाए हैं। सरकारी लापरवाही, अक्षमता और टालू प्रवृत्ति उन कईयों में से…

वैक्सीन के निर्माण में जरूरी है आत्म-निर्भरता

‘कोविड-19’ के इलाज के लिए वैक्‍सीन यानि ‘टीका’ की अहमियत उजागर हुई है, लेकिन क्‍या विशाल पैमाने पर इसका निर्माण आसान होगा? वे कंपनियां जो धंधे की खातिर झूठे आंकडों से बीमारी की गंभीरता स्‍थापित करने से लगाकर खुद बीमारी…

‘उत्तम खेती, मध्यम बान : निकृष्ट चाकरी, भीख निदान’

कोरोना की चपेट में आए लाखों-लाख श्रमिकों की बदहवास गांव-वापसी इशारा कर रही है कि खेती में आज भी काफी संभावनाएं है। क्‍या यह बात हमारे नीति-नियंता, सत्‍ताधारी और नौकरशाह समझ पाएंगे? क्‍या ‘कोरोना-बाद’ का भारत वापस कृषि-प्रधान हो सकेगा?…

कोरोना संकट पर सामान्‍य ज्ञान

कोरोना वायरस ने इन दिनों दुनियाभर में खलबली मचा दी है। अमीर-गरीब, ऊंचा-नीचा, काला-गोरा, गरज कि हर नस्‍ल और फितरत के इंसान को कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया है। इससे कैसे निपटा जाए? यह सभी को बार-बार बताया…

क्या इंदिरा गांधी सचमुच में एक क्रूर तानाशाह थीं ?

आपातकाल लागू करना अगर देश में तानाशाही हुकूमत की शुरुआत थी तो क्या उसकी समाप्ति की घोषणा इंदिरा गांधी की उन प्रजातांत्रिक मूल्यों और परम्पराओं में वापसी नहीं थी जिनकी बुनियाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी ? अब हमें…

स्वयं की मुक्ति का उदघोष

हम राजनीतिक रूप से स्वतंत्र अवश्य हो गए हैं परंतु अभी भी मानसिक तौर पर उपनिवेशवाद की स्थिति से मुक्त नहीं हो पाए हैं। इस बीच कारपोरेटीकरण एवं वैश्वीकरण ने नए तरह के उपनिवेशवाद को हमारे ऊपर लाद दिया है।…