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लता मंगेशकर यानी ख़ुशबू के शिलालेख पर लिखी प्रकृति की कविता

भारत की ‘स्वर कोकिला’ कही जाने वाली लता मंगेशकर अपना 91वां जन्म दिन मना रही है| लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को मराठी बोलने वाले गोमंतक मराठा परिवार में, मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ था। उनके पिता पंडित…

बुरा से बुरा आदमी भी संत बन सकता है- डॉ. एस.एन.सुब्बराव

महात्मा गांधी सेवा आश्रम जौरा की स्वर्ण जयंती समारोह जौरा, मुरैना । बुरा से बुरा आदमी भी संत बन सकता है इसका प्रयोग चम्बल घाटी हुई बागी आत्मसमर्पण की घटना है। यह बात प्रख्यात गांधीवादी और नवजवानों के प्रेरणा स्त्रोत…

आधी आबादी से अब भी दूर है, ‘की-बोर्ड’ और ‘टचस्क्रीन’

आप चाहें, न चाहें, ‘डिजिटल मीडिया’ धीरे-धीरे सभी की बुनियादी जरूरत बनता जा रहा है। लेकिन क्‍या महिलाओं की हमारी आधी आबादी तक भी विज्ञान का यह चमत्‍कार पहुंच पा रहा है? क्‍या वे उतनी ही आसानी से ‘स्‍मार्ट-फोन’ की…

सांत्वनाओं के स्तर पर भी आत्मनिर्भर बना दिए जाने के ‘सफल’ प्रयोग !

लोगों की जिंदगियाँ जैसे शेयर बाज़ार के सूचकांक की शक्ल में बदल गयी हैं। सूचकांक के घटने-बढ़ने से जैसे बाज़ार की माली हालत की लगभग झूठी जानकारी मिलती है, लोगों के मरने-जीने की हक़ीक़त भी असली आँकड़ों की हेरा-फेरी करके…

नई राजनीति के नेता – शंकर गुहा नियोगी

शंकर गुहा नियोगी : 28 सितंबर पुण्‍य स्‍मरण सत्तर के दशक में पहले ‘छत्तीसगढ़ माइन्स श्रमिक संघ’ (सीएमएसएस) और फिर ‘छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा’ (सीएमएम) का गठन करके मजदूरों, किसानों में एक नई राजनीतिक चेतना विकसित करने वाले कॉमरेड शंकर गुहा…

‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ से गायब है, रोजगार-दाता कृषि-क्षेत्र

खेती के जिस व्‍यवसाय में देश की तीन चौथाई आबादी लगी हो उसका हाल में जारी ‘राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति’ में अपेक्षित जिक्र भी न होना विचित्र है। क्‍या भूख, उत्‍पादन और ‘जीडीपी’ जनित अर्थव्‍यवस्‍था को साधे रखने तथा सर्वाधिक रोजगार…

बहुमत की बेरहमी

संसद के दोनों सदनों में इन और इन जैसी अनेक बातों को अनदेखा करके कानून बनवाने में जिस बात की सर्वाधिक अहमियत है, वह है सत्‍तारूढ़ भाजपा को मिला बहुमत। इसी तरह का बहुमत पहले की अनेक सरकारों ने भी…

देश के 49 संस्कृतिकर्मी, पत्रकारों, लेखकों ने लिखा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को पत्र

पद से इस्तीफा देने और सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने की अपील भोपाल, 25 सितंबर। देश भर के 49 संस्कृतिकर्मी, अध्येता, शिक्षाविद, पत्रकार, लेखकों व अन्य विधाओं से जुड़े प्रख्यात लोगों ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को एक पत्र लिखा…

हरिवंश कथा और संसदीय व्यथा

हरिवंश नारायण सिंह के ‘सभापतित्व ‘में राज्यसभा का कुछ ऐसा इतिहास रच गया है कि पत्रकारिता और सत्ता की राजनीति के बीच के घालमेल को लेकर पीछे मुड़कर देखने की ज़रूरत पड़ गई है। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश मार्कण्डेय…

दो घाटियों की गुहार

नर्मदा और गंगा की तरह कश्‍मीर घाटी भी ‘जीवित इकाई’ मान ली गई होती तो वह इनके साथ मिलकर लोक-समाज से क्‍या कहतीं? प्रस्‍तुत है, कश्‍मीर और नर्मदा घाटी को जानने-समझने के बाद उनकी तरफ से लोक-समाज को लिखा गया…