भारतीय उप-महाद्वीप की ज्ञान-परंपराओं में किसी भी जीवधारी की जीवन-मृत्यु पूर्व निर्धारित मानी जाती हैं, लेकिन अब आधुनिक विज्ञान भी इसे मानने लगा है। ताजा शोधों ने उजागर किया है कि प्रकृति में बेजा मानवीय हस्तक्षेप के चलते यह पूर्व-निर्धारित…
सरकार और किसान संगठनों के बीच चल रही तनातनी के बाद अब राजस्थान प्रदेश के किसान संगठनों ने किसान आंदोलन के राष्ट्रीय आव्हान के तहत जयपुर-दिल्ली राजमार्ग से दिल्ली कूच करने का फैसला किया है। अभी तक किसान अलग –…
किसान और सरकार वार्ता के छः दौर पूरे हुए है। सीधी मामूली माँग है। किसान विरोधी जो तीन कानून अलोकतांत्रिक तरीके से बनाये है, उन्हें जल्दी से जल्दी रद्द करो। इस मांग के ऊपर ज्यादा संवाद या वार्ता में समय…
जनवादी कवि मंगेलश डबराल हमेशा हमारे बीच में रहेंगे प्रस्तुति : कुमार सिध्दार्थ 9 दिसंबर । वरिष्ठ कवि-लेखक और पत्रकार मंगलेश डबराल का हमारे बीच न रहना साहित्यिक और पत्रकारिता जगत की बडी क्षति है। मंगलेश डबराल समकालीन हिंदी कवियों…
09.12.20 । जागृत आदिवासी दलित संगठन, बडवानी द्वारा नए कृषि कानूनों और विद्युत संशोधन अधिनियम 2020 के खिलाफ देशभर में हो रहे किसानों के आंदोलन में जुड़ते हुए, बड़वानी जिले के किसान-मज़दूरों के मुद्दों को लेकर पाटी नाका से रैली…
10 दिसंबर : मानवाधिकार दिवस बीते दौर में देश भर में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर भी हमले व मुकदमों में तेज़ी से बढ़त हुई है। छात्रों समेत किसान, मज़दूर व अन्य शोषित वर्ग द्वारा अपने अधिकारों की आवाज़ बुलंद करने पर…
किसान आंदोलन प्रधानमंत्री और उनकी सरकार से अधिक अब विपक्षी दलों की संयुक्त ताक़त और जनता के उस वर्ग के लिए चुनौती बन गया है जो कृषि क़ानूनों की समाप्ति को सत्ता के गलियारों में प्रजातांत्रिक मूल्यों की वापसी के…
खेती किसानी में क्रांतिकारी बदलाव लाने की उम्मीद में दम-खम लगाते करीब 3 दर्जन किसानी संगठन व केन्द्र सरकार दोनो खेती कानूनों को लेकर बुने गए अपने – अपने चक्रव्यूह से किसी तरह बाहर आने के लिए छटपटा रही है।…
किसान और किसानी की इस बदहाली में नीति-निर्माताओं और सत्ताधारियों की उन मान्यताओं ने और रंग चढाया जिनके मुताबिक किसानों की बदहाली कम उत्पादन, बाजारों से दूरी और कृषि-क्षेत्र पर अधिक दबाव के कारण हो रही है। नतीजे में सरकारी…
3 दिसंबर : भोपाल गैस कांड की 36 वीं बरसी दुनियाभर में सर्वाधिक भीषण मानी जाने वाली औद्योगिक त्रासदी को 36 साल हो गए है। इस त्रासदी में मारे गए हजारों निरपराधों, अब तक उसके प्रभावों को भुगत रहे लाखों…