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कारपोरेटीकरण का बजट

दो दिन पहले आए केन्द्र के बजट पर प्रधानमंत्री ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि पिछले सालभर में कई ‘मिनी बजट’ आते रहे हैं और इस बार का बजट इसी श्रंखला का एक और पडाव भर होगा। एक फरवरी…

प्रभुसत्ता और बाहरी दखल : एक फलसफाई जुगाली

यह जरूर है कि अंदरूनी मामलों में दखल न होने के सिद्धांत और मानवाधिकारों की वकालत में कई बार टकराव देखा जाता है। एक तरफ अमेरिका मानवाधिकारों के नाम पर दूसरे देशों में अपने भौतिक दखल को न्यायोचित ठहराता रहा…

बजट के बतंगड

हाल के इस बजट को ही देखें तो अगले वित्त-वर्ष के लिए कृषि क्षेत्र को एक लाख 31,530 करोड रुपयों का आवंटन किया गया है, जो पिछले साल के बजट आवंटन से दस हजार करोड रुपए कम है, लेकिन इस…

लोकतंत्र की सड़क बहुत लम्बी है ; सरकार की कीलें कम पड़ जाएँगी !

किसान ‘कांट्रेक्ट फ़ार्मिंग’ से लड़ रहे हैं और पत्रकार ‘कांट्रेक्ट जर्नलिज़्म’ से। व्यवस्था ने हाथियों पर तो क़ाबू पा लिया है पर वह चींटियों से डर रही है। ये पत्रकार अपना काम उस सोशल मीडिया की मदद से कर रहे…

महात्मा गांधी : संत की छवि में सिनेमाई किरदार

महात्मा गांधी का जीवन उनकी मृत्यु के बाद से ही फिल्मकारों की पसंद का ‘विषय’ रहा है। अनेक ख्यात फिल्मकारों ने गांधी के घटना-प्रधान जीवन पर अपने-अपने लहजे में फिल्में रची हैं। गांधी जैसी महान शख्सियत को किसी भी विशेषण…

किसानों की बेचैनी की वजहें

दिल्ली की सीमाओं पर करीब दो महीने से ठंड, बरसात और तरह-तरह की दुर्घटनाओं को झेलते बैठे किसानों ने एन ‘गणतंत्र दिवस’ पर टैक्टर रैली का आयोजन किया था, लेकिन कुछ विघ्न-संतोषी लोगों के चलते इसमें हिंसा, मारपीट और सम्पत्ति…

साम्प्रदायिक हिंसा के जिम्मेदार लोगों को राज्य का संरक्षण

साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाओं के कारणों की जाँच हेतु स्वतंत्र तथ्यान्वेषी दल का निष्‍कर्ष इंदौर, 31 जनवरी 2021 । गत वर्ष दिसम्बर के महीने में इंदौर, उज्जैन, मंदसौर और अलीराजपुर जिलों में हुई साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाओं के कारणों की…

अब भी बचाई जा सकती है – धरती

हर साल बाढ, सूखा, आंधी, गर्मी, बर्फवारी और तूफानों जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बढने का एक मतलब यह भी है कि हमने एक वैश्विक समाज की हैसियत से धरती पर रहना अब तक नहीं सीखा है। एक तरफ, हमारे कार्य-कलाप…

जरूरी हो गया है, गैर-बराबरी के ‘वायरस’ का वेक्सीन

स्विट्जरलेंड के दावोस शहर में हर साल जनवरी में दुनियाभर के अमीरों का एक जमावडा ‘वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम’ हुआ करता है जिसके ठीक पहले वैश्विक एनजीओ ‘ऑक्सफैम’ दुनियाभर की गरीबी और गैर-बराबरी का लेखा-जोखा सार्वजनिक करता है। ‘ऑक्सफैम’ की रिपोर्ट…

क्या ट्रम्प के हार जाने से हम वाक़ई परेशान हैं ?

बाइडन के व्हाइट हाउस में प्रवेश को लेकर भारत का सत्ता प्रतिष्ठान अंतरराष्ट्रीय राजनीति की ज़रूरतों के मान से कुछ ज़्यादा ही चौकन्ना हो गया लगता है। ’अबकी बार, ट्रम्प सरकार ’ के दूध से जली नई दिल्ली की कूटनीति…