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पीपी सर से ख्‍यात मीडिया विशेषज्ञ एवं लेखक पुष्पेन्द्रपाल सिंह नहीं रहे

भोपाल, 7 मार्च। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक, ‘रोज़गार और निर्माण’ अख़बार के संपादक प्रो. पुष्पेन्द्रपाल सिंह (prof. pushpendra pal singh) का आज सुबह हृदयाघात से निधन हो गया। उन्हें रात करीब 12 बजे सीने में दर्द उठा। चिकित्सक बुलाया गया। तुरंत बंसल अस्पताल ले जाया गया लेकिन  अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनका अवसान हो गया। अंतिम संस्कार मंगलवार 12.30 बजे भोपाल के भदभदा घाट पर किया जाएगा। पीपी सर के निधन से पूरा पत्रकारिता जगत सदमे में है। 

प्रो सिंह पब्लिक रिलेशन्स सोसायटी ऑफ इंडिया के मप्र चैप्टर के अध्यक्ष भी थे। वे अपने छात्रों के बीच ‘पी.पी. सर’ के नाम से मशहूर थे। अनगिनत छात्रों को उन्होंने पढ़ाई के अलावा उपयुक्त रोज़गार पाने में बहुत मदद की।

पीपी सर भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवम संचार विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष रह चुके हैं। 2015 में वे मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग में मुख्यमंत्री के ओएसडी नियुक्त हुए। उनके पास मध्य प्रदेश सरकार के सभी प्रकाशन की जिम्मेदारी थी। वे सरकार के रोजगार अखबार रोजगार और निर्माण के संपादक भी थे। पीपी सर का ऑफिस भोपाल के मध्य प्रदेश माध्यम में था। उनके ऑफिस में हमेशा लोगों का रेला लगा रहता था। इसमें सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि देश दुनिया के वरिष्ठ पत्रकार-संपादक, फिल्म सेलिब्रिटी, एनजीओ से जुड़े लोग, हकों की आवाज उठाने वाले लोग भी शामिल होते थे।

उदार और हंसमुख स्वभाव के स्वामी प्रो सिंह का साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से गहरा लगाव था। उनके पढ़ाए हुए छात्र आज देश दुनिया के सभी प्रमुख पत्रकारिता संस्थानों में अहम पदों पर हैं। कई ने प्रशासकीय सेवा भी ज्वाइन की हुई है।

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वरिष्‍ठ पत्रकार ब्रजेश राजपूत ने कहा कि पुष्पेन्द्र भाई का जाना भोपाल के पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है । बेहद जिंदादिल इन्सान का इस तरह महफिल छोड जाना अखरता है भोपाल की वो सबसे चर्चित व्यक्ति थे और सागर विश्वविद्यालय दिनों के हमारे करीबी साथी थे।

सतीश एलिया ने अपनी श्रद्धांजलि अपर्ति करते हुए कहा कि पुष्पेन्द्र जी 1996 में  पहली मुलाकात में ही मित्र बन गए थे। बाद में मेरा विवाह उनके पत्रकारिता गुरू भुवनभूषण देवलिया जी की पुत्री से हुआ तो वे बाराती से ज्यादा घराती थे। बीते 27 में वे हर हाल में साथ रहे और मैं उनके साथ रहा। रविवार को ही वे अपने गुरुजी की स्मृति में आयोजित समारोह में पूरे वक्त रहे, हमने साथ भोजन किया। और आज सुबह वज्रपात सी खबर। पुष्पेन्द्र जी का यूँ जाना अत्यंत दुखद  है, मेरी व्यक्तिगत क्षति है।

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