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चूहों के काटने से नवजातों की मौत : जन स्वास्थ्य अभियान मध्य प्रदेश की शिकायत पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कलेक्टर को भेजा नोटिस

चूहों के काटने से नवजातों की मौत : जन स्वास्थ्य अभियान मध्य प्रदेश की शिकायत पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कलेक्टर को भेजा नोटिस

इंदौर, 4 सितंबर। जन स्वास्थ्य अभियान (जेएसए), मध्य प्रदेश द्वारा दर्ज की गई शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने इंदौर जिला कलेक्टर को नोटिस जारी किया है। आयोग ने 4 सितंबर को जारी इस...

इंदौर, 4 सितंबर। जन स्वास्थ्य अभियान (जेएसए), मध्य प्रदेश द्वारा दर्ज की गई शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने इंदौर जिला कलेक्टर को नोटिस जारी किया है। आयोग ने 4 सितंबर को जारी इस नोटिस में स्पष्ट किया है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और तीन दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

यह मामला 3 सितंबर 2025 को दर्ज शिकायत से जुड़ा है। जेएसए, मध्य प्रदेश ने अपनी शिकायत में बताया था कि इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवायएच) की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में चूहों के काटने से दो नवजात शिशुओं की दर्दनाक मृत्यु हो गई। इस घटना ने न केवल अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि बाल अधिकारों और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

जेएसए इंडिया के समन्वयक अमूल्य निधि ने जानकारी दी कि आयोग ने इस घटना को गंभीर मानते हुए सीपीसीआर अधिनियम, 2005 की धारा 13 के तहत नोटिस (फाइल संख्या: एमपी-86040/2025-26/Comp/Health/EBN) जारी किया है। इसके साथ ही आयोग ने नोटिस की प्रति जेएसए, मध्य प्रदेश को भी भेजी है ताकि संगठन को भी इस प्रक्रिया की जानकारी रहे।

जेएसए मध्य प्रदेश से जुड़े वसीम इकबाल और सुधा तिवारी ने कहा कि एनसीपीसीआर का यह कदम इस बात का प्रमाण है कि अस्पताल में हुई यह दुखद घटना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि बाल अधिकारों, संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल और अस्पताल सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र टीम द्वारा की जानी चाहिए और सबसे पहले यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि वर्तमान में एनआईसीयू में भर्ती सभी बच्चों की सुरक्षा की गारंटी दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच निष्पक्ष और तथ्यपरक हो तथा एमवायएच प्रबंधन की घोर लापरवाही की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही, प्रदेश के सभी नवजात और बाल चिकित्सा वार्डों में संक्रमण-नियंत्रण और कीट-नियंत्रण की स्थिति का व्यापक ऑडिट कराया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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जेएसए मध्य प्रदेश के डॉ. जी. डी. वर्मा और राहुल यादव ने आयोग के इस हस्तक्षेप का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम न केवल इस विशेष घटना में न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में अहम है, बल्कि यह पूरे राज्य के लिए एक चेतावनी भी है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार को इस त्रासदी को एक सबक के रूप में लेना चाहिए और इसे अवसर बनाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना चाहिए, ताकि बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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