आज पूरा देश आर्थिक दबाव से जूझ रहा है। सरकार खुद सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की संपत्ति पट्टे पर दे रही है या बेच रही है। केवल 1 प्रतिशत सबसे अमीर लोग ऐसे हैं जो इस सब से बिल्कुल अप्रभावित है। उनकी संपत्ति पर आखिर टैक्स क्यों न लगाया जाए? देश के अति दौलतमंदों पर सिर्फ 2 प्रतिशत वार्षिक कर। पेश है सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी टीम व्दारा तैयार ‘हमारा पैसा हमारा हिसाब‘ का नया एपिसोड।

अनशन से आगे का संघर्ष: सोनम वांगचुक से उठी एक ऐसी अपील, जिसने लोकतंत्र की आत्मा को छू लिया
लोकतांत्रिक आंदोलनों का इतिहास केवल संघर्षों का इतिहास नहीं है, बल्कि उन नैतिक दुविधाओं का भी इतिहास है, जहाँ एक ओर सिद्धांतों के लिए जीवन दांव पर लगा होता है और दूसरी ओर वही जीवन आंदोलन की सबसे बड़ी पूंजी

