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हंसाने वाली गैस अब दूर कर सकेगी अवसाद

हंसाने वाली गैस अब दूर कर सकेगी अवसाद

शोध में अध्ययनकर्ताओं ने पाया है कि लाफिंग गैस या हंसाने वाली गैस नाइट्रस ऑक्साइड,विशेषतौर पर उपचार-प्रतिरोधी अवसाद वाले लोगों को सुधारने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हाल ही में साइंस ट्रांसलेशनल मैडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक शोधपत्र में...

डॉ. शुभ्रता मिश्रा

शोध में अध्ययनकर्ताओं ने पाया है कि लाफिंग गैस या हंसाने वाली गैस नाइट्रस ऑक्साइड,विशेषतौर पर उपचार-प्रतिरोधी अवसाद वाले लोगों को सुधारने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

हाल ही में साइंस ट्रांसलेशनल मैडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक शोधपत्र में हंसाने वाली गैस से अवसाद ग्रस्त लोगों को उपचारित करने की बात सामने आई है। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के शोधकर्ता पिछले एक दशक से एंटीडिप्रेसेंट के रूप में नाइट्रस ऑक्साइड की क्षमता का अध्ययन कर रहे हैं। इसी श्रृंखला में किए गए अपने एक शोध में अध्ययनकर्ताओं ने पाया है कि लाफिंग गैस या हंसाने वाली गैस नाइट्रस ऑक्साइड,विशेषतौर पर उपचार-प्रतिरोधी अवसाद वाले लोगों को सुधारने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

कई बार यह देखा जाता है कि अवसाद रोगियों में एंटीडिप्रेसेंट दवाओं की पर्याप्त मात्रा और दो या अधिक उपचार देने के बाद भी अपेक्षित सुधार नहीं होते हैं। ऐसे अवसाद ग्रस्त लोग एंटीडिप्रेसेंट दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं, मनोचिकित्सक इस विकार को “उपचार-प्रतिरोधी अवसाद” की संज्ञा देते हैं। इस स्थिति में ही ऐसे में उपचार के लिए एक अलग दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, क्योंकि उपचार-प्रतिरोधी अवसाद का उपचार प्रायः जटिल हो जाता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि ऐसे उपचार-प्रतिरोधी अवसाद रोगियों की सहायता के लिए उपचार ढूंढना बहुत आवश्यक था। उन्होंने अपने अध्ययनों में यह पाया कि नाइट्रस ऑक्साइड के उपचार के बाद अवसाद के लक्षणों में तेजी से सुधार होता है, साथ ही उनके लाभ कई हफ्तों तक प्रभावी बने रह सकते हैं।इस तरह नाइट्रस ऑक्साइड गैस वास्तव में गंभीर अवसाद उपचार-प्रतिरोधी लोगों के उपचार में सहायक हो सकती है।

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शोधकर्ताओं ने कुल 24 उपचार प्रतिरोधी अवसाद रोगियों पर एक महीने तक अध्ययन करते हुए उनको तीन तरह से उपचार दिए। एक प्रकार के उपचार में रोगियों ने एक घंटे तक नाइट्रस ऑक्साइड औरऑक्सीजन के आधे-आधेमिश्रण में सांस ली। दूसरे उपचार में उन्हीं रोगियों ने 25 % नाइट्रस ऑक्साइड में सांस ली। जबकि तीसरे उपचार में रोगियों कोप्लेसीबो, जिसमें बिना नाइट्रस ऑक्साइड के केवल ऑक्सीजन में ही सांस लेना शामिल था। ज्ञातव्य है कि प्लेसिबो एक ऐसी उपचार पद्धति होती है जिसमें रोगी को कोई दवा नहीं दी जाती है, बल्कि उनको बिना दवा वाले गोली और कैप्सूल देकर इस भ्रम में रखा जाता है कि उनको उपचार के लिए दवा दी गई है।

इस अध्ययन में प्राथमिक निष्कर्ष यह निकले कि ऑक्सीजन के साथ नाइट्रस ऑक्साइड के दोनों 25 प्रतिशत और 50 प्रतिशत वाले संयोजनों में सांस लेने वाले अध्ययन प्रतिभागियों में से 17 के अवसाद लक्षणों में सुधार हुआ। अध्ययन में 50 प्रतिशत नाइट्रस ऑक्साइड उपचार का अवसादरोधी असर दो सप्ताह बाद तक देखा गया हालांकि उन्हें मतली का अनुभव हुआ। वहीं 25 प्रतिशत नाइट्रस ऑक्साइड उपचार में रोगियों में मतली आने जैसे कोई भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं दिखे। अर्थात् नाइट्रस ऑक्साइड कीकम खुराक अवसाद से राहत पाने के लिए उच्च खुराक जितनी ही प्रभावी पाई गई।

अध्ययन के सभी उपचारों और अनुवर्ती परीक्षाओं को पूरा करने वाले बीस लोगों में से 55 प्रतिशत (20 में से 11) रोगियों ने अपने अवसादग्रस्त लक्षणों के कम से कम आधे में एक महत्वपूर्ण सुधार का अनुभव किया। वहीं एक घंटे के लिए नाइट्रस ऑक्साइड के विभिन्न मिश्रणों में सांस लेने के बाद 40 प्रतिशत (20 में से आठ) रोगीचिकित्सकीय रूप से उदासीनयानी उपचार-प्रतिरोधी नहीं पाए गए। अध्ययन में शामिल लोगों में से कई नेकेटामाइन जैसी कुछ एंटीडिप्रेसेंट दवाएं भी लीं थी, जो उनके अवसाद को दूर करने में विफल रही थीं।

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अध्ययन में पाया गया है कि नाइट्रस ऑक्साइड उपचार प्रभावी होने पर कुछ ही घंटों में अवसाद लक्षणों में सुधार कर देता है। नाइट्रस ऑक्साइड मस्तिष्क कोशिकाओं में विभिन्न रिसेप्टर्स जैसे एनएमडीए ग्लूटामेट रिसेप्टर्स के साथ अंतरक्रिया करता है। साथ ही नाइट्रस ऑक्साइड का एक संभावित लाभ यह है कि चूंकि यह एक अस्थिर गैस है, इसलिए इसके संवेदनाहारी प्रभाव बहुत जल्दी कम हो जाते हैं। सामान्यतौर पर मानक एंटीडिप्रेसेंट दवाएं मस्तिष्क में नॉरपेनेफ्रिन और सेरोटोनिन न्यूरोट्रांसमिटर्स को प्रभावित करती हैं, फिर भी किसी रोगी के लक्षणों को सुधारने में उन्हें सप्ताह के सप्ताह लग सकते हैं। कई साल पहले इन्हीं शोधकर्ताओं ने एक प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट स्टडी में 24 घंटे उपचार अवधि के हिसाब मरीजों का आकलन किया था। इस अध्ययन में उन्होंने दो सप्ताह तक उनका आकलन करना जारी रखा था और अधिकांश रोगियों ने बेहतर अनुभव किया था।

शोधकर्ताओं का मानना है कि नाइट्रस ऑक्साइड और केटामाइन जैसी अन्य मानक एंटीडिप्रेसेंट दवाओं के प्रभावों की तुलना प्लेसीबो से करते हुए एक वृहत बहुकेंद्रीय अध्ययन की आवश्यकता है, इससे निश्चित तौर पर उपचार-प्रतिरोधी अवसाद रोगियों के लिए अतिमहत्वपूर्ण उपचार खोजे जा सकते हैं।  (सप्रेस)


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