Sarvodaya Press Service

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असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा के मुद्दे पर निगरानी का अभाव

व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय अभियान का तीसरा दिन

नागपुर, 03.04.2026। जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (जेएसएआई) द्वारा विश्व स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में 1 से 7 अप्रैल 2026 तक सात दिवसीय राष्ट्रीय अभियान व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के मुद्दों पर व्यापक जनजागरूकता और नीति-स्तरीय हस्तक्षेप की मांग को लेकर आयोजित किया जा रहा है। इसी कड़ी में व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत आज महाराष्ट्र के नागपुर कार्यक्रम आयोजित किए गए ।

जेएसए इंडिया की महाराष्ट्र इकाई और घरेलू मोलकरिन सांघटन द्वारा नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में व्यावसायिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई। जिसमें घरेलू कामगार से लेकर पावर प्लांट, फेक्ट्रियों, खदान मजदूर, गिग वर्कर्स, सिवेज, निर्माण मजदूर,घरेलू कामगार, आदि एक मुद्दों पर विभिन्न प्रतिभागियों ने विस्तार से बात रखी, जिससे यह स्पष्ट एचओटीए एचएआई की इन सभी कार्यस्थलों पर मजदूर कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के साथ ही साथ ही दुर्घटना के भी शिकार हो रहे है।

विदर्भ मोलीकरण संगठन की सचिव रोशनी गंभीर ने कहा कि अमरावती में पावर प्लांट लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रहा है, धूल से मजदूरों के फेफड़े खराब हो रहे है।

वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता विलास भोंगाड़े ने जलवायु परिवर्तन के महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी “खतरनाक और अन्य अपशिष्टों के उत्पादन और प्रबंधन पर राष्ट्रीय इन्वेंट्री (2022-23)” के अनुसार देशभर में 83,682 इकाइयाँ खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करती हैं, जिसमें से महाराष्ट्र में ऐसी 7502 इकाइयाँ हैं, जो कि इस सूची में गुजरात के बाद दूसरे नंबर पर है।

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अभियान के साथी संजय इंगले ने कहा कि महानिदेशक (DGMS) और डायरेक्टोरेट जनरल, फैक्ट्री एडवाइज़ सर्विस एंड लेबर इंस्टीट्यूट्स (DGFASLI) के अनुसार महाराष्ट्र में 5734 मजदूर सिलिकोसिस से प्रभावित है ।

दीपमाला पटेल ने कहा कि कोला खदान से इलाके का पानी प्रदूषित हो रहा है और वही पानी जनता द्वारा उपयोग में लाया जा रहा है।

संघटना की ज्योति गेटकर ने कहा कि खराब गुणवत्ता वाला डिश वाश का उपयोग करने से घरेलू कामगारों के हाथों में संक्रमण कि शिकायत हो रही है।

जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया के अमूल्य निधि कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में 3.19 लाख मजदूर सिलिकोसिस से पीड़ित है। सरकार ने मजदूरों के हित में लागू 52 श्रम कानून और अंतरराज्यीय प्रवास अधिनियम को खत्म करके 4 श्रम संहिता लागू की गई और 8 घंटे के श्रम अवधि को बढ़ाकर 12 घंटे कर दी गई, निगरानी बंद हो गई है, मजदूरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ समझौता किया जा रहा है। अर्जुन सेन गुप्ता की  रिपोर्ट के अनुसार देश में 92% मजदूर असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है। 

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अश्विनी भारद्वाज, प्रीती नाकतोडे, अश्विनी सोमकुवर, भाग्यश्री आगलावे, वनिता शंभरकर आदि महत्वपूर्ण यगोदन दिया हैं।

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