गांधी दर्शन और विचार समाचार

यह आश्रम ही हैं, जो मूल्य चुनौती बनकर सरकार के सामने खड़े है – कुमार प्रशांत

यह आश्रम ही हैं, जो मूल्य चुनौती बनकर सरकार के सामने खड़े है – कुमार प्रशांत

‘सेवाग्राम साबरमती संदेश यात्रा’ पांचवें दिन गुजरात के बारडोली पहुंची गांधीवादियों ने साबरमती आश्रम के स्वरूप में बदलाव की कोशिश के विरोध में महाराष्ट्र के वर्धा में सेवाग्राम आश्रम से गुजरात के साबरमती आश्रम तक ‘सेवाग्राम साबरमती संदेश यात्रा’ आज...

‘सेवाग्राम साबरमती संदेश यात्रा’ पांचवें दिन गुजरात के बारडोली पहुंची

गांधीवादियों ने साबरमती आश्रम के स्वरूप में बदलाव की कोशिश के विरोध में महाराष्ट्र के वर्धा में सेवाग्राम आश्रम से गुजरात के साबरमती आश्रम तक ‘सेवाग्राम साबरमती संदेश यात्रा’ आज पांचवें दिन गुजरात के बारडोली में पहुंची। यहां पर एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें रमा बहन ने यात्रियों का सूतमाला से आत्मीय स्वागत किया।

पर्यावरण विद एवं मेगेसेस अवार्ड से सम्‍मानित राजेन्द्र सिंह ने कहा कि खेती और किसानी का कार्य का संबंध सीधे पानी से है। दुनिया में खेती और औजारों को लेकर गांधी की जो सोच है, उसी को बचाने हम निकलने है। साबरमती का आश्रम हो या हमारी जमीन, जंगल और पानी सब लोगों का है। सरकार इसे बर्बाद करने में लगी हुई है। हम बस सरकार को यह कहने निकले है कि ये गाँधीजी का रास्ता नहीं है इसलिए आप अपना साबरमती आश्रम का प्रोजेक्ट वापस लें।

गांधी शांति प्रतिष्‍ठान के अध्‍यक्ष कुमार प्रशांत ने कहा कि यह जो औजार है जिससे मनुष्य के हाथ में अपनी ताकत आती है, इसके लिए हमेशा ही गाँधीजी ने बहुत स्पष्ट रहे है। उसके विचारों को देखें तो औजार मनुष्य की क्षमता को मदद करने के लिए होनी चाहिए न कि उस पर नियंत्रण करने के लिए, यंत्र ऐसे होने चाहिए कि अगर वे खराब हो जाये तो उनको खुद ही ठीक कर लिया जाए न कि बाहर लेकर जाना पड़े। इसलिए स्वराज का मतलब है कि हमारे यह मॉडल बचे रहे चाहे वो यह हथियार हो या आश्रम। यह आश्रम ही है जो मूल्य चुनौती बनकर सामने खड़े है।

See also  साबरमती आश्रम हमारी आस्था का केंद्र हैं, इसके साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे

सभा के बाद यात्रा स्वराज भवन के लिए रवाना हुई। संचालक योगनी चौहान ने यात्रा का स्वागत किया। स्वागत के पश्‍चात यात्रीगण ने सरदार वल्लभ भाई पटेल के निवास स्थान के दर्शन किये। सरदार वल्लभ भाई व महात्मा गांधी के चित्र पर माल्‍यार्पण किया।

सभा में सर्व सेवा संघ की प्रवक्ता आशा बोथरा ने कहा कि महात्मा गांधी साबरमती से जब निकले तो यह कहते हुए कि अब साबरमती वापस तभी आऊंगा, जब आज़ादी मिल जाएगी, लेकिन वो गुजरात आये। जब सरदार पटेल ने उनको बुलाया और कहा कि आप सेवाग्राम नहीं आएंगे लेकिन यहां तो आ सकते है। तब गांधी स्वराज भवन आये थे। लेकिन गांधी कभी साबरमती नहीं लौट सके। यही इतिहास के पन्ने है, जिसके साथ सरकार खेलना चाहती है। हम सरकार से कहने निकले है कि अपनी बुद्धि से साबरमती को बिगाड़ने की कोशिश न करें। सदबुद्धि का उपयोग करते हुए 1200 करोड़ रुपये कहीं और उपयोग करें, जो गांधी के अंतिम आदमी के लिए हो तो बेहतर होगा।

यात्रा के संयोजक संजय सिंह ने कहा कि आंसू पोछने वाले हाथों को संरक्षण देना चाहिए ना कि मिटाये जाना चाहिए।  गांधी आश्रम गरीबों के आंसू पोछने  के लिए बनाए थे तथा सत्याग्रह प्रारंभ किए थे । आज सरकार आंसू पोछने वाले हाथों को ही मिटाना चाहते हैं, इसलिए हम हर संघर्ष के लिए तैयार है। किसी भी सूरत में हम सरकार को साबरमती आश्रम के स्वरूप को बिगाड़ने नहीं देंगे ।

यात्रा में अशोक भारत, अरविंद कुशवाहा, बिश्‍वजीत रॉय, भूपेश भूषण, के एल सैंडिल्य, अजमत उल्ला खान ने भी अपने  विचार रखे। जिसके बाद यात्रा किम के लिए रवाना हुई। यात्रा में मुख्य मनोज ठाकरे, मानस पटनायक,शिवकांत त्रिपाठी, सोभा बहन, सुरेश सर्वोदयी, सागर दास, दीपाली, मधु, शाहरुब, यशवंत भाई, जगदीश कुमार, विनोद पगार आदि शामिल है। यात्रा 23 अक्‍टूबर की रात को अहमदाबाद पहुंचेगी। 24 अक्‍टूबर को साबरमती आश्रम में सरकार की सदबुद्धि के लिए प्रार्थना कर यात्रा का समापन होगा।

See also  गांधी की हत्या का सिलसिला जारी है !

जुड़ें - हमारे व्हाट्सएप चैनल से

सप्रेस मीडिया - नवीनतम आलेख, रिपोर्ट, समाचार अपडेट सीधे अपने व्हाट्सएप पर प्राप्त करें।

व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें →

निष्पक्ष पत्रकारिता का समर्थन करें

आज के दौर में निष्पक्ष, स्वतंत्र और जन-सरोकार की पत्रकारिता को जीवित रखना बड़ी चुनौती है। विज्ञापनदाताओं और कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त होकर आप तक सही और सटीक खबरें पहुंचाना हमारा मुख्य उद्देश्य है। हमारी स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए आपके आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। आपकी दी हुई छोटी-सी सहयोग राशि हमें सच्ची पत्रकारिता करते रहने का संबल देगी।

सहयोग राशि →

नवीन आलेख