Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

‘किसान को सम्मान दो – किसानी को मान दो’

16 और 27 मई को होगी  234 किसान संगठनों  की देशव्यापी कार्यवाही

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) ने  16 मई को लॉक डाऊन सावधानियों का पालन करते हुए अपने घरों के आंगनों और छतों तथा 27 मई को गांव/ग्राम पंचायत स्तर पर विरोध कार्यवाहियों का आव्हान किया है।  इस  आंदोलन में ग्रामीण समुदाय, किसानों व प्रवासी मजदूरों से जुड़ी मांगों पर पूरे देश में प्रदर्शन किये जाएंगे।  

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के मध्यप्रदेश चैप्टर के संयोजक तथा अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव बादल सरोज ने प्रदेश भर के सभी किसान संगठनों तथा समन्वय समिति के घटक  संगठनों से इन विरोध कार्यवाहियों को सफल बनाने का आव्हान  किया है। 

श्री बादल सरोज ने इस आंदोलन की थीम ‘किसान को सम्मान दो – किसानी को मान दो’  बताते हुए कहा है कि इस पूरी कोरोना विपदा के दौरान किसान देशभक्त कोरोना खाद्यान्न योद्धा के रूप में उभर कर सामने आये हैं। पूरे देश की भूख मिटाने के लिए अनाज, सब्जी, दूध से लेकर तेल, घी तक की जरूरतों की पूर्ति उन्होंने खुद को जोखिम में डालकर की है।  मगर न तो उन्हें फसल के निर्धारित दाम मिले ना ही 20 लाख करोड़ रुपयों की लफ्फाजी में उनका कोई जिक्र तक आया।  बल्कि दुनिया में पेट्रोलियम उत्पादों की सबसे काम कीमत होने के बाद भी भारत में उसकी कीमत बढ़ा दी गयी।  

16 और 27 मई की कार्यवाहियों के जरिये  सभी ग्रामीण परिवारों को लॉक डाऊन के दौरान हुए रोजी-रोटी और आजीविका के नुकसान की भरपाई के लिए प्रति माह 10000 रुपये की आर्थिक सहायता देने,  कृषि कार्यों को मनरेगा से जोड़कर प्रवासी मजदूरों सहित सभी ग्रामीण परिवारों को बिना किसी भेदभाव के काम देने की मांग की है। उन्‍होंने जारी विज्ञप्ति में कहा है कि  रबी फसलों, वनोपजों, सब्जियों, फलों, अंडों और दूध को सरकार द्वारा खरीदने  और  इनकी कीमत स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार सी-2 लागत मूल्य के  डेढ़ गुना हिसाब से देने,  लॉक डाऊन और प्राकृतिक आपदा के कारण खेती-किसानी को हुए नुकसान के लिए प्रति एकड़ 10000 रुपये मुआवजा देने,  किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाकर 18000 रुपये वार्षिक करने आदि मांगें की जायेंगी।  

16 मई को यह विरोध प्रदर्शन सुबह 9 बजे से शुरू होगा और फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपने-अपने घर के आंगन, बालकनी और छत पर खड़े होकर या गांव की गलियों में दूरी के साथ कतारबद्ध होकर, अपनी मांगों की तख्तियां हाथ में लेकर नारेबाजी की जाएगी।  27 मई को यह विरोध प्रदर्शन ग्राम पंचायतों पर होगा और सरपंचों के जरिये प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन दिए जाएंगे।

Table of Contents

अनशन से आगे का संघर्ष: सोनम वांगचुक से उठी एक ऐसी अपील, जिसने लोकतंत्र की आत्मा को छू लिया

लोकतांत्रिक आंदोलनों का इतिहास केवल संघर्षों का इतिहास नहीं है, बल्कि उन नैतिक दुविधाओं का भी इतिहास है, जहाँ एक ओर सिद्धांतों के लिए जीवन दांव पर लगा होता है और दूसरी ओर वही जीवन आंदोलन की सबसे बड़ी पूंजी

Read More »

सोनम वांगचुक :  अनशन नहीं, सत्ता का चरित्र बदला है

सोनम वांगचुक का आमरण अनशन अब केवल शिक्षा सुधार या एक मंत्री की जवाबदेही का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिरोध की प्रभावशीलता की भी परीक्षा बन चुका है। इसी बीच न्यायालय ने उनके जीवन की रक्षा को

Read More »

यात्रा-वृत्तांत : अनोखी है बैतूल की भू-संस्कृति

भारत की विविध भू-संस्कृतियों की खोज में बैतूल एक ऐसा पड़ाव है, जहाँ प्रकृति, लोकजीवन, आस्था और सामुदायिक संस्कृति एक-दूसरे में सहज रूप से घुली-मिली दिखाई देती हैं। यह यात्रा-वृत्तांत एक शोधार्थी की आँखों से बैतूल की सांस्कृतिक और प्राकृतिक

Read More »