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कौसानी : पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का ऐलान – एक महीने में कौसानी की शराब दुकान बंद नहीं हुई तो खुद लगाऊंगा ताला

देशभर से जुटे गांधीवादी और युवा कार्यकर्ता के बीच पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत

कौसानी, उत्तराखंड | 9 जून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कौसानी में शराबबंदी की माँग को अपना समर्थन देते हुए सोमवार को चेतावनी दी कि यदि एक महीने के भीतर शराब की दुकान बंद नहीं की गई, तो वे स्वयं वहाँ पहुँचकर ताला लगाएंगे।

वे आज अनासक्ति आश्रम, कौसानी में देशभर से आए वरिष्ठ गांधीवादी चिंतकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और यूथ फॉर ट्रुथ के युवाओं से मुलाक़ात कर रहे थे। उसी सभा स्थल से उन्होंने जिलाधिकारी अल्मोड़ा को फोन कर कौसानी की शराब दुकान बंद कराने का आग्रह किया और कहा कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे स्वयं शांतिपूर्ण तालाबंदी करेंगे।

श्री रावत ने कहा, “कौसानी एक आध्यात्मिक स्थल है, जहां गांधीजी ने अनासक्ति योग की टीका लिखी। यहाँ शराब की दुकान का चलना इस धरती की गरिमा और गांधीवादी मूल्यों का अपमान है।” उनके इस बयान से आंदोलन को नया बल मिला है।

इससे पहले रविवार को यूथ फॉर ट्रुथ, गांधी चिंतकों, महिलाओं, वरिष्ठजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कौसानी में शराब की दुकान के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने पंत मार्ग से कौसानी तिराहा तक पदयात्रा निकाली । उन्होंने शराबबंदी की माँग को लेकर सरकार और दुकान मालिकों के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शन में शामिल युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठजनों ने चेतावनी दी कि शराब के पक्ष में कोई भी पहल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह वही भूमि है जहाँ गांधीजी ने अनासक्ति योग लिखा, सरला बहन ने अपना जीवन समर्पित किया, और सुमित्रानंदन पंत जैसे महाकवि का जन्म हुआ। यहाँ शराब की दुकानें चलाना इस पवित्र भूमि का अपमान है।

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इस प्रदर्शन में सुदर्शन आयंगर, सिबी के. जोसेफ, अश्विन झाला, हेमंत कुमार शाह, अशोक कुमार शरण, भुवन पाठक, सत्येंद्र कुमार, वरुण मित्रा, वी.के. पंत, राजीव लोचन शाह, विपिन जोशी, गोपाल, सत्यव्रत, विजय शंकर शुक्ल आदि प्रमुख गांधीवादी चिंतक शामिल रहे।

यूथ फॉर ट्रुथ की ओर से विवेक कुमार साव, अखिल तिवारी, लीलू कुमारी, बिपासा रैना, अजय पोद्दार, स्वधा, कमल सिंह, नीरज और लक्ष्मी आश्रम की बहनों ने नेतृत्व किया।

गांधी विचारक रामदत्त त्रिपाठी ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा “सरकार एक तरफ राधा बहन भट्ट को पद्मश्री से सम्मानित करती है और दूसरी तरफ शराब की दुकानें खोलकर उन्हीं मूल्यों को ठेस पहुँचाती है। यह दोहरा रवैया अस्वीकार्य है।”

आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान कुछ असहमत लोगों ने कुतर्क करने की कोशिश की, लेकिन आंदोलन शांतिपूर्ण रहा। प्रतिभागियों ने संयम से अपनी बात रखी और एक स्वर में कहा कि जब तक कौसानी से शराब की दुकानें पूरी तरह समाप्त नहीं हो जातीं, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

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