Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

डरो मत, समाज बदलने के लिए आगे बढ़ो – पद्मश्री राधा भट्ट का युवाओं का आह्वान

कौसानी में Youth for Truth कार्यशाला का शुभारंभ

कौसानी, 8 जून। कौसानी के अनासक्ति आश्रम में गॉंधीजनों के Youth for Truth कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए गांधीवादी विचारक पद्मश्री राधा बहन भट्ट ने युवाओं से आह्वान किया कि वे डर के माहौल में से बाहर आएं और समाज में जो गलत हो रहा है, इसके खिलाफ़ बोलने की हिम्मत जुटाएं।

देश भर से आए करीब 55 युवा एवं प्रबुद्ध नागरिकों को संबोधित करते हुए राधाबहन ने कहा कि देश में मॉब लींचिंग हो रही है, लोग डर रहे हैं, और सत्ता नशीन लोग सत्ता के मद में वह सब कुछ कर रहे हैं, जो उन्हें नहीं करना चाहिए। ऐसे माहौल में अगर हम खड़े नहीं होंगे तो नागरिकों की आज़ादी खतरे में पड़ जाएगी।

उन्‍होंने कहा कि कि आज इतनी गरीबी और बेरोजगारी है, फिर भी कहा जा रहा है कि विकास हो रहा है। और लोग सच नहीं कह पा रहे हैं। ऐसे माहौल में किस प्रकार हम सत्ता का विरोध करें और अपनी राय निर्भय होकर लोगों के सामने रखें, यह हमारे लिए अहम बात होगी।

कार्यशाला में राधाबहन ने विस्तार से बात करते हुए यह भी कहा कि हजारों बच्चे युद्ध में मर रहे हैं तब भी किसी की आवाज़ इस देश में नहीं उठ रही है, यह हमारे लिए शर्म की बात है। धर्म के नाम पर जो बंटवारा आज हो रहा है, वही एक अधर्म है और आज के युवा को यह समझना चाहिए कि भाईचारे में ही देश का उज्ज्वल भविष्य बन सकता है। जरूरत पड़े तो युवकों को इसके लिए बलिदान देना होगा।

See also  गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर ‘पहली तारीख’ में कला और कविता का संगम

कौसानी में शराब की दुकानों के खिलाफ यूथ फॉर ट्रुथ का प्रदर्शन

देशभर से आए यूथ फॉर ट्रुथ के युवा सदस्यों, गांधी चिंतकों, वरिष्ठजनों, महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कौसानी में शराब की दुकान के खिलाफ एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पंत मार्ग से कौसानी तिराहे तक पदयात्रा निकाली और शराब की दुकान के सामने अपना रोष जताया।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कौसानी, जहाँ महात्मा गांधी ने अनासक्ति योग की टीका लिखी, जो सरला बहन की कर्मभूमि रही और छायावाद के महान कवि सुमित्रानंदन पंत की जन्मस्थली है, ऐसी पवित्र भूमि पर शराब की दुकानों का होना अस्वीकार्य है।

उन्होंने शराबबंदी की माँग को लेकर सरकार और दुकान मालिकों के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शन में शामिल युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठजनों ने चेतावनी दी कि शराब के पक्ष में कोई भी पहल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उल्‍लेखनीय है कि पद्मश्री राधा भट्ट एवं अन्य लोगों ने शराब दुकान खोलने का विरोध किया है। इस के खिलाफ राधा भट्ट ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के अलावा फ़ोन पर भी बात की है। कौसानी आश्रम में गांधी जी अक्सर शांति की तलाश में आया करते थे और मौन व्रत रख घंटों प्रकृति की गोद में बिताकर का उसका शांति के साथ आनंद लिया करते थे।

गांधी चिंतक रामदत्त त्रिपाठी ने कहा, “एक तरफ सरकार राधा बहन भट्ट को पद्मश्री जैसे सम्मान से नवाजती है, वहीं दूसरी तरफ शराब की दुकानें खोलकर उनकी भावनाओं और सामाजिक मूल्यों को ठेस पहुंचाती है। यह कौसानी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत पर हमला है।”

See also  मतभेद निपटाने की गांधी की कला

प्रदर्शन में गांधी विद्यापीठ यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. सुदर्शन अयंगर. प्रो० हेमन्त शाह, जमना लाल बजाज रिसर्च इंस्टीट्यूट सेवाग्राम के निदेशक सिबी जोसेफ, प्रो अश्विन झाला , वरिष्ठ पत्रकार राम दत्त त्रिपाठी, सुरेन्द्र आर्य, बनारस से गांधियन एक्टिविस्ट जागृति राही, अशोक कुमार शरण, भुवन पाठक, सत्येंद्र कुमार, वरुण मित्रा,, वी.के. पंत, राजीव लोचन शाह, विपिन जोशी, गोपाल, सत्यव्रत, विजय शंकर शुक्ल जैसे वरिष्ठ गांधीवादी चिंतकों के साथ-साथ यूथ फ़ॉर ट्रुथ के कार्यकर्ता विवेक कुमार साव, अखिल तिवारी, लीलू कुमारी, बिपासा रैना, अजय पोद्दार के साथ-साथ स्वधा, कमल सिंह, नीरज और लक्ष्मी आश्रम की बहनें शामिल रहीं।

Table of Contents

अनशन से आगे का संघर्ष: सोनम वांगचुक से उठी एक ऐसी अपील, जिसने लोकतंत्र की आत्मा को छू लिया

लोकतांत्रिक आंदोलनों का इतिहास केवल संघर्षों का इतिहास नहीं है, बल्कि उन नैतिक दुविधाओं का भी इतिहास है, जहाँ एक ओर सिद्धांतों के लिए जीवन दांव पर लगा होता है और दूसरी ओर वही जीवन आंदोलन की सबसे बड़ी पूंजी

Read More »

सोनम वांगचुक :  अनशन नहीं, सत्ता का चरित्र बदला है

सोनम वांगचुक का आमरण अनशन अब केवल शिक्षा सुधार या एक मंत्री की जवाबदेही का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिरोध की प्रभावशीलता की भी परीक्षा बन चुका है। इसी बीच न्यायालय ने उनके जीवन की रक्षा को

Read More »

यात्रा-वृत्तांत : अनोखी है बैतूल की भू-संस्कृति

भारत की विविध भू-संस्कृतियों की खोज में बैतूल एक ऐसा पड़ाव है, जहाँ प्रकृति, लोकजीवन, आस्था और सामुदायिक संस्कृति एक-दूसरे में सहज रूप से घुली-मिली दिखाई देती हैं। यह यात्रा-वृत्तांत एक शोधार्थी की आँखों से बैतूल की सांस्कृतिक और प्राकृतिक

Read More »