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सांप्रदायिकता का बुखार बरकरार रखने के राजनीतिक-चुनावी खेल को देश अब समझने लगा है: गांधी संगठन

देश को प्रेम से जोड़े रखने के अपने काम में जुटे रहने की अपील

वर्धा । 10 फरवरी । कर्नाटक से उठे बुरका-विवाद पर गांधी संगठनों – गांधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली और राष्ट्रीय युवा संगठन, वर्धा (महाराष्ट्र) ने बयान जारी कर तीखी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की है। संगठनों ने आज जारी बयान में कहा है कि  आग लगाए रखनी हो तो कैसे-कैसे रास्ते निकाले जाते हैं यह देखना हो तो कर्नाटक से उठे बुरका-विवाद को देखा जा सकता है। बात दिल्ली में रास्ते पर नमाज पढ़ने से शुरू हुई थी। अब बुरके तक पहुंची है। इन सबके पीछे नीयत एक ही है: देश में सांप्रदायिकता का बुखार बरकरार रखना ! बीजेपी के इस राजनीतिक-चुनावी खेल को देश अब समझने लगा है और हम देख रहे हैं कि दिन का पांच सौ रुपया लेकर उनका कहा करने वाले नौजवानों के सिवा दूसरे सभी संयम दिखा रहे हैं।

इन गांधी संगठनों ने कहा कि हम याद दिलाना चाहते हैं कि जिस देश में कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर वाणी, उस देश में किसी पर, किसी प्रकार की खान-पान-पहनावे-ओढ़ावे की जबरदस्ती उसकी सांस्कृतिक अस्मिता पर आघात है। हम ऐसे किसी भी आघात का विरोध करते है, निंदा करते है और युवाओं को इससे सावधान करते हैं।

उन्‍होंने कहा कि हम मानते हैं कि धार्मिक-जातीय-सांप्रदायिक आदि प्रतीकों का सार्वजनिक प्रदर्शन भारत जैसे बहुरंगी समाज के लिए अस्वस्थकारी व अशुभ है। हम सबकी सामूहिक कोशिश यह होनी चाहिए कि वाह्य एकरूपता का विकास हो तथा निजी आस्था की चीजें निजी ही रहें। लड़कियों के लिए खास तौर पर यह सावधानी होनी चाहिए कि उन्हें पीछे रखने, दबा-ढका कर रखने की सारी प्रथाएं, फिर वह बुरका हो या घूंघट या ऐसा ही सारा कुछ, वह समाप्त हो। लेकिन हम जानते हैं कि यहां जो हो रहा है उसके पीछे सामाजिकता या समता का कोई नजरिया नहीं है। यह विशुद्ध असामाजिक ताकतों का गठजोड़ है जो चाहता है कि किसी भी कीमत पर, किसी भी तरह ऐसी अशांति फैलाई जाए ताकि चुनाव जीता जा सके।

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गांधी संगठनों ने अपील की कि इसका जवाब दृढ़ निश्चय व अटूट शांति बनाए रख कर ही दिया जा सकता है। न बुरका का जवाब भगवा गमछा है, न जयश्री राम का जवाब अल्ला-हू-अकबर है। उन्‍होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले संस्थान व अदालतों से अपेक्षा की कि वे अपनी संवैधानिक जिम्मेवारी का तत्परता से और निष्पक्षता से निर्वाह करेंगे।

गांधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली और राष्ट्रीय युवा संगठन, वर्धा ( महाराष्ट्र) ने खेद व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि बीजेपी और संघ-परिवार की अक्ल पर पर्दा पड़ा है। वे अपने ही घर में आग लगा कर रोटी सेंकने की वैसी ही मूढ़ता भरी कोशिश कर रहे हैं जैसे कोशिश से हमारा देश विभाजित हुआ था। जो गलत है, उसे हर बार गलत कहने की हिम्मत हम जुटाएं। देश को प्रेम से जोड़े रखने के अपने काम में हम सब तेजी से लगें क्योंकि यह न चुप रहने का समय है, न बैठे रहने का। हम शांति व सद्भाव चाहते हैं तो उसकी कीमत चुकानी ही होगी। 

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