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कोरोना संकटः मध्‍यप्रदेश में कम टेस्टिंग चिंता का विषय

मध्यप्रदेश में अब तक सिर्फ 20 टेस्टिंग लेब

सप्रेस ब्‍यूरो।

स्‍वास्‍थ्‍य मामलों के जानकारों के मुताबिक कम टेस्टिंग के कारण मध्‍य प्रदेश में कोविड-19 के कम मामले सामने आ रहे हैं। जानकार प्रदेश में अन्य राज्‍यों की तुलना में कम टेस्टिंग को लेकर चिंतित हैं। क्‍योंकि मध्य प्रदेश कोराना टेस्ट करने की क्षमता में अन्य राज्यों से बहुत पीछे है। आज की स्थिति में मध्यप्रदेश में सिर्फ 20 टेस्टिंग लेब हैं, जबकि अन्य राज्य, जिनकी तुलनात्मक आबादी मध्यप्रदेश के आसपास है, गुजरात और तमिलनाडु ने प्रयोगशालाओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी की है। वर्तमान में गुजरात में कुल 37 टेस्टिंग लेब्स हैं और तमिलनाडु में 67 टेस्टिंग लेब्स हैं। गौरतलब है कि जब लॉकडाउन-चार को हटाया जायेगा, तब कोराना के बढ़ते केसेस के लिए मध्यप्रदेश टेस्टिंग लेब्स के लक्ष्य के करीब भी नहीं है।

स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में सक्रिय ‘जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियान’ के अमूल्‍य निधि एवं एस आर आजाद ने कहा है कि हमने इस मुद्दे को पहले भी उठाया है और सुझाव दिया था कि मध्यप्रदेश को तुरंत टेस्ट करने में सक्षम सभी सार्वजनिक और निजी मेडिकल कॉलेजों को ICMR की मंजूरी मिलनी चाहिए।

स्‍वास्‍थ्‍य मामलों के जानकार अमूल्‍य निधि एवं एस आर आजाद ने कहा कि प्रदेश में लॉकडाउन को एक सफलता के रूप में घोषित किया जा रहा है, हालांकि मध्यप्रदेश के मामले में, ऐसा बिल्कुल भी नहीं देखने को मिल रहा है। उन्‍होंने कहा कि राज्य सरकार की रणनीति, केसेस की पहचान, उन्हें आइसोलेट करने, उनका टेस्ट और ईलाज करने की थी, जिसकी समीक्षा स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा की जानी चाहिए। पिछले दो हफ्तों में, जब लॉकडाउन -3.0 समाप्त हो रहा था, तब संक्रमण 11 नए जिलों में फैल गया। आज प्रदेश के 52 में से 49 जिले संक्रमित हैं।

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जन स्‍वास्‍थय अभियान के अमूल्‍य निधि ने कहा कि अब तक प्रदेश स्‍तर पर जारी स्‍वास्‍थ्‍य बुलेटिन के आधार पर आंकडों में विसंगतियां देखने को मिल रही है। उन्‍होंने कहा कि शासकीय हेल्थ बुलेटिन में रिपोर्ट किए गए टेस्ट की संख्या एवं वास्तविक टेस्ट्स की संख्या में अंतर हैं। प्रदेश में 17 मई तक कुल टेस्ट्स 103898 किये गए थे। वहीं 18 मई के बुलेटिन में कुल 112168 टेस्ट किए जाने की जानकारी दी गई थी। इसके आधार एक दिन में कुल 8270 नए टेस्ट किए गए थे। लेकिन सरकार ने अपनी रिपोर्ट में केवल 5373 टेस्ट के बारे में ही बताया गया है। जबकि 2897 टेस्ट रिपोर्ट्स के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई हैं ।

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