कांग्रेस का हिंदुत्व प्रेम और मोहब्बत की दुकानें
साल के आख़िर में 230 सीटों वाली विधानसभा के लिए होने वाले चुनावों में प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता के लिए यही तय करना बचा है कि किस पार्टी का हिंदुत्व उसे ज़्यादा उजला दिखाई देता है! कर्नाटक में…
राहुल अगर अमेरिका अभी नहीं जाते तो कब जाते ?
कल्पना करके देखिए कि इतने बड़े देश के इतने व्यापक विपक्ष में जिसमें कि छोटी-बड़ी कोई पचास राजनीतिक पार्टियाँ होंगी राहुल गांधी के अलावा और कौन सा नेता हो सकता है जो विदेशी ज़मीन पर पहुँचकर ‘भारत के विकास में…
प्रजातंत्र की शासन-प्रणाली
दुनियाभर के राजनीतिक विश्लेषक प्रजातांत्रिक शासन प्रणाली की अहमियत और श्रेष्ठता पर कमोबेश एकमत हैं। सभी मानते हैं कि अपनी तमाम कमी-बेसियों के बावजूद प्रजातांत्रिक व्यवस्था किसी भी समाज को बेहतर बनाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। प्रजातांत्रिक शासन प्रणाली…
शराब गोरखधंधा : शराब से सम्पन्न सरकारें
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने ‘एक दिन के डिक्टेटर’ बनने पर जिस शराब को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के मंसूबे बांधे थे, वही शराब सरकारों की राजस्व उगााही का बडा स्रोत बन गई है। शराबबंदी का मुद्दा उभरते ही हर…
क्या यूपी में 2024 की तैयारियाँ प्रारंभ हो गईं हैं ?
यूपी में जो कुछ भी चल रहा है क्या उसे 2024 की तैयारियों के साथ जोड़कर भी देखा जा सकता है ? अगर ऐसा ही है तो आने वाले दिनों में और भी काफ़ी कुछ देखने-समझने की तैयारी रखना चाहिए…
Pension scheme बेमानी हैं, दोनों तरह की पेंशन योजनाएं
पिछले कुछ दिनों से देश भर में पेंशन को लेकर भारी मारामारी मची है। हिमाचलप्रदेश जैसे राज्यों में तो यह मसला चुनाव हराने-जिताने की गारंटी तक हो गया था। क्या है, इसके पीछे की कहानी? और क्या पेंशन की मौजूदा…
Rahul Gandhi राहुल बेघरबार किए जाने वाले हैं ! अब जेल को ही घर बनाएंगे ?
‘मोदी’ सरनेम को लेकर दायर किए गए मानहानि के मुक़दमे के एक रुके हुए फ़ैसले ने चौबीस घंटों के भीतर ही एक सौ चालीस करोड़ लोगों के देश की राजनीति को आगे आने वाले सालों के लिए हिलाकर रख दिया।…
लोकतंत्र की अस्मिता का सवाल : दो तारीखें-1930 और 2023
लगभग सौ साल पहले महात्मा गांधी ने ‘नमक सत्याग्रह’ के दौरान लोकतंत्र की जो उद्घोषणा की थी, आज राहुल गांधी को दी गई सजा और उसके निहितार्थों ने उसकी याद दिला दी है। आखिर राहुल गांधी का दोष क्या है?…
लोकतंत्र : सत्ता का चहेता ‘चुनाव आयोग’
केन्द्र की सत्ता पर काबिज पार्टियों की मनमर्जी से मनचीते चुनाव आयुक्तों की बहाली पर अब सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले से रोक लगने की संभावना है,लेकिन क्या यह मौजूदा राजनीतिक जमातों के चलते संभव होगा? क्या बेलगाम लोकतांत्रिक…
क्या है ‘इलेक्शन बांड’ के खतरे
जगदीप एस. छोकर हाल के वर्षों में चुनाव, खासकर संसद और विधानसभाओं के चुनाव भारी-भरकम पूंजी की दम पर लडे जाने लगे हैं। यह पूंजी ‘इलेक्शन बांड’ की मार्फत राजनीतिक दलों तक पहुंचती है। अलबत्ता, ‘भारतीय स्टेट बैंक’ से बेचे…









