विचार

बाबा साहेब को आज समझने की जरूरत है

डॉ. भीमराव अम्बेडकर केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं, जो समानता, न्याय और मानव गरिमा की अलख जगाते हैं। 14 अप्रैल 1891 को जन्मे अम्बेडकर ने जीवनभर जातिगत भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष किया और संविधान निर्माता बनकर भारत…

डिजिटल मीडिया : अनछुए मसलों को उजागर करने का तंत्र

हाल के कुछ दशकों में संवाद और संप्रेषण पर पूरी तरह छा चुका डिजिटल मीडिया हमारे आमफहम जीवन में कैसे दखल करता है? तेजी से बदलते, नित-नया होते इस अत्याधुनिक कारनामे ने हमें किस तरह लाभ पहुंचाया है? तेजी से बढ़ती…

जन स्वास्थ्य अधिकार की अनदेखी : निजीकरण की ओर भागती नीतियां

7 अप्रैल को जब दुनिया ‘विश्व स्वास्थ्य दिवस’ मना रही है, भारत में यह सवाल और गंभीर हो उठता है – क्या देश के हर नागरिक को समान रूप से गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल पा रही हैं? संविधान…

अमेरिकी टैरिफ : अमेरिका चाहता है भारतीय कृषि बाजार में दखल

अमेरिका के ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ का दबाव बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधा झटका दिया है। कृषि, डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र में विदेशी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार खोलने का…

तकनीक के तनाव : मोबाइल पर जुआ

कुछ साल पहले हमारे जीवन को आसान बनाने की खातिर आए मोबाइल फोन ने अब अपनी तकनीक से कई तरह के संकट खड़े कर दिए हैं। इनमें से एक है, ‘ऑन लाइन गेमिंग’ जिसने बच्चों तक को अपनी चपेट में…

‘घुमंतू और विमुक्त’ महिलाओं की त्रासदी

वन और वन्यप्राणियों से लेकर अपने समय और समाज को हथेली पर बांचने वाली ‘घुमंतू और विमुक्त’ महिलाऐं, अपने घर-परिवारों के साथ अक्सर रास्तों के किनारे अस्थायी बस्तियों में दिखाई दे जाती हैं। सहज, नैसर्गिक जीवन के अभावों से जूझती…

कोशी पीड़ितों तक राहत क्षतिपूर्ति, पुनर्वास व अन्य कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के गैप को दूर किया जाए : जस्टिस अरुण कुमार

कुमार कृष्णन सितंबर 2024 के आखिरी दिनों में नेपाल और बिहार के कई इलाकों में भारी बारिश के बाद कोसी क्षेत्र में दशकों बाद आई विनाशकारी बाढ़ के लोंगों की ज़िन्दगी को तहस नहस कर डाला। इस बार तटबंध और…

कैसे रूक पायेगा राजनीति में बढ़ता अपराधीकरण

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के अनुसार 543 लोकसभा सदस्यों में से 251 (46 प्रतिशत) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। उनमें से 27 को दोषी ठहराया गया है। रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा में चुने जाने वाले आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे उम्मीदवारों की…

हमारे संस्‍कार में जल संरक्षण और जल संवर्धन दोनों आदतें होनी चाहिए

‘सेवा सुरभि’ द्वारा विश्व जल दिवस पर “क्या पानीदार रहेगी हमारी दुनिया” विषय पर परिचर्चा का आयोजन इंदौर, 23 मार्च। पर्यावरण विशेषज्ञ, लेखक और चिंतक पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि जल स्रोतों की कमी के कारण करोड़ों की जन आपूर्ति…

भारतीय अर्थव्यवस्था : किनके लिए अर्थ-व्यवस्था ? 

अखबारों में भले ही ‘तीन ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था’ बताकर हमारे देश को आर्थिक रूप से श्रेष्ठ देशों की पंक्ति में शामिल बताया जाता हो, लेकिन मैदानी हालात खस्ता हैं। इसकी बानगी के लिए इतना जानना ही काफी है कि देश…