विचार

अर्थनीति का नया छलावा : स्वदेशी की ओट में पूँजी का खेल

देश में जीएसटी घटाने की चर्चा “स्वदेशी” के नाम पर हो रही है, पर असल में यह कदम गरीबों पर पड़े कर के बोझ को घटाने की बजाय बड़े पूँजीपतियों को राहत देने जैसा है। स्वदेशी का अर्थ आत्मनिर्भरता, समानता…

सौ साल का ‘आरएसएस’

ठीक एक शताब्दी पहले, 1925 के दशहरे के इन्हीं दिनों में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ की स्थापना हुई थी। उसके कर्ता-धर्ताओं की नजर में गैर-राजनीतिक, सांस्कृतिक संगठन माना जाने वाला यह अ-पंजीकृत जमावडा अपने जन्म से ही विवादास्पद रहा है। क्या…

गांधीजी की आधुनिकता और उनके मापदंड

आम लोगों में महात्मा गांधी को उनके रहन-सहन, खान-पान और भाषा-भूषा के चलते गैर-आधुनिक, पिछडा और पारंपरिक मानने का चलन है, लेकिन क्या वे सचमुच वैसे थे? या आधुनिकता के उनके मापदंड आम लोगों से भिन्न थे, जिनका वे कडाई…

हिंद स्वराज से जलवायु संकट तक : गांधी की चेतावनी और आज की दुनिया

महात्मा गांधी ने हिंद स्वराज में जिस ‘सभ्यता’ को हालात कहा था, वही आज के जलवायु संकट की जड़ बन चुकी है। बापू ने सौ साल पहले चेतावनी दी थी कि अगर दुनिया यूरोप-अमेरिका के उपभोगवादी रास्ते पर चली, तो…

गांधीजी का महात्मा प्रबंधकीय कौशल

प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों को गांधी के आंदोलनों, खासकर उनकी तैयारी के संदर्भ में देखें तो बहुत स्पष्ट रूप से उनका अमल दिखाई देता है। इस लिहाज से गांधी उस प्रबंधन के कारगर गुरु माने जा सकते हैं जिसे अनेक…

गांधी विचार : वैश्विक संकटों का समाधान

महापुरुषों की जयंती अक्सर उनके गुणगान तक सीमित रह जाती है, लेकिन आज की वैश्विक चुनौतियाँ—अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, जलवायु संकट और बढ़ते हिंसक संघर्ष—यह साफ़ करती हैं कि गांधी विचारों की अनदेखी संभव नहीं। उनका दर्शन केवल स्वतंत्रता आंदोलन का…

बुजुर्गों की मुस्कान में ही छिपा है समाज का भविष्य

भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों का सम्मान सदैव सर्वोपरि माना गया है, किंतु आज वृद्धों की उपेक्षा और अत्याचार गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1991 से प्रतिवर्ष 1 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाने की पहल…

80वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत : शांति, विकास और सहयोग की दिशा में विश्व का विमर्श

संयुक्त राष्ट्र की 80वीं महासभा न्यूयॉर्क में ‘बेटर टूगेदर’ के नारे के साथ शुरू हुई, जिसमें शांति, विकास और मानवाधिकारों के लिए वैश्विक एकजुटता पर जोर दिया गया। युवा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने अपने विजन में इसे स्पष्ट किया। महासभा…

अकेलापन और अवसाद : नई सदी की सबसे बड़ी चुनौती

अकेलापन अब सिर्फ़ भावनात्मक अनुभव नहीं रहा, बल्कि यह धूम्रपान और मोटापे जितना घातक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। यह युवाओं में आत्महत्या के जोखिम को कई गुना बढ़ाता है और बुजुर्गों में हृदय रोग व डिमेंशिया का बड़ा कारण…

न्याय, धर्म निरपेक्षता और हमारा समाज

ओडिशा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके और रिटायरमेंट के बाद बतौर वकील सक्रिय न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर ने 7 सितंबर को दिल्ली के ‘इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर’ में एक महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। यहां इसके संपादित अंश दिए गए हैं।) अमन…