जातियों, धर्मों, लिंगों और वर्गों में विभाजित हमारे समाज में क्या दंगे यूं ही, बे-वजह या तात्कालिक वजहों से हो जाते हैं? या फिर कईयों के सतत प्रयासों, कारनामों से इन्हें अंजाम दिया जाता है? क्या आपस की मारामार में…
भरपूर मुनाफे के साथ-साथ देशभर में बवाल काट रही फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ ने हमारे सिनेमा को भी एक खास मुकाम तक पहुंचा दिया है। कल तक, जहां इस तरह की लगभग हरेक फिल्म में, भले ही कहने भर को, किसी…
डर अब ‘द कश्मीर फ़ाइल्स’ देखने को लेकर नहीं बल्कि इस बात पर सोचने से ज़्यादा लग रहा है कि अब अगर विभाजन की ‘वास्तविकता’ पर फ़िल्में बनाईं गईं तो वे कैसी होंगी? क्या विभाजन की त्रासदी पर ( ‘तमस’…
आजकल सरकारों के सालाना बजट में तरह-तरह के प्रयोग होने लगे हैं। हाल में विधानसभा में प्रस्तुत किए गए मध्यप्रदेश के बजट में ‘चाइल्ड बजट’ उसी तरह का एक प्रयोग है। इसे राज्य के अनेक विभागों को आवंटित राशि में…
हर इतिहास के काले व सफेद पन्ने होते हैं, कुछ भूरे व मटमैले भी. वे सब हमारे ही होते हैं. कितनी फाइलें खोलेंगे आप ? दलितों-आदिवासियों पर किए गए बर्बर हमलों की फाइलें खोलेंगे ? आप थक जाएंगे इतनी फाइलें…
मध्यप्रदेश हेरिटेज (पारंपरिक) शराब नीति 2022 में आदिवासियों को महुए की शराब बनाए जाने को अनुमति दी गई है। फिलहाल, महुआ से शराब बनाया जाना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में डिंडोरी और आलीराजपुर में लागू होगा। जहां तक पारम्परिक शराब…
महिलाओं की क्षमताओं और समाज में उनकी हैसियत के बारे में सभी को न सिर्फ याद रखना चाहिए, बल्कि उसे बार-बार गुनना चाहिए, भले ही इस प्रक्रिया में हमें थोडी ऊब ही क्यों न हो। ‘महिला दिवस’ मनाने की जरूरत…
‘पेसा कानून’ के पारित होने की करीब चौथाई सदी बीत जाने के बाद अब जाकर मध्यप्रदेश में उसे लागू करने के लिए नियम बनाए जा रहे हैं। विडंबना यह है कि इन नियमों में अनेक विसंगतियां हैं। मसलन- जिस ग्रामसभा…
आठवीं डॉ. अजय खरे स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन भोपाल। 5 मार्च 2022। इस समय में कोविड महामारी के बाद स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा में बजट कम किया गया है। इस देश का ताना बाना बिखर रहा हैं। घृणा की राजनीति…
बुद्धि के संवर्धन पर हमने इतना जोर दे दिया है कि खुद को बुद्धिजीवी कहने में गर्व महसूस होता है| हम ह्रदयजीवी क्यों नहीं हो सकते? या फिर हम ज़्यादातर समय सिर्फ अपनी नैसर्गिक संवेदनात्मक क्षमता का उपयोग करते हुए,…