कोविड महामारी के बाद स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा बजट में कमी : डॉ. सैयदा हमीद

आठवीं डॉ. अजय खरे स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन

भोपाल। 5 मार्च 2022।  इस समय में कोविड महामारी के बाद स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा में बजट कम किया गया है। इस देश का ताना बाना बिखर रहा हैं। घृणा की राजनीति बढ़ रही हैं । जरूरी है की मुल्क में हम हमारी संस्कृतिक धरोहर को सँजोये व सँवारे।

उक्‍त उदगार मुख्य वक्ता के रूप में योजना आयोग के पूर्व सदस्य, प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और प्रसिद्ध लेखिका पद्मश्री डॉ सैयदा सय्य्दीन हमीद ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सामाजिक ताना बाना विषय पर अपने विचार प्रकट किए। वे यहां गांधी भवन में आठवीं डॉ. अजय खरे स्मृति व्याख्यानमाला में में बोल रही थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता की वरिष्ठ पत्रकार श्री चंद्रकांत नायडु ने की।

इस अवसर पर डॉ. मीरा शिवा को जन स्वास्थ्य सम्मान दिया गया जो चार दशकों से स्वास्थ्य के मुद्दों पर नीतिगत,कानूनी और जमीनी संघर्ष कर रही  हैं।

जन स्वास्थ्य सम्मान की प्रस्तावना अमूल्य निधि ने रखी, इससे पूर्व चार सदस्यीय पैनल ने डॉ मीरा शिवा का चयन किया।

कार्यक्रम में जन आंदोलन के राष्ट्रीय समन्वय और नर्मदा बचाओ आंदोलन के नेत्री मेधा पाटकर ने देश के वर्तमान पारिदृश्‍य  के संदर्भ मे अपनी बात रखी और कहा कि कई कानूनों ने जन विरोधी बदलाव किए गए हैं और यह सिलीसिला जारी हैं । कार्यक्रम की शुरुवात डॉ. अजय खरे को पुष्पांजली अर्पित करने के साथ शुरू हुई। कार्यक्रम के अंत मे आभार मध्यप्रदेश मेडिकल ऑफिसर असोशिएशन के डॉ माधव हसानी ने किया । इस कार्यक्रम मे भोपाल शहर के नागरिकों के साथ ही ऑनलाइन माध्यम से महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरयाणा। उत्तराखंड, राजस्थान के अनेक साथी भी बडी संख्‍या में जुड़े।

See also  स्वास्थ्य 'आपातकाल' के बीच न्यायपालिका का अवकाश कितना न्यायोचित ?

Table of Contents

नीले धुएँ की धरती : ‘ग्रेट स्मोकी माउंटेन्स’

समाज और सरकार चाहे तो पर्यावरण को पुनर्जीवित किया जा सकता है। इसका एक बेहतरीन उदाहरण अमरीका के टेनेसी और नार्थ कैरोलीना राज्यों की सीमाओं से लगा ‘ग्रेट स्मोकी माउंटेन्स’ है। करीब सौ साल पहले कानून बनाकर प्रकृति को उसके

Read More »

पर्यावरण संरक्षण : केवल पौधारोपण नहीं, जीवनशैली में बदलाव भी जरूरी

विश्व पर्यावरण दिवस केवल पौधे लगाने का संदेश नहीं देता, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने का आह्वान करता है। जल संरक्षण, प्लास्टिक का कम उपयोग, प्रदूषण नियंत्रण, जैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपभोग जैसे छोटे-छोटे प्रयास

Read More »

World Environment Day : पर्यावरण संरक्षण पर टिका है भविष्य

पर्यावरण संरक्षण और संतुलन का प्रश्न आज पूरी मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन ने पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित

Read More »