विचार

भंवरलाल और कन्हैयालाल एक ही इंसान के दो नाम हैं !

भंवरलाल और कन्हैयालाल की हत्याओं को सत्ता की राजनीति के लिए धार्मिक उन्माद का शोषण करने की बेलगाम प्रवृत्ति की हिंसक परिणति के रूप में भी देखा जा सकता है। नूपुर शर्मा की टिप्पणियाँ भी हरिद्वार जैसे धार्मिक जमावड़ों और…

युवा : आज्ञाओं के असर में बेरोजगार

आज के दौर में भारत की अधिकांश कामकाजी आबादी युवा है, लेकिन उसे हम उपयुक्त रोजगार मुहैय्या नहीं करवा पा रहे। नतीजे में वह आज्ञाओं, आदेशों की दम पर खडी जमातों का हिस्सा बनकर तरह-तरह की वैध-अवैध गतिविधियों में लग…

क्या उदयपुर से होगा नई समझ का उदय

राजस्थान के उदयपुर में जो हुआ, उसके बारे में कोई लिखे भी तो क्या! इस देश की दुर्दशा कहाँ तक होगी, इसका अंदाजा लगाना ही मुश्किल है| धर्म या किसी विचारधारा के नाम पर होने वाली हिंसा मानव इतिहास में…

नागरिकों का सैन्यकरण या सेना का नागरिकीकरण ?

आम नागरिक कारण जानना चाहता है कि एक तरफ़ तो सरकार अरबों-खरबों के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और अस्त्र-शस्त्र आयात कर सशस्त्र सेनाओं को सीमा पर उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करना चाहती है और दूसरी ओर आने…

Education : ‘अर्ध-अंग्रेज़ी’ से अध्यापन

कस्बाई और ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में भाषा, खासकर मीडियम यानि माध्यम की भाषा का सवाल अक्सर बेचैन करता है। विज्ञान समेत ऊंचे दर्जे की कक्षाओं के अनेक विषय अंग्रेजी में होते हैं, लेकिन उन्हें सीखने-समझने की बच्चों की तैयारी…

‘आर्मेनियाई जनसंहार-ऑटोमन साम्राज्य का कलंक’ : नरसंहार के निहितार्थ

सत्ता और पूंजी की खातिर समाज को आपस में सतत युद्धरत, हिंसक बनाए रखने का नतीजा क्या एक व्यापक नरसंहार नहीं हो सकता? एक ऐसा नरसंहार जिसमें आम लोग अज्ञानतावश बडी शिद्दत से शामिल हो जाते हों? पिछले सौ-डेढ सौ…

मोटे नहीं, पौष्टिक हैं ये अनाज

साठ के दशक में हमारे देश में आई ‘हरित क्रांति’ ने उत्पादन तो कई-कई गुना बढाया, लेकिन हमारे भोजन से पौष्टिकता गायब कर दी। देश भर में भोजन के नाम पर सिर्फ गेहूं और चावल परोसे जाने लगे और कुछ…

अंधाधुंध फायरिंग लक्षण है अमेरिका की सांस्कृतिक रुग्णता का

मानसिक रोग और बंदूक के दुरुपयोग के संबंध को लेकर एक बार फिर से अमेरिका में बहस छिड़ी हुई है| बंदूकों का प्रेमी देश कहता है कि मानसिक बीमारी के कारण ऐसी घटनाएँ होती हैं, न कि सिर्फ बंदूक रखने…

शांति की लक्ष्मण-रेखा का विवेक जगाता गांधी-जनों का आह्वान

शांति सबसे बड़ा मानवीय धर्म है देश भर के वरिष्‍ठ  विशिष्ट गांधीजनों ने चिंता जाहिर की है कि देश में यहां-वहां से लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं जो बताती हैं कि भारतीय समाज के ताने-बाने को कमजोर करने की…

अमन के नाम से नफ़रत बेचने का मीडिया व्यापार !

अख़बारों के पाठकों और राष्ट्रीय (राष्ट्रवादी?) चैनलों की खबरों के प्रति ईमानदारी और विश्वसनीयता के प्रति पाठकों और दर्शकों का भ्रम काफ़ी हद तक टूटकर संदेहों में तब्दील हो चुका है।उनका बचा हुआ भरोसा भी सरकारी इंजीनियरों द्वारा बनवाए जाने…