मोटे नहीं, पौष्टिक हैं ये अनाज
साठ के दशक में हमारे देश में आई ‘हरित क्रांति’ ने उत्पादन तो कई-कई गुना बढाया, लेकिन हमारे भोजन से पौष्टिकता गायब कर दी। देश भर में भोजन के नाम पर सिर्फ गेहूं और चावल परोसे जाने लगे और कुछ…
अंधाधुंध फायरिंग लक्षण है अमेरिका की सांस्कृतिक रुग्णता का
मानसिक रोग और बंदूक के दुरुपयोग के संबंध को लेकर एक बार फिर से अमेरिका में बहस छिड़ी हुई है| बंदूकों का प्रेमी देश कहता है कि मानसिक बीमारी के कारण ऐसी घटनाएँ होती हैं, न कि सिर्फ बंदूक रखने…
शांति की लक्ष्मण-रेखा का विवेक जगाता गांधी-जनों का आह्वान
शांति सबसे बड़ा मानवीय धर्म है देश भर के वरिष्ठ विशिष्ट गांधीजनों ने चिंता जाहिर की है कि देश में यहां-वहां से लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं जो बताती हैं कि भारतीय समाज के ताने-बाने को कमजोर करने की…
अमन के नाम से नफ़रत बेचने का मीडिया व्यापार !
अख़बारों के पाठकों और राष्ट्रीय (राष्ट्रवादी?) चैनलों की खबरों के प्रति ईमानदारी और विश्वसनीयता के प्रति पाठकों और दर्शकों का भ्रम काफ़ी हद तक टूटकर संदेहों में तब्दील हो चुका है।उनका बचा हुआ भरोसा भी सरकारी इंजीनियरों द्वारा बनवाए जाने…
तपती दुनिया में घनी छांह है बुद्ध की देशना
बुद्ध के जीवन का आखिरी वाक्य उनके असाधारण रूप से प्रज्ञाशील होने को पूरी तरह स्थापित कर देता है। आज के समय में जब हर धर्म का अनुयायी सत्य को अपनी जेब में रखने का, उसके अकाट्य होने का दावा…
कृषि : जीवन के लिए जैविक खेती
कुछ तो खाद, दवाओं और कीटनाशकों से लदी-फंदी जहरबुझी पैदावार के घातक असर और कुछ नए धंधे की संभावनाओं के कारण हमारे यहां आजकल जैविक खेती की भारी धूम मची है, लेकिन क्या यह जैविक पैदावार हमारे जीवन में कोई…
नायकों की क़तार में कहां खड़े दिखना चाहते हैं पीएम?
मोदी जब हाल ही में तीन देशों की यात्रा पर गए तो बर्लिन में भारतीय समुदाय के कोई हज़ार-बारह सौ लोगों को अपने उद्बोधन में नेहरू के नाती और देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बारे में उनका…
विचार : समानता के लिए ‘सम्पत्ति-दान’
दुनियाभर में कब्जा जमाए बैठी अश्लील गैर-बराबरी ने हर तरह के आर्थिक विचारों और उनके अमल पर चुनौती खडी कर दी है। चाहे दक्षिणपंथी हों या वामपंथी या फिर मध्यमार्गी, सभी भीषण गैर-बराबरी के सामने इस हद तक नतस्तक हैं…
वाराणसी में ‘परंपरा की खोज’ पर हुई ज्ञान पंचायत
सुनील सहस्त्रबुद्धे वाराणसी के अस्सी घाट पर 1 मई 2022 को वाराणसी ज्ञान पंचायत का आयोजन हुआ. विषय था ‘परंपरा की खोज’. सन्दर्भ रहा नामवर सिंह की पुस्तक ‘दूसरी परंपरा की खोज’ जिसमें उन्होंने हजारी प्रसाद द्विवेदी के लेखन के…
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस – एक मई : मौजूदा दौर में ‘मजदूर दिवस’
पूंजी की अश्लील बढौतरी के इस जमाने में यह बात बड़े जोर-शोर से कही-उछाली जा रही है कि अब मजदूरों समेत समाज के निचले तबकों की हैसियत समाप्त हो गई है। क्या सचमुच ऐसा है? क्या किसी तरह का, कोई…









