हिन्दू परम्पराओं में लगभग सभी देवी-देवता पर्यावरण और उसके संरक्षण से जुडे हैं। इन दिनों श्रावण या सावन का महीना है जिसमें सतत शिव को स्मरण करते रहने का रिवाज है, लेकिन क्या हम कभी उस प्रकृति और पर्यावरण को…
पडौसी श्रीलंका की मौजूदा उठा-पटक में वहां के भगोडे राष्ट्रपति नंदसेना गोटाबाया राजपक्षे को संकट में मिली मदद ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सत्ताएं एक-दूसरे की मददगार होती हैं और वे सब अंतत: जनता की मुखालिफत…
हमारे समय की बदहाली से निपटने में महात्मा गांधी और उनके सिद्धांन्त एक कारगर औजार हो सकते हैं। हिंसा, आपसी वैमनस्य, गला-काट प्रतिस्पर्धा, साम्प्रदायिक कटुता आदि से निपटने और उनके सामने सीधे खडे हो पाने में गांधी के विचार ही…
गांधी को अब उनके घर में घुसकर मारा जा रहा है। अभी तक कोशिशें बाहर से मारने की ही चल रहीं थीं पर वे शायद पूरी तरह सफल नहीं हो पाईं। जनता चुप है और बापू के अधिकांश अनुयायियों ने…
महामारी के टीके द्वारा हमारा लक्ष्य है कि कम से कम 80 प्रतिशत लोगों का टीकाकरण हो जाए ताकि समाज में एक ‘कवच’ बन जाए और महामारी को फैलने का रास्ता ना मिले। यह एक सार्वजनिक ज़रूरत है। इसे मात्र…
हाल के ‘कोविड-19’ ने एक बार फिर उजागर कर दिया है कि हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं बेहद लचर हैं। क्या है, जिसके चलते हम सस्ती, सर्वसुलभ और सेवाभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर नहीं कर पाते? एक कारण है, सरकारी…
पिछले करीब तीन दशकों से भाजपा एक दृढ लक्ष्य के साथ राजनीतिक अखाड़े में अपने आप को मजबूत बनाती चली जा रही है| सही है कि बाकी विपक्ष और कांग्रेस भाजपा की नीतियों के खिलाफ स्वयं को व्यक्त करते रहे…
भू-गर्भीय पानी और जीवाश्म ईंधन के असीमित दोहन ने अब शहरों को धंसने की हालत में ला दिया है। देश-दुनिया के अनेक शहर आज धंसने की कगार पर हैं, लेकिन इसे लेकर कोई खास चिंता नहीं की जा रही। नदी…
सेना में चार साल की भर्ती के लिए प्रस्तावित ‘अग्निपथ’ योजना को लेकर खासतौर पर युवाओं में बवाल मचा है। क्या यह हिंसक प्रतिरोध पिछले सालों के सरकार के व्यवहार का प्रतिफल नहीं है? सरकार इसी योजना को सबसे बातचीत…
क्या अदालत वह सब देख ही नहीं पा रही है जो सारा देश देख रहा है : संवैधानिक संस्थाओं को निकम्मा बनाना, कानूनों पर बुलडोजर चलाना, संसद को जी-हुजूरों की भीड़ में बदलना, मीडिया को खरीद कर कायर बना देना,…