भारत जोड़ो यात्रा : राहुल गांधी सरकार के ख़िलाफ़ जन-आंदोलन खड़ा करेंगे ?
इस बात से संदेह दूर हो जाना चाहिए कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के ज़रिए राहुल ने 137-वर्षीय पुरानी कांग्रेस को अब अपने अस्तित्व के लिए पूरी तरह से अपने ऊपर निर्भर कर दिया है। वे कांग्रेस के नरेन्द्र मोदी बन…
जनजातीय गौरव दिवस और सत्ता प्रतिष्ठान का दोहरा चरित्र
आज सत्ता प्रतिष्ठान बिरसा मुंडा का नाम लेते हैं परन्तु यही सत्ता विकास के नाम पर लाखों आदिवासियों को उनके जल-जंगल-जमीन से बेदखल कर विस्थापित कर दिया है। विस्थापन की त्रासदी ऐसी की शहर के झुग्गी झोपड़ी में रहकर मजदूरी…
क्या मोरबी में भी भोपाल होगा ?
मोरबी की दुर्घटना के बाद भोपाल गैस त्रासदी का हवाला देते हुए चेताया गया था कि लोगों की याददश्त कमज़ोर होती है, वे सब कुछ भूल जाएंगे! मोरबी में पुल टूटने की घटना और गुजरात में मतदान के बीच भी…
नेहरू के नेतृत्व की अहमियत
साढे सात दशक पहले बरसों की गुलामी से आजाद हुए भारत को क्या पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसा प्रधानमंत्री ही चहिए था? उनके करीब 17 साल के कामकाज को देखें तो यह सचाई खुलकर उजागर हो जाती है कि आधुनिक भारत…
कायाकल्प की कवायद : कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो’ यात्रा
ऐसे समय में, जब विपक्ष-मुक्त भारत को अहमियत देने वाले राजनेता केन्द्र और कतिपय राज्यों की सत्ता पर काबिज हैं, प्रतिपक्ष की लोकतांत्रिक मौजूदगी साबित करना कठिन काम है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की…
शिक्षा : किताबें हमारी विरासत
कहा जाता है कि किताबें हमारी विरासत का दस्तावेज होती हैं और इसलिए किताबों को घर-घर में जगह दी जानी चाहिए, किताबें केवल स्कूली न हों और न ही केवल स्कूली बच्चों को पढ़नी चाहिए, अपितु सबको पढ़नी चाहिये क्योंकि…
‘सर्वधर्म ममभाव’ और विनोबा भावे का दृष्टिकोण
डॉ. पुष्पेंद्र दुबे विनोबा जयंती : 11 सितंबर भूदान आंदोलन के प्रणेता संत विनोबा का जन्म 11 सितंबर 1895 को महाराष्ट्र के गागोदा ग्राम में हुआ। उन्होंने दस वर्ष की आयु में ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया और सन् 1916 में…
आधुनिक खेती के खतरे
आंकडे और अध्ययन बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन का सर्वाधिक असर खेती पर पड रहा है। नतीजे में उत्पादन, बीज, मिट्टी, पानी, यहां तक कि भूख, सभी संकट में फंसते जा रहे हैं। क्या इससे पार पाने का कोई तरीका…
आजादी का अमृत महोत्सव : भगवा-भय और तिरंगी यादें
अगस्त 1942 से अगस्त 1947 के बीच का करीब पांच साल का दौर हमारे इतिहास का बेहद अहम हिस्सा रहा है। नौ अगस्त 1942 को ‘भारत छोडो’ आंदोलन से लेकर 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने तक भारत समेत दुनियाभर…
हर घर तिरंगा : तिरंगी कहानी
चीन के माओ-त्से-तुंग कुछ-कुछ अंतराल से अपनी विशाल आबादी को व्यस्त रखने की खातिर कोई-न-कोई मुहीम छेडते रहते थे और जनता उसमें पूरे मनोयोग से लग जाती थी। उनकी यह कारगर शासन-पद्धति थी। हमारे यहां भी कुछ ऐसा ही दौर…









