विचार

कायाकल्प की कवायद : कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो’ यात्रा

ऐसे समय में, जब विपक्ष-मुक्त भारत को अहमियत देने वाले राजनेता केन्द्र और कतिपय राज्यों की सत्ता पर काबिज हैं, प्रतिपक्ष की लोकतांत्रिक मौजूदगी साबित करना कठिन काम है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की…

शिक्षा : किताबें हमारी विरासत

कहा जाता है कि किताबें हमारी विरासत का दस्तावेज होती हैं और इसलिए किताबों को घर-घर में जगह दी जानी चाहिए, किताबें केवल स्कूली न हों और न ही केवल स्कूली बच्चों को पढ़नी चाहिए, अपितु सबको पढ़नी चाहिये क्योंकि…

‘सर्वधर्म ममभाव’ और विनोबा भावे का दृष्टिकोण

डॉ. पुष्पेंद्र दुबे विनोबा जयंती : 11 सितंबर भूदान आंदोलन के प्रणेता संत विनोबा का जन्म 11 सितंबर 1895 को महाराष्ट्र के गागोदा ग्राम में हुआ। उन्होंने दस वर्ष की आयु में ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया और सन् 1916 में…

आधुनिक खेती के खतरे

आंकडे और अध्ययन बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन का सर्वाधिक असर खेती पर पड रहा है। नतीजे में उत्पादन, बीज, मिट्टी, पानी, यहां तक कि भूख, सभी संकट में फंसते जा रहे हैं। क्या इससे पार पाने का कोई तरीका…

आजादी का अमृत महोत्‍सव : भगवा-भय और तिरंगी यादें

अगस्त 1942 से अगस्त 1947 के बीच का करीब पांच साल का दौर हमारे इतिहास का बेहद अहम हिस्सा रहा है। नौ अगस्त 1942 को ‘भारत छोडो’ आंदोलन से लेकर 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने तक भारत समेत दुनियाभर…

हर घर तिरंगा : तिरंगी कहानी

चीन के माओ-त्से-तुंग कुछ-कुछ अंतराल से अपनी विशाल आबादी को व्यस्त रखने की खातिर कोई-न-कोई मुहीम छेडते रहते थे और जनता उसमें पूरे मनोयोग से लग जाती थी। उनकी यह कारगर शासन-पद्धति थी। हमारे यहां भी कुछ ऐसा ही दौर…

पूंजी के निर्माण में वितरण की अहमियत

अकूत पूंजी के सतत निर्माण को विकास मानने वाली मौजूदा अवधारणा में उसके न्यायपूर्ण वितरण और जरूरत-भर खर्च का कोई स्थान नहीं है। एक तरफ ‘दिन दूनी, रात चौगुनी’ बढती पूंजी और दूसरी तरफ, कुछ लोगों के हाथ में उसका…

विकास : प्रगति की पहचान के सूत्र

इंसानी तरक्की को मापने के लिए ‘सकल घरेलू उत्पाद’(जीडीपी) जैसे जिन पैमानों का उपयोग किया जा रहा है, क्या वे सचमुच हमारे विकास को बता पाते हैं? क्या इनसे समाज में मौजूद गैर-बराबरी, अन्याय, हिंसा, शोषण आदि को भी मापा…

आत्महत्या : सजा का प्रावधान न्यायोचित नहीं

जीने के अधिकार में माननीय गरिमा के साथ जीना सम्मिलित है। जब तक व्यक्ति के जीवन का समापन प्राकृतिक रूप से नहीं होता है तब तक यह अधिकार यथावत रहेगा। भारतीय कानून आत्महत्या को अपराध मानता है तथा वह कुछ…

गांधी के सामने फिर से सावरकर

‘गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति’ की मासिक पत्रिका ‘अंतिम जन’ के ‘वीर सावरकर अंक’ ने एक बार फिर गांधी और सावरकर के विरोधाभासों को उजागर कर दिया है। गांधी जिन मूल्यों, विचारों को लेकर जीवनभर चले थे, सावरकर उसके ठीक…