‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ (8 मार्च) पर विशेष बरसों-बरस अपनी मां, बहन, बेटी, बीबी से ‘कुछ नहीं करती हूं’ सुनते और फिर इसी ‘कुछ नहीं’ की बदौलत जिन्दा रहते हम सब क्या इस आधी आबादी को मान देने का कोई तरीका…
अभी कुछ दिन पहले उडीसा के एक निजी संस्थान में नेपाली छात्रा की आत्महत्या और प्रतिकार करने पर सैकडों नेपाली छात्रों को संस्थान से निकाल दिए जाने को लेकर नेपाल में भारी बवाल मचा है। इस दबाव में जांच समिति…
सत्ता पर काबिज होने की ललक ने हमारी राजनीतिक जमातों को साम्प्रदायिक बना डाला है, लेकिन क्या इससे हम एक बेहतर समाज बना पाएंगे? प्रस्तुत है, इसी की पड़ताल करता कुलभूषण उपमन्यु का यह लेख। हम भाजपाई हो सकते हैं…
दुनिया भर के जीवन पर मंडराते जलवायु परिवर्तन और परमाणु हथियारों के खतरों से कैसे निपटा जा सकता है? क्या इसके लिए ‘विश्व-सरकार’ का गठन कारगर हो सकता है? कैसी हो सकती है, ऐसी सरकार? इसी की पड़ताल करता भारत…
इन दिनों प्रयागराज उर्फ इलाहाबाद में गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर हर बारह साल में भरने वाला महाकुंभ का मेला लगा है। ऐसे विशालकाय जमावड़े आपसी मेल-मिलाप, संवाद और सहजीवन की बुनियाद होना चाहिए, उनसे मैत्री की किरण फूटनी…
आज की भीड़ भरी दुनिया में मनुष्यों के मन में अकेलेपन का अहसास दिन दूना रात चौगुना बढ़ रहा है यह एक नयी बात है। भीड़ और अकेलापन दोनों एक-दूसरे से विरोधाभासी शब्द है। आठ अरब मनुष्यों के विचार, व्यक्तित्व…
प्रजातंत्र में निष्पक्ष चिंतन राज्य, सरकार और समाज को सर्वजन-हिताय बनाए रखता है, लेकिन हमारे यहां के मौजूदा पार्टी-प्रधान ढांचे ने पक्षधरता की बेहद कमजोर छवि बनाई है। नतीजे में समूचा तंत्र शिथिल होता जा रहा है। क्या हैं, पक्षधरता…
साढ़े सात दशकों के हमारे संविधान को लेकर इन दिनों भारी उथल-पुथल मची है। एक पक्ष मानता है कि भारत सरीखे बहुलतावादी देश में संविधान ही है जिसने सभी को समानता की बुनियाद पर जोड़कर रखा है। एक और पक्ष…
इस समय विश्व में लगभग 13000 परमाणु हथियार है जो मनुष्यों समेत धरती के अधिकांश जीवों को अनेक बार नष्ट करने के लिए पर्याप्त हैं। सबसे बड़े दुख और आश्चर्य की बात है कि ऐसी खतरनाक स्थितियों की जानकारी बार-बार…
मौजूदा विकास की विडंबना है कि इसमें भीषण भुखमरी और असीमित सम्पन्नता एक साथ फलती-फूलती हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था में पांचवें पायदान पर खड़े हमारे देश में करीब अस्सी फीसदी आबादी सरकारी दया की मार्फत मिलने वाले पांच किलो अनाज पर…