विचार

Eco-friendly Holi : परम्परा और प्रकृति संरक्षण के लिए जरूरी

विविधता और मान्यताएं भारतीय संस्कृति के पर्याय है। होली के दिन हर गली और हर घर रंगों में सराबोर नजर आता है। हर रंग का महत्व होता है। भारत में हर अवसर और पल के लिए एक रंग है। हर…

महिला अधिक‍ार : खुद की अहमियत के लिए भी जरूरी है, संपत्ति का अधिकार

महिलाओं के लिए संपत्ति का अधिकार उन्हें केवल पूंजी या वस्तुओं पर मिलकियत भर नहीं देता, बल्कि उनमें एक आत्मविश्वास भी जगाता है। जाहिर है, हमारा मौजूदा सामाजिक ताना-बाना आत्मविश्वास से लबरेज महिला को मंजूर नहीं कर सकता। नतीजे में…

किशोर प्रेम और पॉक्सो : सुरक्षा या सजा

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल में किशोरों के प्रेम करने के नैसर्गिक अधिकार की तरफदारी करते हुए एक बेहद जरूरी और सामयिक बहस छेड़ दी है। अब एक तरफ बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए 13 साल पहले बनाया…

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस : आजादी की आस में आधी आबादी

तरह-तरह की आधुनिकताओं, विकास और बराबरी के बावजूद आज भी आठ मार्च का ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ प्रासंगिक बना हुआ है और यह साल-दर-साल महिलाओं की हालातों को बयान करता है। आबादी की आधी से अधिक महिलाएं घर, परिवार और बच्चों के…

समाज की जरूरत है, महिला स्वास्थ्य

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ (8 मार्च)  वैसे तो बेहतर स्वास्थ्य समूचे समाज की बुनियादी जरूरत है, लेकिन महिलाओं के लिए इसकी खासी अहमियत है। अव्वल तो वे अपने भीतर जीवन रचती हैं, नतीजे में उनकी शारीरिक बनावट बेहद पेचीदी रहती है। दूसरे, हमारे…

‘राष्ट्रीय कृतज्ञता निधि’ : महिलाओं को मान देने का एक तरीका

‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ (8 मार्च) पर विशेष बरसों-बरस अपनी मां, बहन, बेटी, बीबी से ‘कुछ नहीं करती हूं’ सुनते और फिर इसी ‘कुछ नहीं’ की बदौलत जिन्दा रहते हम सब क्या इस आधी आबादी को मान देने का कोई तरीका…

KIIT भुवनेश्वर : सीखने लायक नेपाल

अभी कुछ दिन पहले उडीसा के एक निजी संस्थान में नेपाली छात्रा की आत्महत्या और प्रतिकार करने पर सैकडों नेपाली छात्रों को संस्थान से निकाल दिए जाने को लेकर नेपाल में भारी बवाल मचा है। इस दबाव में जांच समिति…

बेहतर समाज के लिए साम्प्रदायिक सद्भाव की रक्षा करें

सत्ता पर काबिज होने की ललक ने हमारी राजनीतिक जमातों को साम्प्रदायिक बना डाला है, लेकिन क्या इससे हम एक बेहतर समाज बना पाएंगे? प्रस्तुत है, इसी की पड़ताल करता कुलभूषण उपमन्यु का यह लेख। हम भाजपाई हो सकते हैं…

विचार : विकल्प के लिए विश्व-सरकार

दुनिया भर के जीवन पर मंडराते जलवायु परिवर्तन और परमाणु हथियारों के खतरों से कैसे निपटा जा सकता है? क्या इसके लिए ‘विश्व-सरकार’ का गठन कारगर हो सकता है? कैसी हो सकती है, ऐसी सरकार? इसी की पड़ताल करता भारत…

प्रयागराज : महाकुंभ में मैत्री 

इन दिनों प्रयागराज उर्फ इलाहाबाद में गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर हर बारह साल में भरने वाला महाकुंभ का मेला लगा है। ऐसे विशालकाय जमावड़े आपसी मेल-मिलाप, संवाद और सहजीवन की बुनियाद होना चाहिए, उनसे मैत्री की किरण फूटनी…