जल, जंगल, जमीन

कंपनियों के कब्जे में पीने का पानी

वैश्विक गैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) ऑक्सफैम (ऑक्सफोर्ड कमेटी फॉर फेमिन रिलीफ) द्वारा 21 मार्च 2024 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की सबसे प्रभावशाली खाद्य और कृषि कंपनियों में से केवल एक चौथाई ने ही अपने पानी के उपयोग को कम करने और जल…

लद्दाख : पहाड़ों, नदियों के विनाश के खिलाफ व भविष्य के लिए खड़े होते लोग

पिछले 2 महीनों से 3 लाख आबादी वाले लद्दाख की 10 प्रतिशत आबादी यानि 30 हज़ार से भी ज़्यादा लोग, अपने जल-जंगल-जमीन, पर्यावरण, अपने रोजगार और समाज और अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं! लद्दाख की 90% आबादी आदिवासी…

नदियों और नदी घाटी समाजों के अधिकारों की सुरक्षा को चुनावी एजेंडे में शामिल किया जाये

देश-भर के आंदोलनों ने की मांग देश के अलग अलग भौगोलिक क्षेत्रों के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय के  राष्ट्रीय नदी घाटी मंच द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्र और राज्य सरकारों की विकास संबंधित…

केन- बेतवा लिंक परियोजना : नाहक का नदी जोड़

विकास के नाम पर की जाने वाली विनाश की ताजी जिद का नया कारनामा अब नदी-जोड़ है। मध्‍यप्रदेश में केन- बेतवा लिंक परियोजना का भूमि पूजन फरवरी 2024 में होने जा रहा है। इससे बुंदेलखंड से प्रवाहित केन नदी को…

आर्द्रभूमि से होता है, जलवायु संकट पर नियंत्रण

‘वेटलेंड’ यानि आर्द्रभूमि के नाम से पहचाने जाने वाले अपने आसपास के ताल-तलैया, विशाल जलाशय और तटीय इलाके हजारों हजार जैविक इकाइयों का ठिकाना भर नहीं होते, बल्कि उनके भरोसे आज के सबसे बड़े जलवायु परिवर्तन के संकट से भी…

जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार जीवनशैली

सब जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन की मौजूदा त्रासदी की वजह धरती पर बसे इंसानों की हवस पर आधारित जीवन-पद्धति है, लेकिन कोई इसे रोकना, बदलना नहीं चाहता। वैश्विक स्तर पर भी ठीक यही हालत है और तरह-तरह के जमावडों…

Ujjain : सरकारी धतकरमों में उलझी प्रदूषित क्षिप्रा

अपने समाज और सरकार की बदहाली की एक बानगी उज्जैन की क्षिप्रा नदी में लगातार बनी रहने वाली गंदगी भी है, उस क्षिप्रा की जिसके तट पर हर 12 साल में हिन्दुओं का सबसे बड़ा मेला महाकुंभ लगता है। इसे…

अंतरराष्‍ट्रीय : पनामा में पर्यावरण के लिए प्रतिरोध

मौजूदा विकास की अवधारणा के चलते दुनियाभर में प्रतिरोध हो रहे हैं। हाल में मध्य अमेरिकी देश पनामा Panama में तांबे की खदान के विरोध में आम लोगों ने प्रदर्शन किया और सुप्रीम कोर्ट तथा राष्ट्रपति को अपनी बात समझा…

नागौर : मरुभूमि में तालाब

‘राजस्थान की रजत बूंदें’ सरीखी नायाब किताब लिखने वाले अनुपम मिश्र कहा करते थे कि जिस इलाके में प्रकृति ने पानी देने में थोड़ी कंजूसी की है, वहां समाज ने पानी की एक-एक बूंद को प्रसाद मानकर बेहद सलीके से…

सुरंग में मजदूरों का फंसना कोई अकेली त्रासदी नहीं है

28 नवंबर को करीब 17 दिन से बारामासी सड़क की निर्माणाधीन सुरंग में फंसे 41 मजदूरों का सुरक्षित बाहर निकलना कोई अकेली त्रासदी नहीं है। दुनियाभर के वैज्ञानिकों में ‘बच्चा पहाड़’ माने जाने वाले हिमालय में ऐसी त्रासदियां लगातार होती…