‘जल जीवन मिशन’ : पानी पिलाने का खोखला दावा
जनहित बताकर रची जाने वाली सरकारी योजनाएं असल में भ्रष्टाचार, लापरवाही और आम हितग्राहियों की बेशर्म अनदेखी के चलते आमतौर पर नकारा साबित होती हैं। हाल का उदाहरण घर-घर पानी पहुंचाने की खातिर बनाए गए ‘जल जीवन मिशन’ का है…
प्रकृति : पीछे रह गए पेड़
कई अध्ययनों में बताया जा रहा है कि 2024 का साल ज्ञात इतिहास का सर्वाधिक गरम साल रहा है। ऐसे में इंसानी वजूद के लिए क्या किया जाना चाहिए? विकास की मौजूदा खाऊ-उडाऊ अवधारणा को फौरन से पेश्तर बदल डालने…
मानसून की मनमर्जी
मानसून आते ही बादल फटना आजकल आम है। भारी मात्रा में कम समय की ये तेज वर्षा बाढ़, भू-स्खलन और बिजली गिरने की वजह बनती है। विडम्बना यह है कि आसमानी पानी के ये करतब इंसानी कारनामों के नतीजे में…
अब इंदौर को सब मिलकर बनाएं हरियाली का हब
सेवा सुरभि ने हरियाली , हवा और पानी की सलामती के लिए किया विचार मंथन इंदौर 2 जून। किसी समय इंदौर के एक ही क्षेत्र में 9 लाख पेड़ थे, इसलिए नाम पड़ गया नवलखा। पलासिया, लालबाग, पीपली बाजार, इमली …
कौन देगा साफ हवा-पानी की ग्यारंटी !
मौजूदा आम चुनावों में सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी ओर से नागरिकों को थोक में तरह-तरह की ग्यारंटी दे रहे हैं, लेकिन किसी का ध्यान जीवन की बुनियादी जरूरत, हवा और पानी की ग्यारंटी की तरफ नहीं है। क्या इन दोनों…
कंपनियों के कब्जे में पीने का पानी
वैश्विक गैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) ऑक्सफैम (ऑक्सफोर्ड कमेटी फॉर फेमिन रिलीफ) द्वारा 21 मार्च 2024 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की सबसे प्रभावशाली खाद्य और कृषि कंपनियों में से केवल एक चौथाई ने ही अपने पानी के उपयोग को कम करने और जल…
लद्दाख : पहाड़ों, नदियों के विनाश के खिलाफ व भविष्य के लिए खड़े होते लोग
पिछले 2 महीनों से 3 लाख आबादी वाले लद्दाख की 10 प्रतिशत आबादी यानि 30 हज़ार से भी ज़्यादा लोग, अपने जल-जंगल-जमीन, पर्यावरण, अपने रोजगार और समाज और अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं! लद्दाख की 90% आबादी आदिवासी…
नदियों और नदी घाटी समाजों के अधिकारों की सुरक्षा को चुनावी एजेंडे में शामिल किया जाये
देश-भर के आंदोलनों ने की मांग देश के अलग अलग भौगोलिक क्षेत्रों के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय के राष्ट्रीय नदी घाटी मंच द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्र और राज्य सरकारों की विकास संबंधित…
केन- बेतवा लिंक परियोजना : नाहक का नदी जोड़
विकास के नाम पर की जाने वाली विनाश की ताजी जिद का नया कारनामा अब नदी-जोड़ है। मध्यप्रदेश में केन- बेतवा लिंक परियोजना का भूमि पूजन फरवरी 2024 में होने जा रहा है। इससे बुंदेलखंड से प्रवाहित केन नदी को…
आर्द्रभूमि से होता है, जलवायु संकट पर नियंत्रण
‘वेटलेंड’ यानि आर्द्रभूमि के नाम से पहचाने जाने वाले अपने आसपास के ताल-तलैया, विशाल जलाशय और तटीय इलाके हजारों हजार जैविक इकाइयों का ठिकाना भर नहीं होते, बल्कि उनके भरोसे आज के सबसे बड़े जलवायु परिवर्तन के संकट से भी…









