” जब फिल्म ‘गांधी’ मनीला में प्रदर्शित हुई..”
एक संस्मरण: बयालीस साल पहले हाल ही में 29 अगस्त को “गांधी” फिल्म के निर्देशक एटनबरो की पुण्यतिथि थी। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें याद करते हुए “गांधी” फिल्म की श्रेष्ठता का वर्णन किया है। तानाशाही के विरोध…
देश की पहली संस्था ‘एजुकेट गर्ल्स’ को मिलेगा वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड
लाखों बच्चियों को शिक्षा से जोड़ने वाली संस्था को मिला एशिया का सर्वोच्च सम्मान नई दिल्ली। भारत में शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण कार्य कर रही गैर-सरकारी संस्था ‘एजुकेट गर्ल्स’ (Educate Girls) को वर्ष 2025 का 67वां रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड…
धरती के दिग्गज का संकट : हाथियों की घटती दुनिया
धरती के सबसे बड़े जमीनी जीव हाथी, जो बुद्धिमान और सामाजिक स्वभाव के लिए जाने जाते हैं, आज अस्तित्व के संकट में हैं। आवास विनाश, मानव-हाथी संघर्ष, अवैध शिकार और कैद में दुर्व्यवहार ने उनकी संख्या को तेजी से घटाया…
हिरोशिमा की राख से उठते सवाल
6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराकर मानवता ने विज्ञान के सबसे क्रूर प्रयोग का साक्षी बनाया। यह सिर्फ एक शहर की तबाही नहीं, बल्कि चेतना, करुणा और सहअस्तित्व की अवधारणा पर गहरा घाव था। ‘हिरोशिमा दिवस’ आज…
एक क्लिक में समूची दुनिया से जुड़ने की क्रांति है WWW
1 अगस्त को मनाया जाने वाला ‘वर्ल्ड वाइड वेब दिवस’ उस तकनीकी क्रांति को स्मरण करने का अवसर है, जिसने दुनिया को एक डिजिटल मंच पर जोड़ दिया। टिम बर्नर्स-ली द्वारा विकसित WWW ने ज्ञान, संवाद और सूचना की दुनिया…
युद्धकाल : बूचड़खाने में बदलती दुनिया
महात्मा गांधी कहा करते थे कि यदि ‘आंख के बदले आंख निकाली जाए तो अंत में समूची दुनिया अन्धी हो जाएगी।’ कौन जानता था कि गांधी की विदाई के 77 साल बाद यह बात कहावत से निकलकर कड़वी सच्चाई में…
विनाश को विस्तार देते युद्ध !
आजकल दुनियाभर में जारी युद्धों की अमानवीय क्रूरता, वीभत्स हिंसा और असंख्य मौतों के नतीजे में आखिर क्या मिलता है? दवाओं जैसी अकूत पूंजी कूटते, हथियारों के सौदागरों की कमाई के अलावा इनसे किसी पक्ष को, किसी तरह की कोई…
मूल्यविहीन विदेश नीति : ‘ईमां मुझे रोके है तो खींचे है मुझे कुफ्र’
अपने-अपने राष्ट्रीय हितों को साधते हुए दुनियाभर में अमन-चैन बरकरार रखने की खातिर बनाई और अमल में लाई जाने वाली विदेश नीतियों के दिन, लगता है, लद गए हैं। आजकल सभी देश अपने-अपने निजी और अक्सर व्यक्तिगत पूंजी के स्वार्थों…
जलवायु कार्यकर्ताओं की बढ़ती गिरफ़्तारियाँ और लोकतांत्रिक संकट
क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना अपराध है? लंदन। हाल ही में प्रकाशित पत्रिका द इकोलाजिस्ट एवं ग्रीनपीस की एक संयुक्त रिपोर्ट ने ब्रिटेन में जलवायु और सामाजिक कार्यकर्ताओं के विरुद्ध हो रही गिरफ़्तारियों और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए…
गांधीजी की दृष्टि और पश्चिम एशिया का संकट
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जब अमीर ‘मित्र-राष्ट्र’ दुनिया का हिस्सा-बांटा कर रहे थे, भारत में महात्मा गांधी शांतिपूर्ण, अहिंसक और दोस्ताना दुनिया के भविष्य की जुगत बिठा रहे थे। क्या 80-85 साल पहले दुनिया के सत्ताधारियों, खासकर पश्चिम एशिया के…









