वैश्विक समझौतों की बिसात पर छोटे पशुपालक
भारत सरीखे कृषि प्रधान देश में वैश्विक व्यापार समझौतों का सीधा असर कृषि और किसानों पर होता है। वैसे भी हमारे यहां कृषि और पशुपालन, प्राथमिक रूप से व्यापार की बजाए पेट भरने की तकनीक मानी जाती है और ऐसे…
केंद्र सरकार से किसानों का विश्वास टूटा, व्यापार समझौते और नए विधेयक किसान विरोधी — भाकियू
नई दिल्ली, 11 फ़रवरी। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने भारत सरकार द्वारा अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ किए गए हालिया व्यापार समझौतों और कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रस्तावित विधेयकों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि इन कदमों…
खेती को खतरे में धकेलते व्यापार समझौते और कानून
पिछले कुछ हफ्तों में भारत ने ‘यूरोपियन संघ’ और अमरीका के साथ दो अलग-अलग व्यापार समझौते किए हैं। इन दोनों समझौतों में ‘यूरोपियन संघ’ के 27 देशों और अमरीका के भारी-भरकम सब्सीडी वाले कृषि उत्पादों को भारत में खपाने की…
‘अमीरों की सत्ता का प्रतिरोध’ : ‘डब्ल्यूईएफ’ में जारी ‘ऑक्सफैम’ की रिपोर्ट
दुनियाभर के दिमागों को दुरुस्त करने वाली ‘ऑक्सफैम’ की रिपोर्ट फिर हाजिर है। 19 से 23 जनवरी के बीच हो रहे ‘वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम’ के पहले दिन चेतावनी-स्वरूप जारी की गई इस रिपोर्ट ने दुनियाभर के आर्थिक विकास की पोलपट्टी…
वंचितों से और भी दूर हुआ जलवायु न्याय
पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के दुख दूबरे होते दुनिया के अमीर देश गाहे-ब-गाहे मिल-बैठकर अपनी चिंताएं उजागर करते रहते हैं, लेकिन उनकी इस कवायद से किसी का कुछ खास बनता-बिगड़ता नहीं है। पिछले साल के अंत में इसी तरह का…
सामयिक : ऐसे नहीं चलते देश !
आसपास के सभी पड़ौसी देशों के साथ तनाव हमें कैसी वैश्विक परिस्थितियों में ले जा रहा है? और क्या यह बढ़ता तनाव हमारी बचकानी हरकतों के चलते नहीं बन रहा है? प्रस्तुत है, हाल में बांग्लादेश के एक क्रिकेट खिलाड़ी…
वेनेज़ुएला पर हमला असभ्य गुंडागिरी की निशानी, अमेरिकी तानाशाही का विरोध करना भारत का अनिवार्य कर्त्तव्य
इंदौर, 12 जनवरी। अनेक वामपंथी एवं लोकतान्त्रिक संगठनों ने मिलकर 12 जनवरी 2026 की शाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा अन्य देशों की संप्रभुता पर किये जा रहे हमले के खिलाफ़ कमिश्नर कार्यालय के सामने महात्मा गांधी मार्ग पर प्रदर्शन…
हमारा जीवन-हमारे मानवाधिकार
दुनिया तेज़ विकास की दौड़ में पर्यावरण, गरिमा और मानवाधिकारों की उपेक्षा करती जा रही है। आधुनिकता ने नए जोखिम खड़े किए हैं, जिससे आज की पीढ़ी अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। इसी संदर्भ में मानवाधिकार दिवस 2025 की…
मानवाधिकार की 77वीं वर्षगांठ : आज़ादी, बराबरी और न्याय के वादे पर फिर सवाल
हम 10 दिसंबर को मानवाधिकारों का उत्सव मनाते है। उस दिन की स्मृति में जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1948 में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को अपनाया था। यह घोषणा हमारे समाजों के मानवाधिकार ढांचे की रीढ़ है, जहां हममें…
बैंकिंग से बदलता भारत का परिदृश्य
आज के दौर में औपचारिक आर्थिक ताने-बाने को बनाए रखने के लिए बैंक बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। खासियत यह है कि बैंकों की यह सेवा छोटे-छोटे, स्थानीय ग्रामीणों से लगाकर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचती है। क्या और कैसा है,…









