समसामयिक

सत्ता, विचारधारा और शिक्षा : ऐसे तो नहीं बनेगी भारतीय ज्ञान प्रणाली

भारतीय ज्ञान प्रणाली की दुहाई देने वाली सरकार के दौर में विश्वविद्यालयों में विद्वता, गरिमा और बौद्धिक स्वतंत्रता पर अभूतपूर्व संकट गहराता जा रहा है। बिलासपुर केंद्रीय विश्वविद्यालय में कथाकार मनोज रूपड़ा के साथ कुलपति के अशोभनीय व्यवहार से लेकर…

वेनेज़ुएला पर साम्राज्यवादी आक्रमण : युद्ध, वर्चस्व और विश्व शांति का संकट

वेनेज़ुएला के निर्वाचित राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में साम्राज्यवादी हस्तक्षेप की खतरनाक मिसाल है। यह केवल वेनेज़ुएला की संप्रभुता पर हमला नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून, शांतिपूर्ण सहअस्तित्व और संप्रभु समानता की पूरी व्यवस्था को…

अब तक लटका है, ‘सरदार सरोवर’ का पुनर्वास

‘सरदार सरोवर’ के शुरुआती दौर में तब के ‘नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण’ के उपाध्यक्ष सुशीलचन्द्र वर्मा ने अपनी किताब में दुनिया का सर्वोत्तम विस्थापन-पुनर्वास बताते हुए जिस तरह परियोजना के कसीदे पढ़े थे,आज वे धूल-धूसरित दिखाई दे रहे हैं। बांध…

भूमि की बिगड़ती सेहत और किसान

भारत में भूमि क्षरण अब एक गंभीर राष्ट्रीय संकट का रूप ले चुका है। अत्यधिक कृषि गतिविधियाँ, रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग, शहरीकरण, औद्योगीकरण और जल संसाधनों का असंतुलित दोहन देश की 30 प्रतिशत से अधिक भूमि की सेहत बिगाड़…

गणित को अनुभूति बनाने वाला अमर साधक श्रीनिवास रामानुजन 

भारत में 22 दिसंबर को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय गणित दिवस भारतीय बौद्धिक परंपरा और महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की असाधारण प्रतिभा का स्मरण है। यह दिवस गणित को भय नहीं, जिज्ञासा और नवाचार का माध्यम मानते हुए युवा पीढ़ी…

वंदे मातरम की विरासत

अगले साल होने वाले बंगाल विधानसभा के चुनाव ने हमें अचानक ‘वंदेमातरम’ के डेढ़ सौवें वर्ष की याद दिला दी है, लेकिन इस तात्कालिक जरूरत के बावजूद ‘वंदेमातरम’ हमारे बेहद गौरवशाली अतीत को उजागर कर देता है। अरविंद जयतिलक भारत ‘वंदेमातरम’ गीत…

खतरनाक मोड़ पर देश के बांध : जरूरी है बांधों की तत्काल मरम्मत

संसद में सरकार की स्वीकारोक्ति ने देश के जल-संरचनात्मक संकट की गंभीरता उजागर कर दी है। देशभर में 216 बड़े बांध खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके हैं और उनकी तत्काल मरम्मत जरूरी है। यह आंकड़ा केवल तकनीकी चेतावनी नहीं, बल्कि…

विद्युत सुधार : निजीकरण के सौ बहाने

करीब दो दशक पहले ‘टाटाराव कमेटी’ ने घाटे में चल रहे ‘मध्यप्रदेश विद्युत मंडल’ को ‘मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड’ में तब्दील करके दावा किया था कि अब इसके अंतर्गत बनी ‘मध्यक्षेत्र,’ ‘पूर्व क्षेत्र’ और ‘पश्चिम क्षेत्र’ की तीन कंपनियां…

हमारा जीवन-हमारे मानवाधिकार

दुनिया तेज़ विकास की दौड़ में पर्यावरण, गरिमा और मानवाधिकारों की उपेक्षा करती जा रही है। आधुनिकता ने नए जोखिम खड़े किए हैं, जिससे आज की पीढ़ी अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। इसी संदर्भ में मानवाधिकार दिवस 2025 की…

मानवाधिकार की 77वीं वर्षगांठ : आज़ादी, बराबरी और न्याय के वादे पर फिर सवाल

हम 10 दिसंबर को मानवाधिकारों का उत्सव मनाते है। उस दिन की स्मृति में जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1948 में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को अपनाया था। यह घोषणा हमारे समाजों के मानवाधिकार ढांचे की रीढ़ है, जहां हममें…