Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

समसामयिक

नामकरण ही नहीं, उसके पीछे के इरादे भी जानना ज़रूरी है!

नए स्टेडियम के नाम के साथ और भी कई चीजों के बदले जाने की शुरुआत की जा रही है। यानी काफ़ी कुछ बदला जाना अभी बाक़ी है और नागरिकों को उसकी तैयारी रखनी चाहिए। केवल सड़कों, इमारतों, शहरों और स्टेडियम…

अब धर्म-धुरीण बचाएंगे, धरती को

सवाल है कि ‘चमोली त्रासदी’ जैसी आपदाओं को, अपनी विकास की हठ में बार-बार खडी करने वाले राजनेताओं से धर्मगुरु किस मायने में भिन्न और बेहतर साबित होंगे? क्या वे अपने पास-पडौस के समाज, वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों की कोई बात…

हुकूमत को अब गिलहरियों की हलचल से भी ख़तरा!

प्रजातांत्रिक व्यवस्था में अगर नागरिकों के शांतिपूर्ण तरीक़े से विरोध व्यक्त करने के अधिकार छीन लिए जाएँगे तो फिर साम्यवादी/तानाशाही देशों और हमारे बीच फ़र्क़ की सारी सीमाएँ समाप्त हो जाएँगी। एक प्रजातंत्र में नागरिक आंदोलनों से निपटने की सरकारी…

चमोली त्रासदी की इंसानी वजहें

सीखने-सिखाने के मामले में हमारा ‘ट्रैक-रिकॉर्ड’ कोई उत्साहवर्धक नहीं रहा है। मसलन – उत्तराखंड में हाल में आई भीषण आपदा से क्या हम कुछ सीखेंगे? क्या पहले भी कभी कुछ सीखा गया है, ताकि भविष्य में ऐसी आपदाएं नहीं हों…

पाखंड की परम्परा

क्या वे अपने जैसे नर्मदा तट के उन लाखों रहवासियों के बारे में कभी सोच पाते हैं जिन्हें बड़े बांधों के नाम पर अपने-अपने घर-बार से जबरन खदेड़ दिया गया है और जिनके पुनर्वास के बारे में विचार तक करना…

शिक्षा का केन्द्रीय बजट यानि ‘गरीबी में गीला आटा’

हाल के केन्द्रीय बजट में राज्यों के खाते में आवंटित शिक्षा-बजट की राशि बहुत कम करके केन्द्र सरकार आखिर क्या करना चाहती है? कोरोना महामारी के बाद करीब सालभर में पहली बार खुल रहे गांव-खेडे के स्कूलों को अपने रख-रखाब…

कितनी कारगर होंगी, इक्कीस साल में लड़कियों की शादी

लड़कियों के विवाह की उम्र 18 से 21 वर्ष करने के केन्द्र सरकार के प्रस्ताव ने समाज में इन दिनों भारी हलचल मचा दी है। एक तरफ सरकार उम्र बढाने से लड़कियों को मिलने वाली सामाजिक बराबरी, प्रजनन स्वास्थ्‍य की…

अब भी प्रकृति से सीखने का अवसर है – राजेंद्र सिंह

उत्‍तराखंड में ग्‍लेश्यिर के फटने से हुए विनाश पर पर्यावरण विद राजेंद्र सिंह की प्रतिक्रिया हाल ही में चमोली जिले में एवलांच के बाद ऋषिगंगा और फिर धौलीगंगा पर बने हाइड्रो प्रोजेक्ट का बांध टूटने पर प्रसिध्‍द पर्यावरण विद एवं…

किसानों के लिए क्या मायने रखता है, ताजा बजट

पिछले करीब सवा दो महीनों से दिल्ली को घेरे बैठे किसानों के आसन्न संकट के दौरान आए केन्द्र सरकार के बजट से किसान-हितैषी होने की अपेक्षा थी। वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण में यत्र-तत्र किसानों का जिक्र भी किया, लेकिन…

कारपोरेटीकरण का बजट

दो दिन पहले आए केन्द्र के बजट पर प्रधानमंत्री ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि पिछले सालभर में कई ‘मिनी बजट’ आते रहे हैं और इस बार का बजट इसी श्रंखला का एक और पडाव भर होगा। एक फरवरी…