कला और संस्‍कृति

कुमार अम्बुज : कविता जीवन पर निर्बल की सच्ची पकड़ है

कुमार अम्बुज की कविताएँ हमारे समय की बेचैनियों, विडंबनाओं और उम्मीदों की साक्षी हैं। हाल ही में कुसुमाग्रज सम्मान से सम्मानित अम्बुज ने अपने लेखन से यह सिद्ध किया है कि कविता केवल शब्दों का विन्यास नहीं, बल्कि समाज के…

दीपावली : रोशनी का नहीं, रिश्तों और जिम्मेदारी का पर्व

दीपावली केवल रोशनी और उत्सव का नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, पारिवारिक बंधन और मानवीय संवेदनाओं का पर्व है। यह त्योहार न केवल अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है, बल्कि समाज में सद्भाव, समानता और सहयोग की भावना को…

दीपावली : रोशनी घर में नहीं, दिलों में भी फैलाएं

दिवाली रोशनी का नहीं, संवेदनाओं का भी त्योहार है — वह जो भीतर के अंधकार को मिटा सके। आज जब कृत्रिम उजालों में रिश्तों की ऊष्मा खोती जा रही है, जरूरत है कि हम अपने भीतर करुणा, प्रेम और अपनापन…

कहानीकार दिनेश भट्ट का कहानी पाठ : अव्यक्त दुःख को अभिव्यक्ति देतीं कहानियाँ

इंदौर, 4 अक्टूबर। हिंदी में कहानी का कलेवर आमतौर पर छोटा होता है और उपन्यास या लंबी कहानी की तरह उसमें एक से ज़्यादा मुद्दे उठाने की गुंजाइश नहीं होती। दिनेश भट्ट अपनी कहानी में यह जोख़िम उठाते है और…

पंडित छन्नूलाल मिश्रा : ठुमरी और कजरी के लोक स्वर की विदाई

बनारस घराने की ठुमरी परंपरा के जीवंत स्तंभ और पद्मभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके स्वर में ठुमरी, कजरी, चैती और दादरा का वह अद्वितीय संगम था जिसने शास्त्रीयता को लोकजीवन की…

दशहरे पर पूजनीय-शमी : विजय, परंपरा और पर्यावरण का अमर प्रतीक

दशहरे पर शमी पूजन की परंपरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है बल्कि इतिहास, लोकजीवन और पर्यावरणीय महत्व को भी दर्शाती है। राजस्थान में खेजड़ी कहलाने वाला यह वृक्ष रेगिस्तान का राजा माना जाता है, जिसकी छाया, फलियां और…

हिन्दी दिवस : विश्व की सबसे समृद्ध भाषा है हिन्दी

हिन्दी, जो संस्कृत से विकसित होकर देवनागरी लिपि में लिखी जाती है, भारत की राजभाषा और विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। यह न केवल जनभाषा के रूप में लोगों को जोड़ती है बल्कि हमारी संस्कृति,…

हरियाली अमावस्या : कल्पवृक्ष पूजन मेला

हमारे देश में अलग-अलग पर्वों पर पीपल, बरगद, आंवला, शमी, इमली आदि वृक्षों की पूजा की जाती है, परन्तु राजस्थान के अजमेर के पास गांव मांगलियावास में सावन की हरियाली अमावस्या पर कल्पवृक्षों के जोड़े की पूजा की जाती है।…

वाद्य निर्माण : मिरज में मौजूद है, सितार को ‘जन्म’ देने की परंपरा

सितार समेत तरह-तरह के तार-वाद्यों के निर्माण के लिए विख्यात दक्षिण महाराष्ट्र का शहर मिरज भारतीय शास्त्रीय संगीत का केन्द्र भी है। सितार बनाने वाले शिकलगार, जिन्हें कई जगहों पर अपराधी माना जाता है, डेढ़ सौ साल पहले तक हथियार…

क्यों है, बोधगया के महाबोधि मंदिर पर विवाद?

फरवरी से बौद्ध समाज भगवान बुद्ध के निर्वाण-स्थल बोधगया के महाबोधि मंदिर के सामने धरने पर बैठे हैं। वजह है – प्रबंधन में ब्राम्हणवादी तौर-तरीकों का बढ़ता दबाव। इतिहास बताता है कि अपने समय में साक्षात गौतम बुद्ध और बाद…